ancient temples

ओडिशा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर सांस्कृतिक व धार्मिक दृष्टि से बेहद ही महत्वपूर्ण हैं। यहां पर कई बेहद ही प्राचीन मंदिर स्थित हैं और हर मंदिर का अपना एक अलग महत्व है। वैसे जब ओडिशा में स्थित मंदिरों का नाम लिया जाता है तो लिंगाराजा मंदिर, राजारानी मंदिर या परशुरामेश्वर मंदिर जैसे बेंहद पॉपुलर व प्राचीन मंदिरों का नाम ही दिमाग में आता है। लेकिन यह शहर सिर्फ इन्हीं मंदिरों तक सीमित नहीं है। ओडिशा के भुवनेश्वर के हर नुक्कड़ पर आपको ऐसा मंदिर नजर आ जाएगा, जो एक समृद्ध इतिहास अपने भीतर समेटे हुए है। इसके प्रमुख आकर्षण और गौरवशाली अतीत की याद दिलाने वाले इसके स्मारकीय कलिंग वास्तुकला मंदिर हैं। यहां पर स्थित मंदिरों की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। इस शहर को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको भुवनेश्वर में स्थित एक प्राचीन मंदिर मैत्रेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी दे रहे हैं-

भगवान शिव को समर्पित हैं मंदिर

यह एक हिन्दू मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इसका निर्माण 12 वीं और 14 वीं शताब्दी के बीच गंगा शासन के दौरान पंचरथ शैली में किया गया था। इस मंदिर के कॉम्पलेक्स में दो मंदिर है। जिसमें मुख्य मंदिर मैत्रेश्वर मंदिर है, जबकि दूसरा मंदिर अपेक्षाकृत छोटा है और यह लबन्येश्वर मंदिर है।

बेहद सुंदर हैं मूर्तियां

मैत्रेश्वर मंदिर का निर्माण बलुआ पत्थर की मदद से किया गया है। मंदिर के बाहरी हिस्से में काफी सुंदर मूर्तियां हैं, जिनमें नाग, यलिस, नृत्य करती महिलाएं या विभिन्न मुद्राएं और हाथी आदि शामिल हैं। मंदिर के अंदर गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर एक नवग्रह पैनल है। इतना ही नहीं, मंदिर की दीवारों के चारों ओर देवी लक्ष्मी सहित गणेश जी व कार्तिकेय जी की भी मूर्तियों को आसानी से देखा जा सकता है, हालांकि, यह मूर्तियां कुछ हद तक नष्ट हो चुकी हैं। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार मंदिर के कुछ हिस्सों को बंगाल सल्तनत के एक मुस्लिम जनरल द्वारा नष्ट कर दिया गया था। आज भी मंदिर के परिसर में इन नष्ट हुए हिस्सों को देखा जा सकता है।

यहां स्थित है मंदिर

मैत्रेश्वर मंदिर रथ रोड के दाईं ओर स्थित है। यह ओल्ड भुवनेश्वर सिटी में मकरेश्वर मंदिर के ठीक सामने है। कई बार लोग मैत्रेश्वर मंदिर को पापनासिनी मंदिर भी समझ लेते हैं, क्योंकि मैत्रेश्वर मंदिर पापनासिनी मंदिर परिसर में स्थित है। हालांकि, यह दोनों मंदिर अलग है। मैत्रेश्वर मंदिर में स्थित मूर्तियां कुछ हद तक डैमेज्ड हैं।

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