हमेशा से करना चाहती थी कुछ अलग
शुरू से ही उर्मिला बहुत एक्टिव रही हैं। स्कूल के दिनों में ताइक्वांडो की हरियाणा टीम की कैप्टन थी। दो बार नेशनल में भी खेल चुकी हैं। वो शादी के बाद भी हमेशा से अपना मन बनाकर रखी थी कि वो कुछ न कुछ तो जरूर करेंगी। वो बताती हैं कि शुरू से जब भी उन्हें आस-पास कोई बुजुर्ग दिखते जिन्हें मदद की जरूरत हो तो वो खुद आगे बढ़कर अन्हें डॉक्टर के यहां ले जाना आदि कराती थी। 
 
ऐसे की अपने क्लब की शुरूआत
उर्मिला बताती हैं, ‘अपने क्लब की शुरूआत के पहले मैं कई तरह के संस्थाओं से जुड़ी रही। मैंने किटी भी खूब जॉइन किएं, लेकिन मुझे संतोष नहीं मिल रहा था।’ फिर उन्होंने अपनी दोस्तों के साथ मिलकर अपने क्लब की शुरूआत की। 
 
मेरी नज़र में खुशी– मैं तभी खुश होती हूंम जब मेरे आस-पास सबके चेहरे मुझे हंसते और मुस्कुराते दिखें। 
जीवन का मंत्र– अपने संस्कारों को युवा जेनरेशन को बताते ओर समझाते आगे बढ़ना।
 
देना चाहती हैं ये संदेश–  पैरेन्ट्स बच्चों से बातचीत के दौरान उन्हें ये जरूर बताएं कि कैसे उन्हें अपनी सीमा खुद तय करनी है। लड़के और लड़कियां दोनों ही एक दूसरे के प्रति सम्मान रखें। 
 

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