• लाल गुड़हल के फूलों को कांजी के साथ पीसकर पीने से माहवारी खुल जाती है।
  • असंगध का चूर्ण बनाकर रख लें। 6 ग्राम चूर्ण में बराबर की मात्रा में पिसी मिश्री या चीनी मिलाकर ठंडे पानी के साथ खायें।
  • गाजर के बीज 30 ग्राम कूटकर, 500 ग्राम पानी में उबालें, जब पानी आधा रह जाए तो थोड़ी शक्कर डालकर 2-3 दिन पिलायें, माहवारी खुल कर आती है।
  • चार माशा नीम की छाल को कूटकर दो तोला गुड़ के साथ पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो गुनगुने पानी के साथ पीने से मासिक धर्म की रुकावट दूर होती है।
  • मासिक धर्म होने के लिए गाजर के बीच पानी में पीसकर पांच दिन तक पीना à¤šà¤¾à¤¹à¤¿à¤à¥¤
  • महिलाओं के मासिक धर्म के समय अधिक रक्तस्त्राव होने पर उसे रोकने के लिए गाय के एक पाव दूध में केले के पत्ते का एक छटांक रस मिलाकर सुबह खाली पेट एक सप्ताह तक देना चाहिए।
  • कथीरिया गोंद और 10 ग्राम गोंद रात को 1 कप पानी में भिगोकर रख दें। सवेरे इसमें 10 ग्राम पिसी मिश्री मिलाकर पी लें। इससे पित्त और गर्मी के कारण होने वाले प्रदर रोग में आराम होता है।
  • आवंले के चूर्ण 3 ग्राम 6 ग्राम शहद में मिलाकर नित्य एक बार 30 दिन तक निरन्तर लेने से श्वेत प्रदर में लाभ होता है।
  • 20 ग्राम आंवले का रस शहद में मिलाकर तीस दिन तक पीने से श्वेत प्रदर में आराम मिलता है।
  • गाय के दूध में 25 ग्राम अशोक की छाल को पकाकर, उसमें मिश्री मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिनों तक पीने से रक्त-प्रदर में लाभ होता है।
  • जामुन की हरी ताजा छाल छाया में सुखाकर बारीक करके 4-4 ग्राम सुबह-शाम बकरी के दूध के साथ या गाय के दूध के साथ लेेने से प्रदर में फायदा होता है।   

  

 

  • सफेद जीरा, शतावर आंवला, नीम की छाल, तीन-तीन माशे लेकर, पाव -भर पानी में पीस व छानकर ठंडाई की तरह पीएं।
  • लौकी के बीजों की पिट्ठी बनाकर घी में भून लें। मिश्री डालकर इसका हलुआ बना लें और प्रातः काल खाएं।
  • मौलसिरी की छाल सुखाकर पीस लें और बराबर वजन की खांड मिलाकर प्रतिदिन सुबह नौ माशे पानी के साथ खाएं।
  • सूखा आंवला व मुलेठी दोनों बराबर मात्रा में लें और बारीक पीसकर छान लें, तिगुने शहद में मिलाकर सुबह-शाम 6-6 माशे दूध से लें।
  • अशोक की छाल रक्त प्रदर में, पेशाब रूकने आदि रोगों में तुरंत लाभ पहुंचाती है।
  • श्वेत प्रदर में अशोकत्व चूर्ण एवं मिश्री समभाग में गाय के दूध के साथ सुबह -शाम देते रहें।
  • तुलसी के रस के साथ जीरा मिलाएं और गौदुग्ध के साथ सेवन करें। प्रदर के लिए लाभदायक होता है।
  • जिन्हें अधिक रक्तस्त्राव है, उन्हें 2 ग्राम लोध का महीन चूर्ण और 2 ग्राम मिश्री मिलाकर ठण्डे पानी के साथ दिन में तीन बार फांक लेना चाहिए। इससे गर्भाशय की शिथिलता व ढीलापन भी दूर होता है। इसका आवश्यकता के अनुसार लगभग 4-5 दिन सेवन करना चाहिए।
  • गूलर वृक्ष के साफ किये हुए 5-6 फल या इसी वृक्ष की अन्तरछाल 20-25 ग्राम मात्रा में घोंट -पीसकर रस निकाल लें और एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम चाट लें।

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