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पेट न केवल हमारे शरीर का बल्कि स्वास्थ्य का भी आधार है इसलिए यह एक नहीं कई रोगों से प्रभावित रहता है, फिर कब्ज हो या दस्त, एसीडिटी हो या दर्द यह भिन्न-भिन्न रोगों से घिरा रहता है। ऐसे में क्या हो इनका घरेलू उपचार आइए जानते हैं?

अक्सर खान-पान की शैली ठीक न होने के कारण कब्ज जैसी बीमारी होती है। कई बार खाली पेट काऌफी देर तक रहने पर भी कब्ज होती है। नीचे कुछ ठोस एवं सरल नुस्खे बताए गए हैं जो काफी फायदेमंद साबित होंगे।

कब्ज दूर करने के उपाय

01. आंवला चूर्ण एक चम्मच रात में सोते समय पानी या दूध के साथ फांकने से कब्ज दूर होती है। आंवला चूर्ण को मधु के साथ भी ले सकते हैं।

02. छुआरा और आंवला एक-एक नग रात को पानी में भिगोने के बाद सुबह मसलकर और छानकर 2 या 3 छोटे चम्मच दिन में 2-3 बार पीते रहने से भी कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।

03. त्रिफला, आंवला, हरड़, बहेड़ा-चूर्ण या केवल आंवला चूर्ण 5-10 ग्राम (1-2 छोटे चम्मच) सोते समय रात में गर्म दूध या गर्म जल के साथ फांकने से कब्ज दूर होती है।

04. सेब और चुकन्दर का रस पीते रहने या सेब व चुकन्दर खाते रहने से कब्ज दूर होती है।

05. ग्वार पाठा (घृतकुमारी, घीग्वार) की मांसल पत्तियों के रस या गूदे में नमक मिलाकर सेवन करने से कब्ज दूर होती है।

06. सुबह उठते ही बासी मुंह तांबे के बर्तन में साफ रखा हुआ पानी पीते रहने से कब्ज दूर होती है।

07. पपीता और अमरूद तो स्वयं ही कब्ज की औषधियां हैं। इनका नियमित प्रयोग करते रहने से कब्ज होने का प्रश्न ही नहीं पैदा होता।


08. दो नींबू का रस, सुबह शौच के बाद, पुन: शाम को 250 मिली पानी के साथ पीने से कब्ज दूर होती है।

09. प्रतिदिन नियमित रूप से भोजन के बाद तुलसी की कुछ पत्तियां स्वच्छ जल के साथ लेने से पुराने-से-पुराना कब्ज दूर हो जाता है।

10. नीम के फूलों को साफ पानी में धोकर सुखा लें और उन्हें पीसकर रख लें। यह चूर्ण चुटकी-भर नित्य रात को गर्म पानी से फांक लें। कब्ज में फायदा होता है।

11. कब्ज होने पर देसी घी में पिसी हुई काली मिर्च मिलाकर खाएं, साथ ही प्रतिदिन सोने से एक घण्टा पूर्व गर्म दूध में थोड़ा-सा देसी घी मिलाकर पीएं।

12. पेट में दर्द, अफारा, ऐंठन और कब्ज की शिकायत होने पर हींग को गर्म पानी में घोलकर नाभि व उसके आस-पास लगा दें, साथ ही नमक के साथ हींग के चूर्ण का सेवन करें।

13. 1 ग्राम सनाय (सोनामुखी) का चूर्ण कच्ची इमली के साथ सेवन करने से कब्ज दूर होती है।
द्य रात को सोते समय एक कप दूध में एक अंजीर और चार मुनक्के (बीज निकले हुए) पकाकर खा लें। ऊपर से दूध पी लें। पुरानी-से-पुरानी कब्ज तोड़ता है।

14. तुलसी के पत्तों का रस, शहद, अदरक का रस और प्याज का रस समान मात्रा में लेकर चाटने से सूखा तथा आंतों में जमा हुआ मल ढीला होकर निकल जाता है।

15. अमरूद खाने से आंतों में तरावट आती है और कब्ज दूर होती है। इसे रोटी खाने से पहले खाना चाहिए, क्योंकि रोटी खाने के बाद यह कब्ज करता है। इसे सेंधा नमक के साथ खाने से पाचनशक्ति में सुधार होता है।

16. नींबू का रस और शक्कर 12 ग्राम, एक गिलास पानी में मिलाकर रात को पीने से कुछ ही दिनों में पुरानी कब्ज दूर हो जाती है।

17. भूखे पेट सेब खाने से कब्ज दूर होती है। सेब का छिलका दस्तावर होता है। अत: कब्ज वालों को सेब छिलका सहित खाना चाहिए। खाना खाने के बाद सेब खाने से कब्ज हो जाती है। अत: कब्ज वालों को खाना खाने के बाद सेब नहीं खाना चाहिए।

18. नित्य खाये जाने वाली सागसब्जी में लहसुन डालकर पकाएं। इस प्रकार नित्य लहसुन खाने से कब्ज नहीं रहती।

19. हरड़, सौंफ, छोटी मिश्री समान मात्रा में पीस कर मिला लें। इसको एक चम्मच रात को सोते समय पानी से लें कब्ज नहीं होगी।

20. गुलाब की पत्ती, सनाय तथा छोटी हरड़ तीनों को 3:2:1 के अनुपात में 50 ग्राम लेकर उबाल लें। चौथायी पानी रहने पर रात में गुनगुना ही पी जाएं। कब्ज पर ये प्रयोग रामबाण है।

पेचिश व दस्त की दवा

यदि पेचिश व दस्त की सही समय पर चिकित्सा न की जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकते हैं अत: विशेष रूप से सावधानी रखें एवं इन उपायों का पालन करें।

01. अनार की पत्तियों के रस में दो चम्मच शक्कर मिलाकर पीने से दस्त बंद हो
जाते हैं।

02. एक गिलास नारियल पानी के साथ, एक चम्मच पिसा हुआ सफेद जीरा खाने से दस्त बंद हो जाते हैं।

03. अजवायन, सोंठ, पटोपत्र, कूट, बच, बेलगिरी-इनका 1 माशा चूर्ण शीतल जल के साथ लें।
द्य अतीस, इन्द्र जौ, बेलगिरी, धनिया, नागरमोथा, सुगंधबाला-इनका 1 माशा चूर्ण लेकर शीतल जल के साथ लें।

04. जायफल 1 तोला, छुहारे का बक्कल 1 तोले, बेलगिरी एक तोला, अफीम 1 माशा-इन्हें पान के रस में मिलाकर मूंग जैसी गोलियां बना लें। दो-दो गोली गुनगुने पानी के साथ लें।

05. भोजन न करें और ठंडे जल में आधे नींबू का रस तथा थोड़ी काली मिर्च मिलाकर दिन में कई बार लें, दस्त बन्द हो जायेंगे।

06. दस्त लगने पर सौंफ को घी में भूनकर पीस लें, उसमें थोड़ी चीनी मिला दें।
इस चूर्ण को सुबह-शाम खायें, दस्त बन्द हो जायेंगे।

07. दालचीनी चूर्ण और पिसा कत्था 1-1 ग्राम मिलाकर पानी के साथ सुबह-शाम फांकने से अपच से होने वाले दस्त बन्द हो जाते हैं।

08. अनार का रस पीना लाभदायक है।

09. इस रोग में आम की गुठली को पीसकर छाछ के साथ पीने से लाभ होता है।

10. काली गाजर का रस पीने से पुरानी-से-पुरानी पेचिश में लाभ होता है।

11. दस्त होने पर छाछ पीने से लाभ होता है।

12. सौंफ को गर्म जल में उबालकर
छान लें और थोड़ा-सा काला नमक डालकर दो-तीन बार पीने से पेचिश में लाभ होता है।
द्य कागजी नींबू की शिकन्जी, ग्लूकोज पीना, दही के साथ मेथी खाना आदि पेचिश रोग में लाभदायक है।

13. पका हुआ बेल का गूदा दही के साथ खाने से दस्तों में लाभ होता है। बकरी का दूध भी दस्त बन्द कर देता है।

14. बहुत पतले दस्त हो रहे हों तो आंवला मोटा पीसकर नाभि के चारों ओर लगा दें, इस घेरे के बीच में अदरक के रस में भिगोया कपड़ा रखें और उस पर थोड़ा-थोड़ा अदरक का रस डालते रहें। साथ ही अदरक का रस पिलायें भी। इससे दस्त काबू में आ जाता है।

उल्टी के लिए

यदि किसी भी कारण से उल्टियां आ रही हों तो रोगी को देसी उपायों से आराम पहुंचा सकते हैं।

01. आधे नींबू का रस, एक छटांक पानी, एक माशा छोटी इलायची के दाने, सबको मिलाकर दो-दो घंटे बाद पिलायें। उल्टी बंद करने के लिए बहुत अच्छा नुस्खा है।

02. यदि दमा-खांसी हो तो अदरक का रस और शहद तीस-तीस ग्राम मिलाकर गुनगुना करके दिन में तीन बार पियें।

03. दूब की जड़ का रस निकालकर, उसमें छोटी इलायची का चूर्ण दो माशे मिलाकर चटाएं।
द्य गेहंू की रोटी को जलाकर उसकी राख पानी में घोल लें। जब पानी निथर जाए तो रोगी को निथार कर पिलाएं।

04. गेरू को आग में खूब लाल करें, उसे पानी में बुझाएं और उस पानी को निथारकर पिलाएं।
द्य नींबू बीच से काटकर उसमें सेंधा नमक, काली मिर्च पीसकर गोद-गोदकर भर दें। फिर उसे आग पर गरम करके चूसें।

05. हींग को पानी में घोलकर पेट पर हल्की-हल्की मालिश करें।
द्य एक गिलास गर्म जल में एक नींबू का रस तथा थोड़ा-सा शहद मिलाकर लें। उल्टी बन्द होगी और भूख लगेगी।

06. थोड़ा-थोड़ा शहद चाटने पर उल्टियां रुक जाती हैं।

07. इलायची के दानों का चूर्ण बनाकर शहद के साथ खाने से घबराहट दूर होती है और उल्टी भी नहीं होती है।

08. उल्टी होने पर कागजी नींबू को जलाकर उसकी एक चुटकी राख में शहद मिलाकर चाटने पर काफी राहत मिलती है।

09. पित्त वमन होने पर एक गिलास गन्ने के ताजे रस में दो चाय की चम्मच शहद घोलकर पीते रहना हितकर है।

10. जायफल को पानी में घिसकर लेप बनाएं और उसे पानी में घोलकर पीने से जी मिचलाना बन्द होता है।

11. जी मिचलाने पर नमक के साथ प्याज खाने से लाभ होता है।

क्या करें जबएसिडिटी सताए

यह रोग आज की आरामदायक जीवनशैली की देन है। जब जीभ पर काबू न रहे और ऌिफर एसिडिटी सताए तो ये उपाय जरूर अपनाएं।

01. सौंफ व अदरक या जीरे का एक साथ सेवन करने से पेट की जलन व हाजमे में लाभ होता है।

02. बबूना अथवा बबूनी के फूल का पॉउडर एक से दो ग्राम या इसके फूलों के तेल की 2-3 बूंदें सीने में जलन, पेट दर्द एवं तनाव से उत्पन्न एसिडिटी में विशेष लाभदायक होती हैं।

03. भोजन के पश्चात् सौंफ के सेवन से सांस की बदबू, अपच व उल्टी में भी आराम मिलता है। इसके अतिरिक्त 15-20 ग्राम सौंफ को 100 ग्राम पानी में आधा घंटे उबाल कर बचे पानी का सेवन करने से अपच, उबकाई तथा खाने के पश्चात हुए पेट दर्द व एसिडिटी में राहत मिलती है।

04. एक कप गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से गैस व घबराहट ठीक होती है।
द्य एक गिलास पानी में 60 ग्राम पुदीना, 10 ग्राम अदरक, 10 ग्राम अजवायन को डालकर उबालें। खूब उबलने पर इसमें आधा कप दूध, तथा चीनी डालकर चाय की तरह पियें। गैस दूर होगी और पाचन शक्ति बढ़ेगी।

05. एक लहसुन की फांक छीलकर बीज निकले हुए 4 नग मुनक्कों के साथ, भोजन के बाद चबाकर निगल जाएं। इस विधि से पेट में रुकी हुई वायु तत्काल निकल जाएगी।

06. अलसी के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से गैस की शिकायत दूर हो जाती है।

07. अजवायन, सौंफ, काला नमक, काली मिर्च बारीक कूट-छानकर ताजे पानी से लें, अफारा ठीक हो जाएगा।

08. अदरक और पिसा धनिया समान मात्रा (लगभग एक चम्मच) में लेकर खायें। इससे एसिडिटी से छुटकारा मिलेगा।

09. पेट की वायु को ईसबगोल भी नष्ट करता है। ईसबगोल की मात्रा ज्यादा नहीं लेनी चाहिए।
द्य पुननर्वा के मूल का चूर्ण 2 ग्राम, हींग 1/2 ग्राम तथा काला नमक 1 ग्राम गर्म पानी से लें। पेट के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

10. आंवले का रस, मिश्री और भुने जीरे का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीने से अम्लपित्त की विकृति नष्ट होती है।

जब न लगे भूख

द्य अनान्नास का रस आधा गिलास भोजन करने से पूर्व पी लेने से भूख लगने लगती है।
द्य अदरक भोजन में स्वाद और रुचि उत्पन्न करता है। 6 ग्राम अदरक खूब महीन कतरकर, उसमें नमक मिलाकर दिन में भोजन के आधा घंटा पूर्व एक बार खाते रहने से 7-8 दिन में भूख लगने लगती है और पेट की गैस साऌफ हो जाती है।

01. केवड़े के फूल को पानी में छोड़ दें। कुछ देर बाद उस पानी को पी जाएं, भूख खुल जाएगी। इसी के साथ शरीर की गर्मी भी निकल जाएगी और शरीर में तरावट आ जाएगी।

02. अनार भी क्षुधावर्धक होता है। इसका सेवन करते रहने से भूख बढ़ती है।

03. नींबू का रस पानी में डालकर नित्य प्रात: निराहार पीने से भूख बढ़ती है।

04. दो छुहारों का गूदा निकालकर डेढ़ पाव दूध में पका लें। छुहारे का रस निकल आने पर गूदे को अलग करके दूध को पी जाएं। ऐसा करने से भूख बढ़ती है और खाना भी ठीक पचता है।

05. जीरा, सोंठ, अजवायन, छोटी पीपल और काली मिर्च समान मात्रा में ले लें। उसमें थोड़ी-सी भुनी हींग मिला लें। फिर इन सब को खूब बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। इसे शीशी में रख लें। इस चूर्ण का थोड़ा-सा भाग म_े में छोड़कर नित्य कम-से-कम दो सप्ताह तक लेते रहने से भूख बढ़ने लगती है।

06. भोजन के आधा घंटे पूर्व चुकन्दर, गाजर, टमाटर, पत्तागोभी, पालक व अन्य हरी साग-सब्जियों व फलीदा सब्जियों के मिश्रण का झोल (रसा) पीने से क्षुधा बढ़ती है।

07. सेब का सेवन करने से भूख बढ़ती है और रक्त भी शुद्ध होता है।

भोजन के पश्चात् सौंफ के सेवन से सांस की बदबू, अपच व उल्टी में भी आराम मिलता है। इसके अतिरिक्त 15-20 ग्राम सौंफ को 100 ग्राम पानी में आधा घंटे उबाल कर बचे पानी का सेवन करने से अपच, उबकाई तथा खाने के पश्चात हुए पेट दर्द व एसिडिटी में राहत मिलती है।

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