vikram aur betaal ki hindi story
vikram aur betaal

Vikram or Betaal Story in Hindi : गहरी अंधेरी रात थी। जोरों की वर्षा हो रही थी। चारों ओर से आते विचित्र स्वर सुने जा सकते थे, किंतु विक्रमादित्य बिल्कुल भी भयभीत नहीं था। वे शव को नीचे लाने के लिए आगे बढ़ा। उसे कंधे पर लादा व चुपचाप चल दिया।

बेताल ने चुप्पी तोड़ी :- “हे राजा! मुझे तो तुम पर दया आती है। तुम अपना काम पूरा करने के लिए कितनी कड़ी मेहनत कर रहे हो। तुम्हें बार-बार मेरे पीछे आना पड़ता है।”

राजा कुछ नहीं बोला, तो विक्रम एक और कहानी सुनाने लगा।

बहुत समय पहले की बात है, चंद्रकांत नामक राजा था। वह बड़ा वीर तथा दयालु था। वह अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखता था। प्रजा में चारों ओर खुशहाली थी।

एक दिन उसके दरबान ने आकर कहा :- “महाराज! आपको अपनी सेना को सतर्क कर देना चाहिए, क्योंकि पड़ोसी राज्य कभी भी हमला कर सकता है।” राजा ने तत्काल अपने सैनिकों को चौकन्ना रहने व युद्ध की तैयारियां करने के आदेश दे दिए।

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कुछ दिन बाद सचमुच पड़ोसी राज्य ने पूरे दल-बल से हमला कर दिया। राजा के सैनिक तो पहले से तैयार थे। वे भी जम कर लड़े और दुश्मन ने मुंह की खाई।

जब युद्ध समाप्त हुआ, तो राजा ने तय किया कि वह युद्ध की भविष्यवाणी करने वाले दरबान को पुरस्कार देगा।

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अगले दिन राजा ने उसे अपने पास बुलाया व सोने के सिक्कों से भरी थैली भेंट में दी। दरबान खुश था। वह जाने लगा तो राजा ने पूछा :- “एक बात बताओ, तुम्हें कैसे पता चला कि हम पर शत्रु राज्य का हमला होने वाला है?”

दरबान ने कहा :- “महाराज! मैं अपने सपनों के माध्यम से, आने वाली घटनाएं पहले ही देख लेता हूं। एक बार रात को पहरा देते समय, मैंने सपने में देखा कि शत्रु हम पर हमला कर रहा है।”

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उसका उत्तर समाप्त होते ही राजा ने कहा :- “बेशक तुमने हमें पहले से संभलने का संकेत दे कर अच्छा काम किया है, किंतु तुम्हें द्वारपाल के पद से हटाया जाता है।”

दरबार में सभी राजा का निर्णय सुन आश्चर्यचकित रह गए। हालांकि द्वारपाल शांत रहा व राजा का निर्णय स्वीकार किया। उसने कहा :- “जी महाराज! मुझे सजा मिलनी चाहिए। मैं आपके फैसले की कद्र करता हूं।” यह कह कर वह दरबार से चला गया।

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बेताल ने कहानी समाप्त कर, राजा विक्रम से पूछा :- “बता, राजा ने दरबान को नौकरी से क्यों निकाला, जबकि उसने तो राजा की मदद ही की थी।”

राजा विक्रम ने कहा :- “बेताल, द्वारपाल का कर्तव्य होता है कि वह महल के द्वार की पहरेदारी करे। जब उसने कहा कि उसने रात को पहरा देते समय सपने में वह घटना देखी थी, तो राजा जान गया कि वह पहरा देते समय सो रहा था। अपना कर्तव्य सही तरह से न निभा पाने के कारण ही राजा ने उसे काम से निकाला।”

बेताल यह उत्तर सुनकर प्रसन्न हुआ, किंतु राजा ने अपनी चुप्पी तोड़ दी थी इसलिए वह पीपल के वृक्ष की ओर उड़ चला। राजा विक्रम एक बार फिर हाथ में तलवार लिए उसका पीछा करने लगा।

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