ट्रेन चल पड़ी-जब मैं छोटा बच्चा था
Train Chal Padi

Short Story: मैं और मेरा भाई पापा के साथ ट्रेन की यात्रा कर रहे थे। मम्मी नानी
के यहां थी और उन्हें लेने के लिए हम रतलाम से उदयपुर जा रहे थे।
मेरी उम्र लगभग 8 साल होगी। भाई मुझसे दो साल छोटा। ट्रेन एक
स्टेशन पर रुकी तो पापा पानी लेने के लिए उतरे। पापा बोतल में
पानी भर रहे थे कि इतने में ट्रेन चल पड़ी। जैसे ही ट्रेन चली हम डर
गए। लोग भी देखकर चौंक गए कि बच्चे अकेले रह गए और इनके
पापा स्टेशन पर थे। मुझे इतनी तेज रोना आ रहा था कि क्या कहूं।
लेकिन मैंने अपने चेहरे पर ज़रा भी यह ज़ाहिर नहीं किया। भाई को
तो एकदम कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो गया। उसे
चिपका कर मैं चुपचाप बैठ गई। आसपास वाले लोग कहने लगे कि
देखो ये बच्चे कितने बहादुर है कि पापा स्टेशन पर रह गए लेकिन
घबराए नहीं, रोए नहीं। लेकिन उनको क्या पता कि मैं किस कदर
डरी हुई थी और रोना कंट्रोल किए बैठी थी। 10 मिनट बाद पापा
हमारे डिब्बे में आ गए और उनके आते ही मैं उनसे चिपक गई।
पापा को देखकर जैसे जान में जान आ गई हो। लेकिन रुके हुए आंसू
अब निकल पड़े थे। पापा ने दुलार किया और सॉरी कहा। हमारे डिब्बे
में बैठे सभी लोगों ने पापा को कहा कि किस तरह से हम शांत बैठे
थे और कितने बहादुर हैं।
वह दिन में कभी नहीं भूल सकती। मेरे दिमाग में इतने सवाल थे कि
अब क्या होगा। कहां जाएंगे। कौन हमें उठा ले गया तो। सच में मुझे
आज भी वह घटना याद आती है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि मासूम
बच्चे ऐसे कहीं अकेले छूट जाए तो क्या होता है।

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