करोड़ों में एक- हाय मैं शर्म से लाल हुई
Karodo mein Ek

Funny Story: बात उस समय की है जब मैं दिल्ली से रांची अपनी ही शादी में अपने परिवार वालों के साथ जा रही थी। एक नई जगह जाने का मन में डर तो था ही। शादी के लिए कई बार मम्मी पापा को मना करना चाहा पर आखिर उनकी खुशी के लिए मैं मान गई। पापा को अपने होने वाले जमाई बहुत पसंद थे, मैंने उन्हें नहीं देखा था तब तक।
हमारी ट्रेन सुबह पोने चार बजे की थी। स्टेशन से घर दूर होने के कारण रात एक बजे ही हम घर से निकल गए थे।
मुझे  मेरी भाभी और बहन छेड़ रहीं थीं।
 ‘चली मैं पिया की गली…’
हमारी ट्रेन समय से दो घंटे देरी की सूचना हमें मिली तो सभी निश्चिंत हो गए और कुछ लोग सो गए, पापा और भाई हमें बिठाकर वहां से चले गए कि फ्रेश होकर आते हैं।
मैं इधर उधर देख रही थी अचानक अनाउंसमेंट सुनी कि ट्रेन समय पर आ गई है और वो दूसरे प्लेटफार्म पर लगी है। जो वहां से उलटी दिशा में था। मैंने सबको उठाया उन्हें झंकझोते हुए कहा ट्रेन आई ट्रेन आई उठो उठो और यह ख्याल आते ही शरमा गई कि अपनी शादी जिसके लिए कुछ दिन पहले तक मैं तैयार नहीं थी अब उसी में जाने की मुझे ही हड़बड़ी हो रही है।
हमारे पास समान बहुत ज्यादा था और मेरे भतीजे भतीजी भी छोटे थे। सभी यात्रियों के बीच अफरातफरी मच गई थी। हम सबने जितना ज्यादा हो सकता था समान उठाया और  ट्रेन में चढ़ गए फिर मैंने पापा भाई के लिए अनाउंसमेंट भी करवा दी। मेरा अपने समान और सबकी सुरक्षा के प्रति जागरूकता देखकर मेरी मां भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी। जब पापा और भाई गाड़ी में बैठ गए और मां ने बताया किस तरह आपकी इस छोटी बिटिया ने सबको अपने ससुराल जाने वाली ट्रेन में बिठाया और अपना हर एक सामान बड़ी सावधानी से उठाया तो जिस तरह मां बता रहीं थीं पापा हंसने लगे और बोले आखिर करोड़ों में एक है हमारा जमाई। उसके साथ जीवन बिताना है बिटिया को तो ट्रेन तो समय पर पकड़नी ही होगी। करोड़ों में एक वो या मैं… मेरे मुंह से निकल गया… तभी मेरे लिए अलग राज्य ही बनवा लिया। मेरी यह बात सुनकर सब हंँसने लगे और मैं शर्म से लाल हो गई। उस समय कुछ दिन पहले ही बिहार विभाजन से झारखंड बना जिसकी राजधानी रांची जहां मेरा ससुराल है।
जिस शादी के नाम से मुझे चिढ़ हो रही थी तब मन रोमांचित हो गया था।

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