फुर्सत से बनाया-हाय मै शर्म से लाल हुई
Fursat se Bnaya

Funny Story: ससुराल में मेरा पहला दिन था। हमारा रिश्ता घर के बड़ो द्वारा तय किया गया था, इससे पहले हमने एक दूसरे को नहीं देखा था, ना ही कभी हमारी फोन पर बात हुई।यह उस समय की बात है , जब हर घर में फोन नहीं हुआ करते थे। पूरी शादी में मेरे चेहरे पर ,आँखो तक घूँघट था। नया घर नया माहौल, मैं गठरी सी बनी हुई एक हाॅल में बैठी हुई थी। मेरे इर्द-गिर्द रिश्तेदारी के बहुत सी महिलाएं और पुरूष बैठे थे ,मैं नही जानती थी कि वह कौन-कौन हैं ,एक तो घूँघट था, उस पर अंजान लोग। हाँ सब की हँसी ठिठोली के बीच समझ आ रहा था, कि इन सब के बीच में मेरे पति भी हैं! !  उस दिन हम पहली बार रूबरू होने जा रहे थे,क्योंकि मुँह दिखाई रस्म की शुरूआत पहले पति देव को करनी थी। 

       हँसी ठिठोली के बीच ऐसा लग रहा था, जैसे पति देव मेरी सूरत देखने के लिए बेचैन हैं। सब औरतें पति को छेड़ कर हँसी कर रही थीं, पति देव बड़ी बेबाकी से उन्हें जवाब दे रहे थे, वह औरतें उन्हें छेड़ने से बाज नहीं आ रही थी।

बड़ों की आज्ञा मिलने पर, पति देव ने मेरा घूँघट हटाया, तो देखते ही रह गए, नजरें नही हटी, कुछ पल के लिए मेरा घूँघट यूँ ही पकड़े बैठे रहे, अनायास बोल पड़े , “कमाल है ,तुम्हारे मम्मी-पापा ने तुम्हे कहाँ बैठ कर गढ़ा है, बड़ी फुर्सत से गढ़ा है ,यहाँ बात तो माँ-पापा की थी लेकिन मेरी हालत देखने लायक थी। मैनें अपने हाथों से शर्म से मुँह ढाप लिया, उठ कर इधर – उधर भाग ना सकी ,क्योंकि सब लोग घेरे बैठे थे। पतिदेव ने मंगलसूत्र पहना दिया। सारा हाॅल ठहाकों से गूँज गया,  फिर आगे यह रस्म चलती रही।

       बात यहीं खत्म नहीं हुई ,संध्या के समय मैं पग फेरे की रस्म के लिए  अपने मायके गई ।वहाँ कुछ रिश्तेदार जा चुके थे और कुछ मुझ से मिलने के लिए रूके थे।सब को जिज्ञासा थी ससुराल में बिताए पलों के बारे में जानने की, और मैं भी सब को खुशी – खुशी बता रही थी।अचानक मेरी छोटी बहन ने पति देव के बारे में पूछा, “जीजी” – – “जीजा” जी ने मुँह दिखाई की तो क्या कहा ?और क्या दिया? 

मंगलसूत्र दिखाते हुए अचानक मेरे मुँह से निकल पड़ा ,” ये कह रहे थे तुम्हारे मम्मी – पापा ने तुम्हे कहाँ बैठ कर गढ़ा था।”मेरा इतना कहते ही मेरी माँ तो शर्म से लाल हो गई , वह तो वहाँ से नौ -दो -ग्यारह ही हो गई ।सब हँस रहे थे, मैनें अपने कहे शब्दों पर गौर किया ,मुझे समझते देर नहीं लगी,मेरी भी हालत देखने लायक थी, मैं भी अपने कहे शब्दो पर शर्म से लाल हो गई ।

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मैं मधु गोयल हूं, मेरठ से हूं और बीते 30 वर्षों से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है और हिंदी पत्रिकाओं व डिजिटल मीडिया में लंबे समय से स्वतंत्र लेखिका (Freelance Writer) के रूप में कार्य कर रही हूं। मेरा लेखन बच्चों,...