Overview:सत्ता का नशा और पतन की कथा
द्वारकाप्रसाद अग्निहोत्री और उनकी पत्नी सीमा सत्ता के रुआब में डूबकर ऐशो-आराम की ज़िंदगी जी रहे थे, लेकिन एक आतंकवादी को पनाह देने का भांडाफोड़ होते ही सारी चमक-दमक एक पल में छिन गई।
जिन खुशामदी लोगों ने कल तक उनके आगे-पीछे घूमते थे, वही सबसे आगे होकर उनका अपमान करने लगे और दोनों पति-पत्नी रातोंरात अकेले पड़ गए।
Hindi Kahani: तिकड़म में द्वारका प्रसाद अग्निहोत्री जी का जवाब नहीं.मंत्रियों को कैसे ख़ुश किया जाता है इस कला में वो पूरी तरह निपुण थे.और इसी तिकड़मके चलते वो मुख्य मंत्री रघुप्रसाद के घनिष्ट बन गए और अनेक सहयोगियों को धकेलते हुए ज़िलाधीश बन गए.उनकी चाल ढाल और रहन सहन में बदलाव आया.घर नौकरों से भर गया.आए दिन ख़ुशामदी लोग उनका और उनकी पत्नी सीमा अग्निहोत्री की ख़ुशामद करने के लिए उनके बंगले के चक्कर लगाने लगे.
सीमा जी की तो दुनिया ही बदल गई.उनकी जो सहेलियाँ पीठ पीछे उनकी बुराई करतीं थीं।,अचानक ही उनकी घोर प्रशंसक बन गयी.सीमा जी ने भी पुरानी बातों को भुलाकर उन्हें माफ़ कर दिया.पति पत्नी दोनों संतुष्ट संतप्त थे.फ़िलहाल द्वारकाप्रसाद जी को रिटायर होने में चार वर्ष बाक़ी थे.इन चार वर्षों के एक एक क्षण को वो सुख से बिताना चाहते थे,क्योंकि उन्हें ये अच्छी तरह पता था कि एक बार सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद कोई किसी को नहीं पूछता.अग्निहोत्री जी ने तो यह भी सोच रखा था कि रिटायर होने के बाद वो हमीरपुर छोड़ देंगे और दिल्ली के किसी पॉश इलाक़े में बड़ा सा बंगला ख़रीदकर जीवन के शेष दिन दिल्ली में ही बिताएँगे.बेटी गौरांगी कैलिफ़ोर्निया में सेटल थी.बेटे को भी बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी मिल गयी थी.अब पति पत्नी ज़िंदगी के शेष दिन ठाठ से बिताना चाहते थे.
हमीरपुर में सरकारी अफ़सरों का एक क्लब था,जहाँ आए दिन शराब का दौर चलता था,इंडोर गेम्स खेले जाते थे.और राजनेताओं का मज़ाक़ उड़ाया जाता था.वहीं एक लेडीज़ क्लब भी था और ये परंपरा थी कि ज़िलाधीश की पत्नी ही लेडीज़ क्लब की प्रेज़िडेंट बनेगी.
अग्निहोत्री जी के मेजिस्ट्रेट बनते ही उनकी पत्नी सर्वसम्मति से लेडीज़ क्लब की प्रेज़िडेंट बन ग़यी.इसके बाद उनके सम्मान में उसी लेडीज़ क्लब में अनेक पार्टियाँ हुईं.हर पार्टी में यही कहा जाता था कि अगले चार वर्षों तक सीमा जी क्लब की सदस्याओं का मार्गदर्शन करेंगी.क्लब में आए दिन किटी पार्टी होती रहती थी .कभी कभी इन अफ़सरों की पत्नियाँ अपनी बड़ी बड़ी गाड़ियों में बाहर निकलकर बाढ़ या भूकंप पीढ़ितों के लिए चंदा इकट्ठा करतीं थीं या ‘ओल्ड एज होम’ के बूढ़े और लाचार सदस्यों के लिए पुराने कपड़े इकट्ठा करतीं थीं.इनके लिए ये सारे काम पिकनिक के समान थे.

अग्निहोत्री जी व्यवहारिक व्यक्ति थे.अक्सर पत्नी को समझाते कि अधिक दिखावा करने से लोगों की नज़र लग जाती है,और कहीं “सीबीआई”या इनकमटैक्स की रेड पड़ गयी तो लेने के देने पड़ जाएँगे.परंतु सीमा बेअसर ही रहती.पति को समझाती,इतना डरने की क्या ज़रूरत है.हालाँकि अग्निहोत्री जी कुछ कहते नहीं थे परंतु पत्नी की बुद्धि के क़ायल तो थे ही.सीमा पति के समक्ष कई आइ.E एस औफ़ीसरों के उदाहरण प्रस्तुत करती ,जो रिटायर होने के बाद ‘गवर्नर बन गए थे.साथ ही समझाती भी थी की अग्निहोत्री जी को अभी से प्रयासों करना चाहिए और मुख्य मंत्री द्वारा प्रधानमंत्री तक,अपनी योग्यता,ईमानदारीऔर कर्मठता का संदेश भिजवाना चाहिए,तभी रिटायरमेंट के बाद तुरंत उन्हें किसी राज्य का ‘गवर्नर नियुक्त कर दिया जाएगा.अग्निहोत्री जी ने कई बार कोशिश भी की,लेकिन मुख्यमंत्री जी ,जो उन्हें बहुत चाहते थे,
“अभी तो आपको रिटायर होने में काफ़ी समय है,गवर्नर का ओहदापूरी तरह रजनैतिक होता है ,चार वर्षों में देश की राजनीति में बहुत अधिक बदलाव आएँगे.पता नहीं उस समय कौन प्रधानमंत्री होगे,”कहकर बात टाल दिया करते थे.
लोहे को तो उसी समय पीटना चाहिए जब वो लाल हो’सोचकर अग्निहोत्री जी को मुख्यमंत्री की बात सौ टके सही लगती
अग्निहोत्री जी पूर्ण निश्चिन्तया का जीवन जी रहे थे.उनके अधीनस्थ अफ़सर प्रतिमाह नियमित रूप से,अपराधियों से मोटी धनराशि वसूल करके उनकी जेब गरम कर जाते.इसमें से एक तिहाई रक़म ,वो ,प्रतिमाह श्रद्धा पूर्वक मुख्यमंत्री को चढ़ावा चढ़ा आते.सबका काम मज़े में चल रहा था
अग्निहोत्री जी से ज़्यादा रुआब दाब उनकी पत्नी सीमा का था.अधीनस्थ अफ़सरों का तबादला तो वो,स्वयं मोटी रक़म लेकर करवा देतीं थीं.अग्निहोत्री जी तो मात्र इन तबदलों के आदेशों पर हस्ताक्षर करते थे.
महिला क्लब की प्रेज़िडेंट बनते ही मिसेज़ अग्निहोत्री का रूतबा बदल गया .उनके तो पाँव ही ज़मीन पर नहीं पड़ते थे.अभी अग्निहोत्रिजी को मजिस्ट्रेट बने हुए फ़िलहाल छः महीने ही हुए थे कि एक भयानक घटना घटी.सीबी आइ सुरेश सिंह नाम के एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया जो चोरी छिपे ग़ैर लाइसेंस वाली बंदूक़ों को ख़रीद रहा था.कड़ी पूछताछ के बाद पता चला कि उसका असली नाम मोहम्मद युनूस था और वो अग्निहोत्री साहब के आउट हाउस में रहता था.उन्होने अपने सभी स्टाफ़ को हिदायत कर दी थी की मोहम्मद यूनुस को कोई तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए.उनका खाना मजिस्ट्रेट साहब के घर से ही बनकर जाता था.ये व्यक्ति चोरी छिपे बंदूक़े ख़रीदकर उग्रवादियों को दिया करता था.वहाँ से उसे जो रक़म मिला करती थी उसका आधा भाग वो मजिस्ट्रेट साहब को नियमित रूप से दिया करता था.उसके पास से सीबीआइ ने अग्निहोत्री साहब और अन्य बड़े लोगों के साथ खींची हुई अनेक तस्वीरें भी बरामद कीं.
ख़बर मिलते ही मजिस्ट्रेट साहब के होंश उड़ गए.बहुत कोशिश की कि सी बी आइ इस मामले पर पर्दा डाले रहे मुख्यमंत्री से भी गिडगिड़ाकर कहा कि सीबीआइ को डाँट लगवाएँ और मोहम्मद यूनुस को छोड़ दिया जाय,वो तो इसी ग़लतफ़हमी में थे कि मुख्यमंत्री जी उनकी मुट्ठी में हैं,परंतु उन्होंने तो गिरग़िट की तरह रंग ही बदल लिया,इतनाही नहीं,अग्निहोत्रीजी को देशद्रोहियों को पनाह देने के अपराध में हेल्थग्राउंड पर तुरंत रिटायरमेंट लेने के लिए भी कहा.बोले
“अगर तुम ऐसा नहीं करते हो तो लाचार होकर सीबीआई तुम्हें गिरफ़्तार कर लेगी,फिर इनकमटैक्स वाले तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगे.तुम्हारी सारी संपती सील हो जाएगी.तुम तो डूबोगे ही मुझे भी ले डूबोगे.दूसरे,केंद्र में प्रधानमंत्री ,विरोधी दल के हैं वो मेरी बात क्यों मानेंगे?मामला सोशल मीडिया तक पहुँचे और अख़बारों में प्रकाशित हो इससे पहले तुम त्यागपत्र दे दो”
अग्निहोत्री जी को मुख्यमंत्री जी पर बहुत भरोसा था.उन्हें कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि अब वो क्या करें?आँखों से अविरल आँसू बहने लगे.काँपते हाथों से मुख्यमंत्री की टेबल पर से एक सफ़ेद काग़ज़ उठाया और भरे गले से ,जैसा मुख्यमंत्री ने कहा था वही ‘कारण’लिखकर तुरंत त्यागपत्र दे दिया.
अगले दिन मोहम्मद यूनुस के गिरफ़्तार होने और अग्निहोत्री जी के त्यागपत्र देने की ख़बर मोटे अक्षरों में अख़बारों में छपी.मुख्यमंत्री जी के,एक देशद्रोही को पनाह देने और ऐसा घृणित काम करने के अपराध में अग्निहोत्री जी को ख़रीखोटी सुनाने की ख़बर भी अख़बारों में प्रकाशित हुई.अग्निहोत्री जी का मन मुख्यमंत्री जी के कमीनेपन को देखकर चीत्कार कर उठा.साथ ही उन्हें हैरत भी हुई कि,अपनी काली कमाई की आधी रक़म मुख्य मंत्री जी को नियमपूर्वक चढ़ाने के बाद भी मुसीबत के समय में उनकी मदद करने के बजाय उन्होने,इस तरह रंग बदल लिया?अपने को पाक साफ़ और उन्हें चोर साबित कर दिया!
घर जाकर उन्होने पत्नी को सारी बात बतायी कि किस प्रकार उन पर वज्रपात हुआ है तो वो दहाड़ें मर मार कर रोने लगीं उन्हें झपटे उम्मीद नहीं थी कि उनके सपनों का महल इस तरह ढह जाएगा!
अख़बार वालों ने कुछ दिनों तक इस ख़बर का प्रचार ख़ूब ज़ोर शोर से किया.सीमा को जितना इस ख़बर छपने पर आश्चर्य था उससे भी ज़्यादा इस बात पर आश्चर्य था की,उनकी किसी भी सहेली ने उन्हें फ़ोन करके सहानुभूति प्रग़ट नहीं की थी.
एबल महीने लेडीज़क्लब की मीटिंग थी.सीमा अग्निहोत्री अभी तक क्लब की प्रधान थीं.ठीक दस बजे वो क्लब पहुँच गयीं.आज उनके साथ न कोई अंगरक्षक था न ही कोई कोंस्टेबल.सरकारी ड्राइवर के बदले निजी ड़्राइवर था और गाड़ी भी निजी गाड़ी ही थी.उन्होंने मन में सोचा अग्निहोत्री जी ने भले ही त्यागपत्र दे दिया लेकिन,वो तो अभी भी प्रधान ही हैं.वो शीघ्रता से जाकर प्रेज़िडेंट की कुर्सी पर बैठ गयीं.क्लब का सेक्रेटेरी आहिस्ता से वहाँ पहुँचा और धीरे से सीमा के कान में जाकर बोला,
“मैडम,अब आप इस क्लब की प्रेज़िडेंट नहीं रहीं,क्योंकि नियम के मुताबिक़,ज़िलाधीश की पत्नी ही क्लब की ‘प्रेज़िडेंट’ होती है.नए ज़िलाधीश ट्रान्स्फ़र होकर आ रहे हैं.उचित तो यही होगा कि आप भी त्यागपत्र दे दें और भविष्य में क्लब की किटी पार्टी में न आया करें.
अग्निहोत्री जी ने त्यागपत्र देते समय ही पत्नी को भी मक्लब के प्रेज़िडेंट पद से इस्तीफ़ा देने के लिए कह दिया था,साथ ही आगाह भी किया था कि,”सरकारी अफ़सरों की पत्नियाँ बेहद क्रूर होती हैं.वे कोई भी बेहूदा फब्ती कसने से बाज़ नहीं आतीं “पर सीमा को पति की सलाह बिल्क़ुल पसंद नहीं आयी थी.इसी मुग़ाल्ते में रहींकि उन्हें कोई प्रेज़िडेंट की कुर्सी से हिला नहीं सकता है.’
इससे पहले की मिसेज़ अग्निहोत्री सेक्रेटेरी की बात का जवाब देतीं उनकी घनिष्ट मित्र कर्मशीला ने खड़े होकर स्पष्ट किया,,
“मैडम आपके पति को देशद्रोही होने के कारण त्यागपत्र देना पड़ा है .ऐसे व्यक्ति की पत्नी को हम लोग अपने क्लब में कैसे शामिल कर सकते हैं.इसीलिए आप भी त्याग पत्र दे दीजिए,अन्यथा हम आप पर अविश्वास प्रस्ताव लाकर आपको इस पद से हटा देंगे.हाँ एक बात औरहै,कि इस क्लब की मीटिंग और किटी पार्टी में आप तभी शरीक होंगी जब आपको बुलाया जाएगा”
सीमा अग्निहोत्री आँख फाड़फाड़ कर अपनी सहेली को देखती रही.कल तक वो उनकी ख़ुशामद करने में दिन रात एक किए रहती थी,आज कितनी बेशर्म होकर उनका विरोध कर रही है?

उन्हें अभी भी विश्वास था कि उनकी सहेली चाहे उन्हें धोखा दे रही हो लेकिन,क्लब की अधिकतर महिला सदस्याएँ उनके साथ होंगी,क्योंकि,समय समय उन्होने कभी न कभी हर सदस्य की मदद की थी.उन्होंने आव देखा न ताव,बोल उठीं,
“मेरे पति पर लगाए सारे आरोप बेबुनियाद हैं.उन्होने अपने गिरते स्वास्थ्य के कारण “स्वेच्छिक रिटायरमेंट “लिया है.ऐसे व्यक्ति पर कीचड़ उछालना उचित नहीं है.अख़बार वालों का तो यही काम है झूठी सच्ची सनसनीखेज़ ख़बरें छापते रहते हैं,वरना कौन उनका अख़बार पढ़ेगा?”
सारे हॉल में सन्नाटा छा गया.सीमा अग्निहोत्री ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा,”मेरे विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की आवश्यकता नहीं है.जितनी सदस्याएँ यहाँ मौजूद हैं,हाथ उठाकर कहें कि उनके से कितने लोगों का विश्वास मैंने खो दिया है?”
सीमा अग्निहोत्री को यह देखकर घोर आश्चर्य हुआ कि,शत प्रतिशत सदस्याओ ने उनके विरुद्ध हाथ उठा दिए.खीजकर उन्होने टेबल पर रखे हुए एक सादे काग़ज़ पर अपना त्यागपत्र लिखा और कुर्सी को एक झटके से पीछे धकेलते हुए चलने को तैयार हो गयीं.चलते चलते हुए उन्होने कहा,
“आपको आपका “क्लब मुबारक”आपको आपकी “किटी पार्टी “मुबारक मै अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ लूँगी”
कमरे से बाहर निकलते हुए उन्होंने सुना कि,सारी सदस्याएं ज़ोरों से ठहाका लगा रही थीं और उनके ख़िलाफ़ फब्तीयां कस रही थीं,और उनके पति उनके ख़िलाफ़ फबतियाँ कस रहे थे.एक जाना पहचाना सवार उनकी सहेली कर्मशीला का भी था,
“सत्तर चूहे खाकर बिल्ली चली हज की”
सीमा पांडे की आँखों से अविरल आँसू बह रहे थे.उन्होंने ड्राईवर को लगभग डाँटकर कहा “गाड़ी तेज और तेज चलाओ” वो इस माहौल से दूर बहुत दूर निकल जाना चाह रहीं थीं
