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गृहलक्ष्मी की कहानियां - स्माइल प्लीज
Stories of Grihalakshmi

‘सर, मे आई कम इन?

‘यस कम इन…

‘तुम्हारा प्रोजेक्ट रेडी है?

गृहलक्ष्मी की कहानियां – ‘यस सर! आप एक बार देख लेते तो मेरा कॉन्फिडेंस बढ़ जाता और मेरा डर भी कम हो जाएगा। अक्षत ने फाइल खोली। पहले पेज पर लिखा था- ‘स्माइल प्लीज ‘यह तुम्हारी लाइफ का लोगो है क्या? अक्षत प्रोजेक्ट को देख कर बोले, ‘स्माइल मान्या फाइल लेकर डिमान्स्ट्रेशन के लिए हॉल की ओर चल दी। आज उसका पहला डिमान्स्ट्रेशन था। उसने एक-एक प्वायंट पर फोकस किया था। सभी लोगों की जिज्ञासाओं और प्रश्नों का सटीक उत्तर दिया था। अक्षत बहुत खुश था। मान्या को नियुक्त करवह पसोपेश में था। आज वह विश्वास नहींकर पा रहा था कि पांच फुट की चुलबुली मान्या इतनी काबिल और होशियार हो सकती है।

कंपनी के कर्ताधर्ता 35 वर्षीय अक्षत गंभीर स्वभाव के साथ कड़क मिजाज भी थे। ऑफिस के लोग उनसे थर-थर कांपते थे, जहां हर समय टेंशन रहता था। मान्या की नियुक्ति असिस्टेंट मैनेजर पद पर हुई थी। उसकी खिलखिलाहट ने
ऑफिस का माहौल ही बदल दिया था। यहां तक कि कभी न मुस्कुराने वाला अक्षत भी मुस्कुरा उठता था। मान्या को ऑफिस में काम करते 3 महीने हुए थे। एक दिन अक्षत बार-बार स्मोकिंग जोन में जा रहे थे। उसने मेल लिखी, ‘सर क्या
बात है? आज ये आप छठी बार स्मोकिंग जोन में गए हैं। कोई प्राब्लम है तो किसी अपने से शेयर कर लीजिए। मन हल्का हो जाएगा। अक्षत ने मेल पढ़कर मान्या को गहरी नजरों से देखा और जवाब दिया, ‘मैं देख रहा हूं कि आप मेरे हर काम पर निगाह रखती हैं। उसने तुरंत दूसरी मेल लिख दी, ‘हां- क्या आपके घर आपका इंतजार करने वाला कोई नहीं है, जो आपको घर जाने की जल्दी नहीं रहती? ‘नहीं ‘आप इतने सीरियस क्यों रहते हैं। पूरी टीम आपसे डर कर रहती है। मुस्कुरा कर तो देखिए। दुनिया मुस्कुराती हुई आपका स्वागत करेगी।

‘धन्यवाद! मुस्कुराहट तो केवल आप जैसे खुशकिस्मतों के लिए है। ‘क्यों? आपको क्या कमी है। बड़ी सी गाड़ी, बंगला, इतनी बड़ी कंपनी है। देख कर हर कोई आपकी किस्मत से रश्क करता है और आप जैसी सफलता पाना चाहता है। अक्षत गंभीर हो उठा था। ये सब बातें मेल के जरिए हो रही थी। ‘तुम मेरे बारे में भला क्या जानती हो? मैं जो देखती हूं। उसी पर विश्वास करती हूं। जो बीत गई वह बात गई। अक्षत को मान्या लगने लगी थी। दोनों दोस्त बन गए थे। मान्या अक्षत के साथ अपना बनाया लंच शेयर करने लगी थी। कभी गाजर का हलवा तो कभी कचौड़ी। ना नुकुर करता वह मान्या के लंच बॉक्स का इंतजार करने लगा था।

एक दिन मान्या जल्दी-जल्दी घर जाने की तैयारी कर रही थी तो वह बोल पड़ा, ‘लगता है तुम अपने पति से बहुत डरती हो। 6 बजते-बजते तुम्हारे चेहरे पर 12 बजने लगते हैं। ‘सर! आपसे किसने कहा? ‘मैंने तो आपकी रोज की बेचैनी देख कर अंदाज लगाया।

‘सर! आपकी सूचना के लिए बता दूं। मेरा डाइवोर्स हो चुका है। 4 साल का बेटा है, जिसे डे-केयर में छोड़ कर आती हूं। वह मेरा इंतजार करता रहता है, इसलिए मैं उसकी वजह से परेशान होकर भागती हूं। इस समय मैं जल्दी में हूं, मेरा टाइम हो गया है। वह चली गई थी,

परंतु अक्षत का मुंह आश्चर्य से खुला था। अक्षत की नींद उड़ गई थी। उसने बेचैनी में मान्या को मेल लिखी, ‘आप इतना बड़ा झूठ कैसे बोल सकती हैं? तुरंत ही उसका उत्तर आ गया। ‘मेरे घर आइए। मैं आपको अपने बेटे से मिलवा दूं। घर का पता लिख रही हूं।

मान्या के प्रति अक्षत का नजरिया बदल गया था। अगले दिन वह स्वयं बोली, ‘आइए सर! एक कॉफी हो जाए। अक्षत उसके पीछे-पीछे चल दिया था। ‘सर! मैं आपकी दया का पात्र बनने के लिए नहीं, आपके चिंतित चेहरे को देख कर अपना बीता हुआ कल बता रही हूं। इस दुनिया में मात्र आप ही दुखी नहीं हैं, वरन हर इंसान के पास अपने -अपने दुख हैं। मैं मानती हूं कि अपने आज को हंसी-खुशी जियो। मैं और अपूर्व एमबीए कर रहे थे। दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं लगा। घरवालों के विरोध के बावजूद हमने शादी करके घर बसा लिया। शादी करने के पहले ही मुझे नौकरी मिल गई थी। वह हाथ-पैर मार रहा था। मेरी तनख्वाह से घर खर्च चल रहा था। बाद में उसे नौकरी मिली, लेकिन छोटी-मोटी। मैं सेल्स में थी, इस कारण बिजी रहती। मेरे बॉस अक्सर अपनी गाड़ी से मुझे घर छोड़ देते थे। बस उसके मन में शक ने घर कर लिया और शक का कोई इलाज नहीं है। मैंने नौकरी बदली लेकिन उसका व्यवहार बद से बदतर होता गया। बात-बात पर  गाली देना और मारना। मेरी तनख्वाह, मेरी सुंदरता, मेरी मुस्कुराहट और खिलखिलाहट मेरी ही दुश्मन बन बैठी।

जब मेरा बेटा दुनिया में आया, खर्च के साथ-साथ उसकी क्रूरता भी बढ़ती गई। मैंने छोटे से मासूम को डे-केयर में छोड़ सॢवस ज्वायन कर ली। बच्चे के कारण हर क्षण एक नई परेशानी खड़ी रहती। हम दोनों से निजात पाने के लिए एक दिन वह किचन में सिलेन्डर का नॉब खुला छोड़ कर घर से बाहर चला गया। मेरी अक्लमंदी से उस दिन मेरी जान बच पाई। एक रात मेरा बेटा बुखार के कारण रो रहा था, तो वह हैवनियत की हद पार कर उसका गला दबाने लगा। बस, उसी दिन मैंने एफआईआर करवाई तो वह पकड़ा गया। चोटों के निशान उसके जुल्म के गवाह बने। बच्चे को लेकर परेशानी थी, परंतु डेकेयर के सहारे काम चलने लगा। अब तो वह प्ले स्कूल जाने लगा है। मान्या का चेहरा चमक उठा था।

यह मेरी लाइफ का एक चैप्टर था। प्लीज! अब दुबारा इस पर बात करने की जरूरत नहीं है। न ही मुझ पर दया दिखाने की। वह तमतमाते हुए तेजी से उठ कर चली गई थी।

अक्षत भी प्यार में धोखा खाकर इसी पीड़ा से गुजर रहा था। इसलिए दोनों के बीच दोस्ती बढ़ गई थी। अक्षत ने उसका प्रोमोशन कर दिया था। अब वह उसकी सीट के पास ही बैठने लगी थी।

‘थैंक्स सर, आपने मेरा प्रोमोशन इतनी जल्दी कर दिया। ‘प्रोमोशन तुम्हारी काबिलियत और होशियारी के कारण हुआ है।

उन दोनों की दोस्ती के बारे में ऑफिस में लोग बातें करने लगे थे। शुरू में तो उसने ध्यान नहीं दिया। लेकिन अपने कटु अनुभवों के कारण वह सोचने लगी थी कि उसकी और अक्षत की नजदीकियां भविष्य के लिए ठीक नहीं है।

यहां काम करते हुए उसे एक वर्ष हो चुका था इसलिए उसने दूसरी नौकरी ढूंढऩा शुरू कर दिया। जल्द ही उसकी कोशिश कामयाब हो गईं। दूसरी कंपनी में नियुक्ति हो जाने पर उसने अपना इस्तीफा मेल कर दिया। अक्षत उसका इस्तीफा देख चौंक उठा। उसने मान्या से कारण पूछने की कोशिश की लेकिन उसने चुप्पी साध रखी थी।

अक्षत बहुत परेशान था। मान्या! प्लीज मुझे तो बताओ कि बात क्या है? क्यों नौकरी बदल रही हो? क्या तुम्हारा पूर्व पति तुम्हें धमका रहा है? परंतु उसका मौन नहीं टूटा, तो नहीं टूटा।

तमाम उलझनों के बीच एक दिन मम्मी-पापा उसकेघर आए। उन्हें देख उसके मन को बड़ा सुकून मिला था। परंतु मां कुछ ज्यादा ही नाराज थीं। ‘क्यों? मान्या मैं क्या सुन रही हूं। तुम्हारा ऑफिस के बॉस के साथ चक्कर चल रहा है?

‘मम्मी! आपको ये बातें किसने बताई? हम तुम्हारी सब जानकारी रखते हैं। तभी पापा बोल पड़े थे, ‘बेटा अपूर्व से शादी और अलगाव, सब तुमने अपनी इच्छा से किया, लेकिन अब दुबारा बचपना नहीं करने दूंगा। ‘पापा, इन्हीं बातों के चलते ही तो मैंने नौकरी बदल ली है।
‘क्या? तुमने अपनी नौकरी बदल दी?

‘चलो! अच्छा ही किया। कम से कम लोगों की जुबान तो बंद हो जाएगी।मम्मी, जरूरत से ज्यादा लाड़ उस पर बरसा रही थीं।

‘मेरी बिटिया, कितनी मेहनत करती है, अकेले ही बच्चे को भी पाल रही है। नाश हो उस अपूर्व का जिसने बच्ची का यह हाल कर दिया। मान्या अपने ऑफिस की उलझनों से परेशान थी। खीझ कर बोली, ‘साफ-साफ बताइए। किसका प्रस्ताव लेकर आए हैं। तुम उस लड़के को अच्छी तरह जानती हो। प्रमिला मौसी का देवर प्रसून है। तुम लोग बचपन से साथ-साथ खेले हो। दिल्ली में नौकरी करता है, बिल्कुल हीरा है। सबसे बड़ी बात कि वह पिंकू को साथ रखने को तैयार है।

‘कल सनडे मैंने उसे खाने पर बुलाया है।
‘मम्मी, मैं कह चुकी हूं कि मुझे चैन से रहने दो। मैं शादी के चक्कर में नहीं पडऩा चाहती।

‘बहुत हो गया! 3 साल से अकेले रह रही हो। तुम्हें प्रसून से मिलना होगा। उसने टालने के लिए कहा, ‘देखो, मम्मी मैं प्रसून से मिल रही हूं। लेकिन उससे शादी करना या न करना मेरा फैसला होगा। मम्मी-पापा को खुश करने के लिए वह सूट पहन कर अच्छी तरह तैयार हो गई थी।

मम्मी उसको देखते ही उदास होकर बोलीं, ‘अपूर्व के चक्कर में पड़ कर, तूने सब बिगाड़ लिया, नहीं तो आज भी मेरी बेटी कितनी सुंदर लगती है। तभी डोरबेल बजी। पापा ने जल्दी से दरवाजा खोला। नमस्ते वगैरह के बाद प्रसून से बातचीत शुरू हुई। मान्या बोली, ‘मेरे पास 4 साल का बेटा है। मैं नौकरी करते-करते थक चुकी हूं, इसलिए अब घर पर आराम करना चाहती हूं।

‘हां हां, मुझे भी घर पर रहने वाली पत्नी की ही चाहत है। मेरे लिए इससे अच्छा भला और क्या हो सकता है। वह बेजुबान हो उठी थी। ‘देखिए! इतनी जल्दी मेरे लिए शादी के लिए फैसला करना कठिन है। ‘आप अच्छी तरह सोच विचार कर लीजिए। मैं आपकी हां का इंतजार करूंगा।

प्रसून 6 फीट का गोरा- चिट्टïा आकर्षक मस्तमौला युवक था। बात-बात पर ठहाके लगाना उसकी खासियत थी। पिंकू तो उसका दीवाना बन गया था। उसके जाने के बाद उसने मम्मी से धीरे से पूछा था कि ये जनाब अभी तक कंवारे कैसे रह गए? प्रमिला मौसी के पास तो इसके लिए करोड़ों के ऑफर रहते थे। और ये महाशय तो मधुमक्खी की तरह लड़कियों से घिरे रहते थे।

‘अरे, वह तो लड़कपने की बात थी, पसंद की कोई लड़की नहीं मिली, जो शादी कर पाता। एक सेसगाई हुई, लेकिन लड़की का किसी से चक्कर था। कार्ड तक छप गए थे। यह बेचारा तो टूट गया था। शादी करने को ही नहीं तैयार था। प्रमिला ने मुश्किल से उसे तैयार किया है।

मम्मी-पापा चट मंगनी पट ब्याह के पक्ष में थे। वह पसोपेश में थी। उसके मन में अक्षत के प्रति प्यार का अंकुर फूट चुका था। प्यार और शादी से बचने के लिए ही तो उसने अच्छी-भली नौकरी छोड़कर ये पकड़ी है, जहां दिन भर काम करना पड़ता है साथ में बॉस की आंखें भी देखनी पड़ती हैं। लेकिन फिर भी वह शादी का निर्णय जल्दी नहीं लेना चाह रही थी। प्रसून मम्मी-पापा से मिलने के बहाने अक्सर उसके फ्लैट पर आता और उसेबेटे पिंकू के लिए खिलौने लाता, उसके संग गेम खेलता, उसे पार्क भी ले जाता।

वह अपनी नई नौकरी में इतनी व्यस्त और परेशान थी कि बेटे पिंकू का बर्थडे भी भूल गई थी। परंतु मम्मी के एक्सीडेंट की खबर सुनते ही पापा की बताई जगह पर वह भागती हुई पहुंची तो वहां प्रसून उसका इंतजार कर रहा था। वह उसे पास के ही एक होटल में ले गया जहां पार्टी की पूरी तैयारी थी। केक काटने के लिए उसका ही इंतजार हो रहा था। वह शर्म से पानी-पानी हो गई। वह पिंकू से बार-बार सॉरी कहती रही। पिंकू प्रसून की गोद में चढ़ा खिलखिलाता रहा। वह अपने ही बेटे की बर्थडे पार्टी में अपरिचित और अजनबी सी खड़ी थी। सारे परिचितों के बीच आज वह न हंस पा रही थी, न रो पा रही थी।

मम्मी-पापा ने उसी समय उसकी और प्रसून की सगाई का एनाउंसमेंट कर दिया। प्रसून सब तरह से सही लग रहा था, परंतु पता नहीं क्यों वह उसके एहसानों तले दब सी गई थी। अंतत: अनिच्छापूर्वक ही सही, उसकी अंगुली में डायमंड की कीमती अंगूठी सज गई थी। उसने भी शर्माते हुए मां की दी हुई अंगूठी उसको पहना दी।

हॉल तालियों से गूंज उठा था। सभी उसे बधाई दे रहे थे। उसे सब कुछ स्वप्न सा लग रहा था। परंतु उसने अपने जीवन की डोर को नियति की इच्छा मान लिया था। प्रसून की बांहों में उसने बरसों बाद डांसफ्लोर पर मस्ती से डांस किया था। आज उसे प्रसून अच्छा लग रहा था। प्रसून
मम्मी-पापा चट मंगनी पट ब्याह के पक्ष में थे। वह पसोपेश में थी। उसके मन में अक्षत के प्रति प्यार का अंकुर फूट चुका था। प्यार और शादी से बचने के लिए ही तो उसने अच्छी-भली नौकरी छोड़कर ये पकड़ी है, जहां दिन भर काम करना पड़ता है और बॉस की आंखें देखनी पड़ती हैं।

गृहलक्ष्मी की कहानियां - स्माइल प्लीज
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की प्यार भरी मीठी-मीठी बातें। मम्मी-पापा का एक्साइटमेंट, सब चरम पर था। बेटा पिंकू प्रसून के आने का रोज इंतजार करता। एक दिन वह उससे कह रहा था, ‘मैं अब आपको पापा कहा करूंगा। सब बच्चों के पापा स्कूल आते हैं, मेरे पापा नहीं आते थे। मुझे अच्छा नहीं लगता था। वह बोला था। अब मैं सब बच्चों से कहूंगा देखो ये मेरे पापा हैं। बच्चे की बात सुन उसे लगा था कि चलो पिंकू खुश रहेगा तो वह भी खुश रहेगी।
समय तीव्र गति से भाग रहा था। कभी वह प्रसून के साथ लहंगा पसंद करने जाती तो कभी मम्मी के साथ साडिय़ां। पता ही नहीं चला और कार्ड छप गए। उसके मन में कार्ड देख कर एक हूक सी उठी, उसने अपने दोस्त अक्षत को एकदम भुला दिया था। उसने निश्चय किया कि वह स्वयं कार्ड उसे देने जाएगी।

परंतु, जाने किस कारण आज वह बेसब्र हो उठी थी। उसने अक्षत को अपनी शादी की खबर मेल से दी। शायद उसके दिल का कोई कोना आज भी उसके लिए धड़क रहा था। पल भर में ही उसकी मेल आ गई थी। बधाई मान्या, नए जीवन के लिए बहुत-बहुत बधाई प्लीज! अपने होने वाले पति प्रसून की कंपनी और उसका डीटेल बताओ। मैं भी एक प्रसून को अच्छी तरह जानता हूं। मान्या ने तुरंत अपनी सगाई की फोटो उसकी मेल पर डाल कर उसकी कंपनी का नाम भी लिख दिया था। कुछ ही क्षणों में उसका उत्तर आ गया था, ‘मान्या कल 11 बजे मेकडावल्स में मुझसे मिलो। अर्जेंट।

मान्या परेशान हो उठी थी। उसने रात आंखों में काटी। अक्षत उससे क्या कहना चाहता है? वह मन ही मन सोचती रही कि अब वह किसी झंझट झमेले में नहीं पड़ेगी और पिंकू के भविष्य के लिए प्रसून से ही शादी कर घर बसा लेगी। उसने अक्षत से न मिलने का निर्णय कर लिया। उसने तुरंत उसे मेल कर दी, प्लीज, क्षमा करना। मैं बहुत बिजी हूं।

पर अक्षत चुप नहीं बैठा। उसकी अगली मेल आ गई ‘मान्या, प्रसून मेरी बहन का पति रह चुका है। उसका अभी तलाक भी नहीं हुआ है। उसकी एक 6 साल की बेटी भी है। उसने अपनी बहन दिशा के साथ उसकी शादी की कई फोटो अटैच कर दी थी। उन चित्रों और सूचनाओं से वह परेशान हो उठी थी। अब उसे प्रसून की पूर्व पत्नी का सामना अपने मां-पापा से करवाना है। उसको पिंकू के लिए थोड़ा खराब लग रहा था। अपने आंसुओं को पोछ कर उसने आधी रात को अक्षत को फोन किया कि कल दिशा, सारे प्रूफ, फोटो और अपनी बेटी के साथ मेरे घर आने की कृपा करे। इधर प्रसून को भी उसने फोन कर दिया था ‘ह्रश्वलीज, आकर ज्वेलरी फाइनल करने में मदद कर दो। मां बड़ा और भारी सेट देना चाह रही हैं और मैं ज्वेलरी लेना ही नहीं चाह रही हूं।

लगभग दौड़ता-भागता सा प्रसून घर आ पहुंचा था। सभी बातों से अनजान मम्मी प्रसून के आदर-सत्कार में लगी थीं। ‘बेटा! लो ये गर्मागरम बादाम का हलवा खा लो। खास तुम्हारे लिए ही बनाया है। प्रसून का दिमाग तो ज्वेलरी में रखा था, ‘ज्वेलरी का क्या झगड़ा है। जो भी मम्मी-पापा का है, वह सब तुम्हारा ही तो है। घर हो या जेवर, तुम मना कैसे कर सकती हो? आज लो चाहे कल, सब कुछ है तो हम दोनों का ही।

तभी फोन की घंटी घनघना उठी। वाचमैन का फोन था। कोई लड़की मिलना चाहती है।

मान्या उसका इंतजार करने लगी थी। उसके कानों में खुसुर-फुसुर सुनाई पड़ी। मम्मी-पापा से कह रही थी, इसका लालच तो बढ़ता जा रहा है। 10 लाख का चेक तो ले जा चुका है। 20 तोला सोना की बात हुई थी, वह दे रही हूं, लेकिन फिर भी इसकी नीयत ठीक नहीं लगती।

दोनों की बातें सुनकर मान्या ने भगवान को धन्यवाद दिया था, जिसने उसे समय पर बचा लिया। वह अवश्य अक्षत को धन्यवाद कहने के लिए स्वयं जाएगी। कुछ ही पलों में दिशा आ गई। प्रसून उसको देखते ही अंदर भागा। वह बोली, ‘मुझे प्रसून जी से मिलना है। जब से वह ऑफिस से सस्पेंड कर दिए गए हैं, उनको मैं ढूंढ़ रही हूं लेकिन मिलना नहीं हो पा रहा है।

‘आप बैठ जाइए। मैं प्रसून को बुलाती हूं। ‘प्रसून, कोई दिशा आपसे मिलना चाहती है। वह बोला, ‘मैं किसी दिशा को नहीं जानता। कह दो, उससे मैं नहीं मिलना चाहता। मान्या दिशा के साथ अंदर पहुंच गई, जहां प्रसून बालकनी से नीचे उतरने की कोशिश कर रहा था।

दिशा ने झपट कर प्रसून का हाथ पकड़ लिया और बोली, ‘कब तक भागोगे प्रसून? तुम्हारे कुकर्म तुम्हारा पीछा पाताल लोक तक करेंगे।

मम्मी-पापा भौंचक्के समझ नहीं पा रहे थे कि ये क्या हो रहा है? दिशा बोली, ‘आंटी, प्रसून के साथ मेरी शादी हुई थी। अच्छा-खासा दहेज दिया था और धूमधाम से शादी की थी। ऐय्याशियों में सारा पैसा बर्बाद करइसने मुझे मारना-पीटना शुरू कर दिया। शराब के लिए एक दिन यह मुझसे मेरा मंगलसूत्र छीन रहा था कि बच्ची मेरी गोद से गिर गई। मेज का कोना मेरे माथे पर लगा और खून बहने लगा, लेकिन ये राक्षस मंगलसूत्र लेकर भाग गया था। उसी दिन मैं अपने भाई के पास आ गई थी। फैमिली कोर्ट में मुकदमा भी चल रहा है।

यह सुनकर मम्मी तो सोफे पर गिर सी पड़ी थी। दिशा बोली, ‘आंटी आप खुशकिस्मत हैं जो आपकी बेटी इससे बच गई। प्रसून चुपचाप बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। तभी मान्या उसका हाथ पकड़ कर बोली, ‘भाग कहां रहे हो? धोखेबाजी के आरोप में जेल की हवा तो खा लो। वह 100 नं. पर फोन कर चुकी थी। पुलिस आ गई और प्रसून को गिरफ्तार कर लिया। पिंकू सिसकियां भरते हुए बोला, ‘मॉम अंकल को पुलिस क्यों ले गई? मान्या ने बेटे को कलेजे से चिपका लिया।

‘वाह मम्मी, आपके लिए ये फ्राड ज्यादा सगा था मुझसे, सब छिपा रखा था। ‘दहेज लेने वालों से ज्यादा दोषी तो आप जैसे लोग हैं जो ब्लैंक चेक लेकर लड़के वालों के सामने खड़े रहते हैं।  दिशा जा चुकी थी। घर में सन्नाटा छा गया था। मानो तूफान के बाद की शांति हो। तभी उसके फोन पर मैसेज आया ‘स्माइल प्लीज। मान्या सब कुछ भूल कर मुस्कुरा उठी थी। 

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