लहरों पर मैंने तुम्हारा नाम लिखा है-गृहलक्ष्मी की कहानियां: Shorts Hindi kahaniya
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Shorts Hindi Kahaniya: अलसुबह बालकनी के  अपने दिल अज़ीज कोने में धीमी आवाज की संगीत और खुद के रोपे खूबसूरत फूल व पौधों के साथ चाय की चुस्कियाँ सदा ही मेरी पसंदीदा शग़ल रही हैं ।
 इधर कुछ दिनों से सामने वाले फ्लैट में  एक बला की खूबसूरत लड़की दिखाई देती है । मेरा मन उसको अपलक देखते रहने के लिए कहता  है , शायद वो भी जब मुझे देखती है तो  निनिर्मेष ही देखती है।

करीब महीना हो गया हमारी दिनचर्या लगभग एक जैसी चल रही है साथ ही साथ नज़रें मिलाना और चुराना भी उसी क्रम में जारी है ।

दो दिनों से सोच रही हूँ, कुछ भी हो जाय ,आज तो हैलो करके रहूँगी । अगर सकारात्मक जवाब मिला तो बातचीत भी करूंगी ।

मेरे हैलो के एवज में उसने एक महीन मुस्कुराहट दिया मुझे बस…
अगले दिन भी होठों पर कम खिंचाव वाली मुस्कुराहट ।

इस तरह कई दिन निकल गए , उसको जानने के लिए मेरी उत्सुकता बढ़ती ही जा रही थी।

हर रोज वह गुमसुम सी अपने पौधों को हौले से पुचकारते हुए कुछ बुदबुदाती थी या हो सकता है कोई गीत ही गुनगुनाती रही हो ।
दूर से ठीक ठीक कुछ भी समझ पाना मेरे लिए मुश्किल था ।

“जब से मैनें उसे देखा है उसके चेहरे पर निश्छल सी शांति का भाव पसरा होता है “

सेकंड फ्लोर वाली आंटी से ,  करीब हफ्ते भर से मेरी हरदिन मेरी बातचीत  हो रही है उनके एकाकी जीवन के बारे में जो कि मेरा शोध का विषय है। मौका देखकर मैंने सामने वाले फ्लैट की लड़की का नाम ले लिया

तब पता चला उसका नाम डेजी है ।  पहले वह बहुत चुलबुली हुआ करती थी हर बात पर खी खी करती रहती थी । किसी रोते हुए को हँसाने का जबरदस्त हुनर था उसमें सबके सुख दुख में झट से शामिल हो जाती थी।
 
“घूमना उसकी हाॅबी थी,खासकर समुद्रीतट बहुत पसंद थे डेजी को । चेन्नई महानगर का आकर्षण केंद्र ही सुंदर बीचेज हैं,ऊपर से दूसरा सबसे बड़ा समुद्रतट मरीनों बीच। वहां जाकर तो उत्साह जैसे दुगुना हो जाया करता है।
   “उस दिन भी वो मरीनों बीच ही गई थी घूमने..सब कुछ सुहावना था हर बार की तरह…लहरों के उतार चढ़ाव को  शांत भाव से सुनना मानों जीवन को आशा के संगीत से भर देना “
” लहरों से खेलती हुई वह और उसका तीन वर्षीय बेटा  दुनिया के सबसे खूबसूरत पल का आनंद ले रहे थे , इस समय उसके जीवन के गीत की साक्षी लहरें बनी हुई थीं।”

” लहरें शाम से ही तेज थीं मानो सब कुछ अपने साथ बहा ले जाना चाहती हों , उनमें हौले से बहने का आज सब्र नहीं था “
    “उसका बेटा अपने पिता के साथ रेत का घर बना रहा था,अब लहरें उसके लिए दानवी हो चुकी थीं..वो तेज उफनती हुई आईं और बेटे को अपने साथ खींच ले गईं।
   आज एक पिता की फौलादी बाहें अपनी औलाद को पकड़ने मे सक्षम न हो पाईं ।
डेजी भी बहाव में कुछ दूर बही थी लेकिन लहरें उसे उसके बेटे से दूर अकेले छोड़कर चली गईं।
  ” दूसरे दिन सुबह समाचार में पता चला अर्द्धरात्रि के पश्चात सुनामी ने सब कुछ तहस नहस कर दिया। “
तबसे वो पौधों को सहलाते हुए बस एक ही गीत गाती है…     
मेरे लाल तुझको खुद से दूर अब कहीं जाने न दूंगी     
अपनी पलकों पर तुझको सजा कर रखूँगी   
कोई तूफां भी आकर जो टकराए मुझसे
उसको ध्वंस कर तुझे अपने सीने में रख लूँगी