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Hindi Kahani: कामवाली बाई नही "किरन"-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Kaamwali Bai Nhi Kiran

Hindi Kahani: दिल्ली एक बडा महानगर और उसमे रहती है किरन, एक साधारण सी लडकी| उसकी माँ आस पास के घरो मे काम करती लेकिन पिता बहुत ज्यादा शराब पीने लगे थे और काम करना भी छोड़ दिया |पिता की शराब पीकर माँ और बच्चो की पिटाई कर सारा पैसा ले जाना धीरे धीरे बढता जा रहा था | घर के हालत बिगड़ते जा रहे थे |

अपनी माँ की घर चलाने मे मदद करने के लिए किरन भी अपनी पढाई छोड़ आसपास के घरो मे साफ सफाई, छोटे बच्चो को संभालने का काम करने लगी थी | छोटे भाई बहन की पढाई ना छूटे इसके लिए वह पूरी करती | सब उसे भी कामवाली बाई कहने लगे |

निशा, जिसके यहा वह काम करती थी उसे अक्सर समझाती भी की पिता को इसतरह सब बर्बाद ना करने दे, उसे नई चीजे सिखाती जैसे मेहंदी लगाना, अंग्रेजी बोलना आदी ताकी वो अपनी कमाई बढाकर अपनी शिक्षा भी फिर से शुरू कर पाये |लेकिन पिता पैसा घर मे नही छोड़ते |

ऐसे मे एक दिन देश मे नोटबंदी हुई और बहुत से लोग ने किरन को तनख्वाह बैंक एकाऊंट के ज़रिये देनी चाही |बहुत से लोग परेशान थे, बेँको के बाहर लम्बी लाइने लगी थी और किरन को ये सब बहुत मुश्किल लग रहा था |  पर तनख्वाह लेनी भी ज़रूरी थी |

किरन को समझ नही आ रहा था की वो कैसे ले क्योंकि वो तों कभी बैंक गई ही नही | तब निशा ने उसे समझाया की बैंक खाता खुलवाये और सभी से तनख्वाह खाते में ले और ज़ितना ज़रूरत हो उतना ही निकाले |निशा की मदद से किरन ने पास ही के बैंक मे खाता खोल लिया |कुछ दिनो मुश्किले हुई फिर धीरे -धीरे सब समझ आ गया |
माँ ने भी साथ दिया तों पिता मारपीट करके भी उससे सारे पैसे छीन नही पाते थे | कुछ ही महीनो मे उसके खाते मे पाँच हजार रूपये घर खर्च के बाद बच गए | दोनो माँ बेटी को एक आशा की किरन दिखाई दी |

उस दिन किरन ने अपनी माँ के साथ आकर निशा को धन्यवाद दिया| निशा ने माँ से बात की और काम के बाद किरन को शाम के समय कमप्यूटर कोर्स मे दाखिला दिलवाया| निशा के प्रोत्साहन से किरन ने सब सिखा |  एक साल बाद किरन को एक कम्पनी मे कमप्यूटर मे ड़ाटा एंटरी का काम मिल गया |

इस तरह निशा की दिखाई एक आशा ने किरन के जीवन मे रोशनी भर दी |

और अब कोई उसे “कामवाली बाई” नही कहता|
अब वो किरन है सिर्फ किरन |

दोस्तो, आप भी निशा की तरह अपने आस पास रहने वाली लड़कियो को ज़रूर प्रोत्सहित करे |

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