saahas
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रूस का जार पीटर महान अपने पुत्र की मृत्यु पर इतना शोकवि“वल हो गया कि उसने अपने को एक कमरे में बंद कर लिया और भूखा-प्यासा रहकर जान दे देने का फैसला कर लिया। उसने यह भी हुक्म जारी कर दिया कि कोई मुझसे न बोले, वरना उसे मौत की सजा दे दी जायेगी। दरबारी मिलकर सोचने लगे कि बादशाह को इस तरह जान देने से कैसे बचाया जाये। मगर कोई भी उसे समझाने जाने का साहस जुटा नहीं पा रहा था। अंततः दोल्गोरोकी नामक एक दरबारी उठा। अपने प्राणों की परवाह न करते हुए जाकर उसने जार के कमरे का दरवाजा खटखटाया। अंदर से जार की गुस्सा-भरी आवाज आयी- “अपनी जान की खैर चाहते हो, तो चले जाओ यहाँ से।”

गोरोकी ने शांति से कहा- “दरवाजा खोलिये, जहांपनाह! मैं दरवारियों की ओर से यह पूछने आया हूँ कि अब जब कि आपने राजगद्दी छोड़ ही दी है, अपना उत्तराधिकारी किसे बनाना चाहते है?”

पीटर महान दरबारी की निर्भीकता और अक्लमंदी पर रीझ उठा और उसी समय दरवाजा खोलकर उसे गले से लगाते हुए बोला- “तुम्हारे साहस ने हमें नया बल दिया है और हमारा गम हल्का करने में मदद की है।”

ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंAnmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)