prayatn to karo
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बारिश का मौसम था। एक स्त्री ने अपने बच्चों से कहा कि वे जंगल जाकर कुछ सूखी लकड़ियां ले आएं, ताकि घर में चूल्हा जल सके। दोनों भाई जंगल में जा पहुँचे। थोड़ी ही तलाश के बाद उन्हें पेड़ का एक बड़ा तना पड़ा दिखाई दिया। उन्हें बहुत खुशी हुई।

लेकिन वह इतना भारी था कि दोनों मिलकर भी उसे घर नहीं ले जा सकते थे। छोटा बोला कि क्या किया जाए, अगर इसे छोड़कर गए तो कोई और उठाकर ले जाएगा। बड़े को भी कुछ नहीं सूझ रहा था। तभी छोटे ने देखा कि बहुत सारी चींटियां एक बहुत बड़े कीड़े को घसीटकर अपनी बांबी की ओर ले जा रही थीं।

उसने भाई से कहा कि जब ये चींटियां इतने बड़े कीड़े को उठाकर ले जा सकती हैं तो हम लकड़ी क्यों नहीं ले जा सकते। तुम यहीं रुको, मैं अपने दोस्तों को लेकर आता हूँ। कुछ ही देर बाद वह अपने दोस्तों को लेकर लौटा और सब मिलकर उस तने को लुढ़काते-लुढ़काते अपने घर ले गए।

सारः एकता में बहुत शक्ति होती है।

ये कहानी ‘इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंIndradhanushi Prerak Prasang (इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग)