किसी नगर में एक बड़ा ही धनवान सेठ रहता था, मणिभद्र । नगर में उसकी बड़ी इज्जत थी । सेठ बड़ा धार्मिक स्वभाव का और दयालु था । वह खूब दान-पुण्य और परोपकार भी करता था । इसलिए सभी उसकी इज्जत करते थे । पर फिर किसी कारण उस सेठ का सारा धन नष्ट हो […]
Category: पंचतंत्र की कहानियां
बच्चों से लेकर बड़े तक सभी को पंचतंत्र की कहानियां पढ़ने में बेहद दिलचस्पी होती है। विष्णु शर्मा द्वारा लिखित पंचतंत्र की कहानियां बेहद जीवंत है, ये लोगों को जीवन जीने का ढंग सिखाने के साथ ही नेतृत्व क्षमता विकसित करने में भी मदद करते हैं। बच्चों का मन बेहद कोमल होता है, इस उम्र में अगर उन्हें अच्छी किताबें पढ़ने को दी जाएं तो वह जीवनभर इससे मिलने वाली शिक्षाप्रद कहानियों को याद रखते हैं। सोने के पंख वाला हंसों का किस्सा, जब उल्लू का राजतिलक हुआ, एक अनमोल श्लोक ने बदल दिया जीवन, नकलची ने किया जो गड़बड़झाला जैसी कई ऐसे रोचक और शिक्षाप्रद कहानियां है, जिसे पढ़कर बच्चों को मजा आएगा और वह इन कहानियों से मिलने वाली शिक्षा को अपने जीवन में भी अवश्य उतारेंगे। हम आपके लिए और आपके बच्चों के लिए बेहद मनोरंजक पंचतंत्र की कहानियां यहां पेश कर रहे हैंं। इन्हें पढ़ने के लिए बच्चों को प्रेरित करें।
बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ पंचतंत्र की रोचक और प्रेरणादायक कहानियां
घोड़े की तरह हिनहिनाओ -पंचतंत्र की कहानी
किसी राज्य में नंद नाम का एक राजा था । वह बड़ा वीर और पराक्रमी था । दूर-दूर तक उसका नाम और प्रसिद्धि थी । उसकी वीरता के कारण शत्रु बेहद आतंकित रहते थे । अपने इन्हीं गुणों के कारण उसने दूर-दूर तक अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया था । नंद का मंत्री था […]
तुझमें तो सियार के ही गुण हैं! -पंचतंत्र की कहानी
किसी वन में एक शेर अपनी शेरनी के साथ रहता था । एक दिन शेर शिकार के लिए गया । दिन भर भोजन की तलाश में भटकता रहा । पर उस दिन कोई शिकार उसे नहीं मिल पाया । लौटते समय एक नन्हा सा सियार दिखाई दिया । शेर को लगा इस नन्हे सियार को […]
युधिष्ठिर कुम्हार ने सच कहा, लेकिन.. -पंचतंत्र की कहानी
किसी नगर में एक कुम्हार रहता था । उसका नाम था युधिष्ठिर । एक बार की बात, वह कहीं जा रहा था । अचानक उसका पैर फिसला और वह गिर गया । नीचे एक सख्त और धारदार घड़े का टुकड़ा पड़ा था । वह उसके माथे पर जा लगा । बहुत सा खून बह आया […]
और कुएँ से निकल आया गंगदत्त -पंचतंत्र की कहानी
एक मेढक था गंगदत्त । वह बड़ा ज्ञानी और सीधा-सादा था । हमेशा अच्छी और समझदारी की बात करता था । उसे झूठ और लाग-लपेट कतई पसंद नहीं था । इधर की बात उधर करना और ज्यादा छल-कपट भी उसे नहीं आता था । इसलिए मेढकों के दल में वह अलग-थलग पड़ गया था । […]
पहले मैं, पहले मैं! -पंचतंत्र की कहानी
एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण रहता था । उसका नाम था द्रोण । वह भिक्षा माँगकर गुजारा करता था । इसलिए जीवन में कभी कोई सुख उसे नहीं मिला । उसका शरीर भी बहुत कमजोर और दुबला-पतला था । द्रोण के पास संपत्ति के नाम पर कुछ विशेष नहीं था । बस, दो स्वस्थ […]
वह बहेलिया दयामय बन गया -पंचतंत्र की कहानी
एक बहेलिया था । बड़ा ही क्रूर और कठोर दिल वाला । एक दिन वह किसी शिकार की तलाश में जंगल में भटक रहा था । तभी अचानक एक कबूतरी पर उसकी ध्यान गया । कबूतरी को असावधान जानकर बहेलिए ने झट से उसे पकड़ लिया और अपने पिंजरे में बंद कर लिया । इसके […]
लो यह आखिरी मणि -पंचतंत्र की कहानी
एक गरीब ब्राह्मण था हरिदत्त । उसके पास थोड़ी सी खेती लायक जमीन थी कह उसमें फसल बोकर उसकी देखभाल करता । उससे किसी तरह उसका गुजारा हो जाता था । हांलाकि गरीबी उसका पिंड नहीं छोड़ती थी । हरिदत्त एक दिन खेत में काम करने के बाद एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा […]
सोने के पंख वाले हंसों का किस्सा -पंचतंत्र की कहानी
एक था राजा चित्ररथ । वह बड़ा उदार प्रतापी और समृद्धिशाली राजा था । उसके राजमहल में एक विशाल सरोवर था, जिसे सब कमल सरोवर कहते थे । उस सरोवर में सुंदर कमल के फूल उगे थे जिनकी सुंदरता दूर से मुग्ध करती थी । उस सुंदर कमल सरोवर में सुनहले रंग के हंस तैरते […]
जब उल्लू का राजतिलक हुआ तो. -पंचतंत्र की कहानी
एक बार की बात है, पक्षियों ने सोचा हमारे राजा गरुड़ तो हर समय भगवान विष्णु की सेवा में ही लीन रहते हैं । इसलिए हमें दूसरा राजा भी चुन लेना चाहिए जो समय-समय पर हमारी चिंता और देखभाल करता रहे । बगुला बोला, “हाँ यह बात तो ठीक है । जिस राजा के होने […]
