Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

नकलची ने किया जो गड़बड़झाला -पंचतंत्र की कहानी

किसी नगर में एक बड़ा ही धनवान सेठ रहता था, मणिभद्र । नगर में उसकी बड़ी इज्जत थी । सेठ बड़ा धार्मिक स्वभाव का और दयालु था । वह खूब दान-पुण्य और परोपकार भी करता था । इसलिए सभी उसकी इज्जत करते थे । पर फिर किसी कारण उस सेठ का सारा धन नष्ट हो […]

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घोड़े की तरह हिनहिनाओ -पंचतंत्र की कहानी

किसी राज्य में नंद नाम का एक राजा था । वह बड़ा वीर और पराक्रमी था । दूर-दूर तक उसका नाम और प्रसिद्धि थी । उसकी वीरता के कारण शत्रु बेहद आतंकित रहते थे । अपने इन्हीं गुणों के कारण उसने दूर-दूर तक अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया था । नंद का मंत्री था […]

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तुझमें तो सियार के ही गुण हैं! -पंचतंत्र की कहानी

किसी वन में एक शेर अपनी शेरनी के साथ रहता था । एक दिन शेर शिकार के लिए गया । दिन भर भोजन की तलाश में भटकता रहा । पर उस दिन कोई शिकार उसे नहीं मिल पाया । लौटते समय एक नन्हा सा सियार दिखाई दिया । शेर को लगा इस नन्हे सियार को […]

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युधिष्ठिर कुम्हार ने सच कहा, लेकिन.. -पंचतंत्र की कहानी

किसी नगर में एक कुम्हार रहता था । उसका नाम था युधिष्ठिर । एक बार की बात, वह कहीं जा रहा था । अचानक उसका पैर फिसला और वह गिर गया । नीचे एक सख्त और धारदार घड़े का टुकड़ा पड़ा था । वह उसके माथे पर जा लगा । बहुत सा खून बह आया […]

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और कुएँ से निकल आया गंगदत्त -पंचतंत्र की कहानी

एक मेढक था गंगदत्त । वह बड़ा ज्ञानी और सीधा-सादा था । हमेशा अच्छी और समझदारी की बात करता था । उसे झूठ और लाग-लपेट कतई पसंद नहीं था । इधर की बात उधर करना और ज्यादा छल-कपट भी उसे नहीं आता था । इसलिए मेढकों के दल में वह अलग-थलग पड़ गया था । […]

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पहले मैं, पहले मैं! -पंचतंत्र की कहानी

एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण रहता था । उसका नाम था द्रोण । वह भिक्षा माँगकर गुजारा करता था । इसलिए जीवन में कभी कोई सुख उसे नहीं मिला । उसका शरीर भी बहुत कमजोर और दुबला-पतला था । द्रोण के पास संपत्ति के नाम पर कुछ विशेष नहीं था । बस, दो स्वस्थ […]

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वह बहेलिया दयामय बन गया -पंचतंत्र की कहानी

एक बहेलिया था । बड़ा ही क्रूर और कठोर दिल वाला । एक दिन वह किसी शिकार की तलाश में जंगल में भटक रहा था । तभी अचानक एक कबूतरी पर उसकी ध्यान गया । कबूतरी को असावधान जानकर बहेलिए ने झट से उसे पकड़ लिया और अपने पिंजरे में बंद कर लिया । इसके […]

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लो यह आखिरी मणि -पंचतंत्र की कहानी

एक गरीब ब्राह्मण था हरिदत्त । उसके पास थोड़ी सी खेती लायक जमीन थी कह उसमें फसल बोकर उसकी देखभाल करता । उससे किसी तरह उसका गुजारा हो जाता था । हांलाकि गरीबी उसका पिंड नहीं छोड़ती थी । हरिदत्त एक दिन खेत में काम करने के बाद एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा […]

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सोने के पंख वाले हंसों का किस्सा -पंचतंत्र की कहानी

एक था राजा चित्ररथ । वह बड़ा उदार प्रतापी और समृद्धिशाली राजा था । उसके राजमहल में एक विशाल सरोवर था, जिसे सब कमल सरोवर कहते थे । उस सरोवर में सुंदर कमल के फूल उगे थे जिनकी सुंदरता दूर से मुग्ध करती थी । उस सुंदर कमल सरोवर में सुनहले रंग के हंस तैरते […]

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जब उल्लू का राजतिलक हुआ तो. -पंचतंत्र की कहानी

एक बार की बात है, पक्षियों ने सोचा हमारे राजा गरुड़ तो हर समय भगवान विष्णु की सेवा में ही लीन रहते हैं । इसलिए हमें दूसरा राजा भी चुन लेना चाहिए जो समय-समय पर हमारी चिंता और देखभाल करता रहे । बगुला बोला, “हाँ यह बात तो ठीक है । जिस राजा के होने […]

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