Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

मेघवर्ण जीता, अरिमर्दन हारा -पंचतंत्र की कहानी

एक था कौओं का राजा । उसका नाम था मेघवर्ण । उसने एक विशाल वटवृक्ष पर अपना डेरा डाला हुआ था । वहाँ उसने अपने लिए एक मजबूत किला बना रखा था, जिससे कोई शत्रु उसका या किसी भी कौए का अहित न कर पाए । फिर हजारों कौए हर वक्त उसकी सेवा में लगे […]

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अभागे सियार की कहानी -पंचतंत्र की कहानी

एक बार की बात है, एक बहेलिया जंगल में शिकार के लिए गया । कुछ दूरी पर उसे एक सूअर दिखाई दिया । बहेलिए ने न आगा सोचा, न पीछा, झट सूअर पर तीर छोड़ दिया । तीर सूअर के मर्म स्थल पर लगा और वह बुरी तरह घायल हो गया । पर उसने सोचा […]

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सोमलिक, तुम्हें कैसा धन चाहिए? -पंचतंत्र की कहानी

एक था सोमलिक । वह बड़ा ही निपुण जुलाहा था । कपड़े इतने सुंदर तैयार करता कि उनकी बारीकी और बुनावट देखकर लोग अचरज में पड़ जाते थे । पर फिर भी उसे अधिक धन नहीं मिल पाता था । कभी पैसा आता, तो वह उसके पास टिकता ही नहीं था । उसके आसपास जो […]

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एक अनमोल श्लोक ने बदल दिया जीवन -पंचतंत्र की कहानी

सागरदत्त थे नगर के एक बड़े धनी और प्रसिद्ध व्यापारी । उनका बेटा समझदार और बुद्धिमान युवक था जो हर वक्त कुछ न कुछ सोचता रहता था । उसने कई ग्रंथों का अध्ययन किया था और उनकी अच्छी बातों को भी अपने जीवन में उतार लिया था । इसीलिए वह चाहता था कि अपना जीवन […]

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किस्सा झूठे तिलों का -पंचतंत्र की कहानी

एक गाँव में एक ब्राह्मण रहता था । वह बहुत गरीब था । बड़ी मुश्किल से उसके भोजन का प्रबंध हो पाता था । कुछ समय बाद मकर संक्रांति आई तो ब्राह्मण दान लेने के लिए घर से निकला । तभी उसके मन में आया, ‘आज का दिन बड़ा शुभ दिन है । आज किसी […]

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हिरण्यक चूहे और दोस्तों की अनोखी कथा -पंचतंत्र की कहानी

एक वन में विशाल बरगद का एक पेड़ था । उस पर अनेक पक्षी रहते थे । उन्हीं में लघुपतनक नाम का कौआ भी था । वह बड़ा समझदार था तथा उसके दिल में दूसरों के लिए बड़ा प्यार और हमदर्दी थी । एक बार लघुपतनक कौए ने देखा कि एक भयानक बहेलिया कहीं से […]

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मूर्ख बंदर का किस्सा -पंचतंत्र की कहानी

एक राजा की एक बंदर से खूब अच्छी दोस्ती थी । राजा उसे इतना प्यार करता था कि उसने उस बंदर को अपना अंगरक्षक बना लिया था । जहाँ कहीं राजा जाता, उसकी मदद के लिए बंदर भी जरूर साथ जाता था । प्रजा को पहले तो यह देखकर बड़ी हँसी आती थी, पर धीरे-धीरे […]

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आखिर चोर ने किया उपकार -पंचतंत्र की कहानी

किसी नगर में एक विद्वान ब्राह्मण रहता था । उसमें बहुत से गुण थे, पर किसी कारण उसमें चोरी करने की बुरी आदत पैदा हो गई । यह आदत बढ़ते-बढ़ते इतनी बढ़ी कि उस विद्वान ब्राह्मण के बाकी सारे गुण पीछे छिप गए । अब वह हमेशा इसी जुगाड़ में रहता था कि किसी तरह […]

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बगले के आंसू -पंचतंत्र की कहानी

किसी वन में बरगद का एक पेड़ था । उस पर बगुलों का एक समूह रहता था । उसी पेड़ की खोखल में एक भयानक सर्प भी रहता था । वह मौका पड़ते ही उन बगुलों के अंडे खा जाता था । इससे बगुले बहुत दुखी थे । उन्हें समझ में नहीं आ रहा था […]

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किस्सा धर्मबुद्धि और पापबुद्धि का-पंचतंत्र की कहानी

किसी नगर में दो मित्र रहते थे । एक का नाम था धर्मबुद्धि और दूसरे का पापबुद्धि । दोनों का स्वभाव और रंग-ढंग अलग-अलग था, फिर भी मित्रता पक्की थी । लिहाजा विदेश में दोनों साथ-साथ रहे और खूब धन कमाकर लौटे । जब वे अपने शहर में प्रवेश करने लगे, तो पापबुद्धि ने कहा, […]

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