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नारीमन की कहानियां
Happy Valentine Day-Nariman ki kahaniyan

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

सुमित ने ध्यान से देखा कि शादी के पच्चीस साल बाद भी ऋचा काफी खूबसूरत है। बालों में जहां-तहां सफेदी झांकने लगी है लेकिन उसके चेहरे की सौम्यता, बिना काजल, बिना लिप्स्टिक लगा चेहरा, माथे पर चमचमाती बड़ी-सी लाल बिंदिया में एक अजीब-सा आकर्षण है।

सुमित का मन भर आया। कितने बरस हो गए उसने ऋचा की कभी तारीफ़ ही नहीं की। ऐसा नहीं कि ऋचा में तारीफ़ करने लायक कुछ भी नहीं! उसे याद आया अपने ससुर जी का चेहरा। कितने उत्साहित थे वे ऋचा के बारे में बताते हुए। वह और मां ऋचा को देखने गए थे, शादी के लिए। ऋचा के शौक के बारे में पूछने पर वे एक साँस में ऋचा के गुण, शौक और उपलब्धियां कह गए। “हमारी ऋचा तो हीरा है हीरा। हर बात में अव्वल! 5 साल की उम्र से कत्थक सीखा है। पता नहीं कितने ईनाम जीते हैं! गिनवाने लगूंगा तो शाम हो जाएगी। कविताएं भी लिखती हैं, कहानियां भी। कई बार अख़बारों और मैगजीन्स में छपी हैं इसकी कविताएं-कहानियां। गाती भी अच्छा है, हारमोनियम भी बजा लेती है और इसकी कुकिंग के तो क्या ही कहने! जो एक बार इसके हाथ का खाना खा ले ना, कभी नहीं भूलता! नार्थ इंडियन, साउथ इंडियन, चाइनीज कोई भी खाना बनवा लो। और क्या केक बनाती है! भाई आप पता ही नहीं लगा पाओगे कि घर में बना है या प्रोफेशनल ने बनाया है।” ऋचा के पापा का चेहरा गर्व से दमक रहा था। वो गहरी साँस भर कर फिर चालू हो गए, “ऐसा नहीं है कि खेलों में पीछे है ऋचा! दौड़ती है तो हवा से बातें करती है। 100 मीटर रेस की चैंपियन है हमारी ऋचा!”

“हमारा सुमित भी कुछ कम नहीं” कह कर माँ ने ऋचा के पिता की बात पर पूर्णविराम लगा दिया।

ऋचा और सुमित की शादी हो गयी। शादी के पहले बरस में ही शौर्य कोख में आ गया, तीन बरस बाद सौम्या। ऋचा को गाते तो सुना, किंतु केवल लोरियां! बजाते तो देखा, किंतु चटनी पीसते कुंडी डंडा, चकला-बेलन और कुकर की सीटियाँ! नाचते देखा लेकिन माँ बाबा और बच्चों की फरमाइशों पर! पंद्रह बरस बच्चों के लालन-पालन में गुज़र गए। बच्चे बड़े हुए तो फिर माँ बाबा बूढ़े हो गए। बीमार रहने लगे। नौकरी, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की बीमारी में ऋचा उलझी रहती। वह गाती थी, बजाती थी, लिखती थी यह तो याद नहीं, लेकिन भागती सचमुच तेज़ थी। सुबह से रात तक फिरकी की तरह घूमती। ऐसा नहीं कि सुमित ऋचा की मदद नहीं करता था लेकिन आज जाने क्यों महसूस हुआ कि कहीं कुछ कमी रह गयी है। कुछ खो गया है। मन उदास खाली-खाली सा लगने लगा। सुमित को घूमना-फिरना पसंद था लेकिन ऋचा गृहस्थी की ज़िम्मेदारियों के चलते उसके साथ न जा पाती। सुमित हर शाम, हर इतवार अपने दोस्तों के साथ बिताता। ऋचा को फिल्में देखने का शौक था, पुराने गीत सुनने का शौक था पर उसे याद ही नहीं कि दोनों ने कब फिल्म देखी थी। चाट की शौकीन ऋचा को कब चाट खिलाई, ध्यान ही नहीं। सुमित को ग्लानि हो आयी।

हर रोज़ टिफिन पैक होते समय सुमित पूछता, आज क्या बनाया है? अपने हर सहकर्मी की पसंद याद रहती है उसे। सेक्रेटरी रीमा को कढ़ी पसंद है, मिसेस वर्मा को गाजर का हलवा, नितिन को सरसों का साग पसंद है तो राबिया को राजमा। जब भी घर में ये चीजे बनतीं वह विशेष तौर पर उनके लिए अलग डिब्बे में ऋचा से डालने को कहता। यहां तक कि चपरासी को रसगुल्ले पसंद हैं तो कई बार वह उसके लिए रसगुल्ले भी पैक करवा कर ले जाता है। लेकिन ऋचा की चाट उसे क्यों याद नहीं आयी। ऋचा ने भी तो कभी गिला नहीं किया। बस घर गृहस्थी में ही रमी रही।

एकटक ऋचा को देखते हए जैसे सब कछ चलचित्र-सा समित की आंखों के सामने चल रहा था।

पति को घूरते हुए देख कर ऋचा हँस कर पूछने लगी, “क्या बात है जनाब? क्यों घूर रहे हो? एक ही पैकेट मशरूम है। वो क्या नाम है उसका, वो पहलवान राजन फोगाट, जिसे मशरूम पसंद है अगर एक डिब्बी उसके लिए ले कर जानी है तो एक पैकेट और ला दो। फिर मत कहना कि सब्जी कम थी। राजन के हिस्से नहीं आयी, राजन नाराज हो गया!

सुमित ने कार की चाबी उठाई और बाहर चला गया।

जब लौटा तो हाथ में बहुत से पैकेट थे। ऋचा के हाथ में थमाते हुए बोला, हैप्पी वैलेंटाइन डे माय डिअर वाइफ!

ऋचा हैरान परेशान उसका मुँह देख रही थी। एक गुलाब की स्टिक, चॉकलेट, छोटा-सा टेडी वाला की रिंग, जीन्स-कुर्ती…।

ऋचा कुछ हैरानी से बोली, “तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना? ये सब किसके लिए? और ये वैलेंटाइन का क्या शौक चर्राया है आपको? माँ जी देखेंगी तो क्या सोचेंगी? क्या हो गया तुम्हें?”

“और ये क्या है?” बन्द डिब्बे को पॉलीबैग से निकालती हुई ऋचा बोली।

“ये है अग्रवाल स्वीट्स की मशहूर चाट, खूब सारी हरी और इमली वाली चटनी डाल के मेरी खूबसूरत बीवी की फेवरिट! जल्दी से एक प्लेट में डाल लाओ। नहीं तो पापड़ी गल जाएगी। तुम्हें तो कुरकुरी पसंद है न? और हाँ, चम्मच दो लाना।” सुमित शरारत से बोला।

मशरूम का पैकेट कहाँ है? मशरूम नहीं लाये? ऋचा ने लिफाफे के भीतर झांकते हुए चिंता से पूछा।

“मशरूम को मारो गोली! एक ही पैकेट काफी होगा माय डिअर ऋचा। कल ऑफिस से छुट्टी ले रहा हूँ। पूरा दिन पत्नी की सेवा में बिताने की सोची है। ये देखो. तम्हारी पसंद की ब्ल जीन्स और ब्लैक टॉप। तमनें कई सालों से जीन्स ही नहीं पहनी। अच्छी लगती है तुम पर। पहना करो ना और सुनो, कल फिल्म देखने चलेंगे। कितने सालों से हमनें इकट्ठे कोई फिल्म नहीं देखी। तुम्हारे फेवरेट अमिताभ की फिल्म लगी है।”

ऋचा का चेहरा गुलाबी हो गया। दो बूंदे आंखों में झिलमिलाने लगीं। पति के गिर्द बाहें डालते हुए बोली, ना! अमिताभ अब बुजुर्ग हो गया है। मेरे हीरो तो तुम ही हो और फिर फुसफुसाते हुए सुमित के कान में बोली,

“हैप्पी वैलेंटाइन डे माय डिअर हसबैंड।”

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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