Hindi Motivational Story: हिमालय पर्वत पर गुरुजी तपस्या में लीन थे। उनका शिष्य उनकी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ता, पर उसे नीचे से सामान लाना बड़ा कठिन लगता था। सप्ताह में एक दिन रविवार को पास के गाँव में बाज़ार लगता था। उसे वहीं से सप्ताह भर का सामान लाना पड़ता था और नीचे से ऊपर चढ़ना पड़ता था।
उसी पर्वत पर एक स्त्री हर रविवार को अपने दो बच्चों को साथ लिए जड़ी-बूटी ढूँढने आती और दोपहर तक नीचे गाँव में ले जाकर बेचती थी। ऐसे ही एक रविवार शिष्य पर्वत पर चढ़ रहा था। उसके पीठ पर सामान था, और वह चढ़ते-चढ़ते हाँफ रहा था। तभी वह स्त्री आई और फटाफट ऊपर चढ़ने लगी। उसने अपनी पीठ पर कपड़े के सहारे बच्चे को बाँध रखा था। शिष्य ने उसे आश्चर्य से देखा और कहा ‘सुनो बहन तुम इतना बोझ लादे इतनी आसानी से कैसे ऊपर चढ़ जाती हो। मेरी तरह तुम थकती नहीं हो। स्त्री ने कहा, ‘नही भाई ये मेरे लिए बोझ नहीं है। ये तो मेरा कर्त्तव्य है। मेरे पति के मौत के बाद इनकी जि़म्मेदारी मेरे ऊपर है। इन बच्चों की परवरिश करना मेरा फर्ज़ है। ये बोझ कहाँ से हुए।’ इतना कह वो स्त्री ऊपर पहुँच गई।
शिष्य समझ गया किसी भी काम को बोझ नहीं कर्त्तव्य समझने से वो ज्यादा आसान हो जाता है।
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