Hindi Motivational Story: साहब का पारा सातवें आसमान पर था। वे बार-बार घंटी बजाते लेकिन उनको सुनने वाला अभी तक नहीं आया था। साहब ने मन ही मन अपने चपरासी बाबू को दुनिया भर की गाली दे डाली थी क्योंकि आज सुबह से उन्हें दफ़्तर में चाय, कॉफ़ी, पानी कुछ भी नसीब नहीं हुआ था।
बारह बजे के आसपास बाबू डरा सहमा सा हाथ में कॉफी का प्याला लिए उनके कमरे में दाखिल हुआ। बाबू को देखते ही साहब दहाड़े, ‘क्यों बे कहाँ मर गया था तू? बाबू दबी सी आवाज़ में बोला रास्ते में एक युवक ख़ून से लथपथ पड़ा तड़प रहा था। उसकी बाईक को कोई कार वाला टक्कर मारकर भाग गया था। चारों ओर तमाशबीनों की भीड़ थी लेकिन उसे हॉस्पीटल में भर्ती कराने की हिम्मत कोई नहीं कर रहा था। मैं उसे हॉस्पिटल में भर्ती करा, खून दे, डॉक्टर के यह बताने पर कि अब यह खतरे से बाहर है और जल्द ही होश में आ जाएगा, के बाद दफ़्तर आया। साहब डॉक्टर बता रहे थे कि उसे हॉस्पिटल लाने में यदि थोड़ी देर और हो जाती तो उसकी जान का ख़तरा हो सकता था।
बाबू अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि साहब पुनः गुर्राए, ‘हाँ तूने ही पूरे देश का ठेका ले रखा है, अरे 125 करोड़ के देश में एक आदमी मर भी जाता तो कौन-सा पहाड़ टूट पड़ता, साहब का मूड देख बाबू चुपचाप कमरे से बाहर निकल आया।
बाबू के बाहर जाते ही साहब ने कॉफी का प्याला उठाया ही था कि उनका मोबाइल बज उठा। फोन किसी हॉस्पिटल से था और डॉक्टर बता रहे थे कि उनका बेटा जो अभी अभी होश में आया है, उसका नाम पुकार रहा है। वह बुरी तरह ज़ख्मी किन्तु ख़तरे से बाहर है। यह सब उस व्यक्ति के कारण है जो ना केवल उसे समय समय पर हॉस्पिटल ले आया बल्कि ख़ून भी दे कर गया। यह सुन कुछ समय पूर्व बाबू पर बुरी तरह दहाड़ने वाले बाबू की स्थिति ‘काटो तो ख़ून नहीं’ वाली हो गई। वे किस मुँह से बाबू से माफ़ी माँगे और उसे बताए बाबू आज तुम्हारे सिर्फ़ तुम्हारे कारण ही मेरे घर का इकलौता चिराग़ बुझने से बच गया।
ये कहानी ‘नए दौर की प्रेरक कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Naye Dore ki Prerak Kahaniyan(नए दौर की प्रेरक कहानियाँ)
