Hindi Love Story: अपने बिस्तर पर पहुंचते ही दिव्या ने फेसबुक एप्लीकेशन ओपन किया था। ओपन करते ही उसे आठ नौ फ्रेंड रिक्वेस्ट्स आने का नोटिफिकेशन मिला।
उसने उन फ्रेंड रिक्वेस्ट्स भेजने वालों की डीपी देखनी शुरू की। उनमें से कई को वह बहुत अच्छे से पहचानती थी, जिनकी रिक्वेस्ट उसने तुरंत एक्सेप्ट कर ली। और बाकी फ्रेंड रिक्वेस्ट्स पर सरसरी तौर पर नजर दौड़ाने लगी।
तभी उसकी नजर एक लड़के की डीपी पर पड़ी तो वह उसे देखती ही रह गई।
स्मार्ट और हैंडसम नजर आने वाले उस लड़के का नाम रंजीत था जो शक्ल से बहुत ही मासूम और किसी अच्छे और अमीर घर का साहबजादा मालूम हो रहा था। दिव्या ने उसके बारे में और भी ज्यादा जानने के लिए उसकी प्रोफाइल खोल कर देखी तो वहाँ पर उसे उसकी बहुत सारी तस्वीरें देखने को मिलीं और साथ ही यह भी पता चला कि वह एक मॉडल था, जो ब्रांडेड ड्रेसेज और एसेसरीज की मॉडलिंग किया करता था।
इसके बाद दिव्या ने इंटरनेट पर उसका नाम सर्च किया तो उसे उसके और भी कई सारे फोटोज़ देखने को मिले। उसके फोटोशूट देखकर दिव्या उससे इम्प्रेस हुए बिना नहीं रह पाई, और फिर उसने उसकी रिक्वेस्ट तुरंत एक्सेप्ट कर ली।
कुछ ही देर बाद उसके मैसेंजर पर एक मैसेज नोटिफिकेशन फ़्लैश हुआ। मैसेज रंजीत ने ही भेजा था। उसने मैसेज खोल कर देखा तो उसमें रंजीत ने लिखा था-
“दोस्ती कुबूल करने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।”
दिव्या के होंठों पर मुस्कुराहट आ गई। उसने भी रिप्लाई में “वेलकम” लिखकर भेज दिया और इसी के साथ उसने अपना मैसेंजर भी बंद कर दिया।
अगले दिन जब उसने फेसबुक खोला तो उसे रंजीत की कुछ नई तस्वीरें नजर आई। जिनमें वह ओर भी ज्यादा हैंडसम नजर आ रहा था। फोटोज देखने के बाद दिव्या ने उसे स्माइली वाला इमोजी भेज दिया।
कुछ देर बाद ही रंजीत का रिप्लाई आ गया। वह दिव्या के बारे में और भी जानना चाहता था। दिव्या ने भी बिना कोई नखरे दिखाए उसे सबकुछ बता दिया। उसके बाद दिव्या ने भी उससे उसके बारे में पूछा।
रंजीत ने भी उसे अपने बारे में बताते हुए लिखा कि वो इंजिनियरिंग कर रहा है और यह उसका लास्ट ईयर है। उसके माँ बाप उसे इंजीनियर बनाना चाहते हैं लेकिन उसका सपना फिल्मों में काम करने का है। फिलहाल पढ़ाई के साथ साथ वह मॉडलिंग में अपना हाथ आजमा रहा है।
बस इसी के साथ उनकी चैटिंग का सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो फिर चलता ही गया। अब तो रोजाना ही दोनों घंटों तक फेसबुक पर चैटिंग करने लगे थे।
कुछ दिनों बाद रंजीत ने मैसेज में लिखा, “कब तक हम इसी तरह मैसेज पर ही बातें करते रहेंगे। अब तो मैं तुम्हें अपनी आंखों के सामने लाइव देखना चाहता हूँ। चलो कल ही मिलते हैं।”
“मिलना तो मैं भी चाहती हूँ लेकिन मुझे डर लग रहा है क्योंकि मैंने आज तक किसी अजनबी से मिलने की कोशिश नहीं की।”
“इसीलिये तो मिलने का कह रहा हूँ। जब तक हम एक दूसरे से मिलेंगे नहीं, तब तक एक दूसरे को कैसे जान पाएंगे।” रंजीत उसे समझाने लगा।
“ठीक है, मैं मिलने आ जाऊंगी लेकिन आना कहां है?”
रंजीत ने तुरंत उसे एक एड्रेस सेंड कर दिया। एड्रेस पर नजर पड़ते ही दिव्या चहक उठी।
रंजीत की तस्वीरें देख देखकर वह उसकी दीवानी हो चुकी थी और कल वह उससे रूबरू मिलने वाली थी। आज की पूरी रात उसकी करवटें बदलते हुए बीती और अगला दिन भी उसका शाम होने के इंतजार में काटा।
जैसे ही शाम हुई, उसने अपनी मम्मी से कहा, “मम्मी, मैं सहेली से मिलने उसके घर जा रही हूँ।”
और रंजीत से मिलने के लिए निकल पड़ी। रंजीत ने उसे ड्रीम गर्ल रेस्टोरेंट में बुलाया था। जो शहर का ऐसा जाना माना चार मंजिला रेस्टोरेंट था। जिसके नीचे वाले फ्लोर पर खाने पीने की व्यवस्था उपलब्ध थी तो दूसरी मंजिल पर ठहरने की व्यवस्था भी उपलब्ध थी। लेकिन तीसरी और चौथी मंजिल पर क्या क्या व्यवस्थाएं हैं इस बारे में आम लोगों को कोई जानकारी नहीं थी।
कुछ ही देर बाद ही दिव्या वहाँ पहुँच गई, रंजीत उसे रेस्टोरेंट के गेट के बाहर ही खड़ा नजर आ गया। पहली बार उसे अपने सामने देख दिव्या उसे देखती ही रह गई। रंजीत डीपी में लगी उसकी फोटो से भी ज्यादा हैंडसम था।
और उधर जैसे ही रंजीत ने दिव्या को अपने सामने देखा तो वह भी देखता ही रह गया। दिव्या का गोरा रंग, तीखे नैन-नक्श और साँचे में ढला बदन, देख उसकी आंखें चमक उठी थी। दिव्या को अपनी तरफ देखता हुआ पाकर उसने उसे अपने पास आने का इशारा कर दिया, उसके इशारे को समझकर वो उसके पास आ गई।
“तुम तो तुम्हारी फोटो से भी ज्यादा खूबसूरत हो। ऊपरवाले ने तुम्हें काफी फुर्सत से बनाया है।” रंजीत ने मुस्कुराते हुए कहा तो दिव्या के गाल शर्म से लाल हो गए।
वह शरमाते हुए बोली, “थैंक यू! तुम भी तो अपनी फोटो से भी ज्यादा हैंडसम हो।”
“शुक्रिया।” रंजीत ने स्टाइल से कहा।
“अब बताओ मुझे यहाँ क्यों बुलाया था?” दिव्या ने पूछा।
“क्या यहाँ गेट पर खड़े रहकर ही सारी बातें करनी है? चलो अंदर तो चलो।” कहने के साथ रंजीत उसे रेस्टोरेंट के अंदर ले आया और फिर उसने वेटर को ऑर्डर दे दिया।
फिर दिव्या और रंजीत की आपस में बातचीत होना शुरू हो गई। रंजीत की आंखों में जैसे खुमार सा छाने लगा था। वह दिव्या के उभारों और उसके बदन के हर हिस्से को अजीब सी नज़रों से देख रहा था। वहीं दिव्या भी मन ही मन रंजीत को पसंद करने लगी थी। इसलिए उसे कुछ भी अजीब नहीं लगा।
कुछ ही देर में नाश्ते के साथ कॉफी सर्व हुई। कॉफी का पहला घूंट पीते ही अचानक से दिव्या का सिर भारी होने लगा। कुछ ही देर में वो वहीं बेहोश हो गई और इसी के साथ रंजीत के चेहरे पर मुस्कराहट आती चली गई।
वेटर मुस्कुराते हुए आगे आया तो रंजीत ने उसके हाथों में नोट ठूंसते हुए कहा, “बहुत खुब! इसी तरह समझदारी से काम किया करो।
थोड़ी देर बाद ही रंजीत दिव्या के साथ आलीशान कमरे के शानदार बेड पर उसके बदन से खेल रहा था, जबकि दिव्या बेसुध पड़ी हुई थी। रंजीत ने एक-एक करके उसके सारे कपड़े उतार डालें और अब दिव्या केवल टू पीस में मौजूद थी। उसने नजर भर कर दिव्या को ऊपर से नीचे तक देखा, जैसे अचानक उसके ऊपर पागलपन सवार हो गया हो, वह दिव्या के ऊपर झपट पड़ा, उसने दिव्या को नोंचना खसोंटना शुरू कर दिया। वह इस समय बिल्कुल जानवर लग रहा था। जबकि बेहोश पड़ी दिव्या कभी कभी कसमसा उठती लेकिन विरोध करने की क्षमता उसमें अभी भी नहीं थी।
आखिर में उसने अपनी मनमानी पूरी शिद्दत से की और फिर बिस्तर पर ही उसकी बगल में एक तरफ लुढ़क गया। दिव्या के बदन पर इस समय कपड़े का चिथड़ा भी नहीं था, वह अधखुली आंखों से सब देख रही थी पर न तो वह कुछ कर पा रही थी और न ही अपने बदन का कोई हिस्सा हिला डुला पा रही थी।
कुछ देर बाद रंजीत ने अपने फोन से किसी को कॉल किया। उधर से कॉल एक्सेप्ट होते ही वह बोल उठा, “रूम नंबर 113 में एक नंबर का माल पड़ा हुआ है, तुरंत यहां आ जाओ तुम्हारा भी दिल खुश हो जाएगा।”
करीब 10 मिनट बाद कमरे के दरवाजे पर नॉक हुआ तो रंजीत ने आगे बढ़कर दरवाजा खोल दिया। दरवाजे पर एक भारी भरकम शरीर वाला काले रंग का आदमी मौजूद था। रंजीत उसके सामने से हट गया। आदमी बेड के पास आया, उसने एक नजर बेहोश दिव्या पर डाली और फिर रंजीत की तरफ देखकर मुस्कुरा उठा।
“वाह! तुमने एक नंबर का माल फंसाया है, रज्जो बाई खुश हो जाएगी।”
“रज्जो बाई खुश हो या नाराज हो, लेकिन मेरी मेहनत बेकार नहीं न जानी चाहिए।” रंजीत ने कहा।
“अरे तुम ऐसी बात क्यों कर रहे हो? तुम्हें इसकी पूरी कीमत मिलेगी, डोंट वरी।” और इसी के साथ उसने अपने हाथ में पकड़ा हुआ ब्रीफकेस रंजीत की तरफ बढ़ा दिया। रंजीत ने ब्रीफकेस खोल कर देखा तो उसकी आंखें चमक उठी।
“Thank you!” कहने के साथ वह उस कमरे से बाहर निकलता चला गया। वहीं दूसरी तरफ उस काले रंग के मोटे आदमी की आंखों में हवस की चमक साफ साफ नजर आ रही थी।
“इस माल का थोड़ा रस तो मैं भी चूसूंगा। उसके बाद ही इसे रज्जो बाई के कोठे की रौनक बनाऊंगा।”
कहने के साथ उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। कुछ ही देर बाद वह भी दिव्या के ऊपर सवार था। वह बुरी तरह से दिव्या के जिस्म को नोंच रहा था। वहीं दिव्या की आंखों से झर झर आंसू बह रहे थे। उसे अपने आप पर शरम आने लगी थी। वह काला सांड उस पर लगातार हैवी होता चला जा रहा था और वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही थी।
वह दर्द भरी आवाज में बुदबुदा उठी,”काश उस मासूम चेहरे के पीछे छुपे भेड़िए को मैं पहले ही पहचान जाती।”
और इसी के साथ उसकी आंखों से आंसूओं की धारा बह निकली। इससे ज्यादा वह कुछ कर भी नहीं सकी।
