Hindi Kahani: यकीन नहीं होता अपनी आंखों पर!आंखें मलते हुए उसने देखा था,सामने से आती वो महिला बिलकुल उसकी सखी वान्या सी ही दिख रही थी पर उसे हुआ क्या?वो तो बहुत खूबसूरत, स्मार्ट और मॉडर्न तरीके से रहती थी, अचानक ये कायापलट हुआ कैसे?
ये तो कितनी बूढ़ी लग रही है, अंदर को धंसी आंखे,बिखरे बाल और चाल…कैसी बेजान लग रही है,बीमार है क्या बहुत…?सोचते हुए ऋतु उसकी तरफ बढ़ी…
वो एकदम से एक शो रूम में घुस गई थी और ऋतु को पुरानी यादों ने आ घेरा था,उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये उसकी वो ही पुरानी सखी वान्या है या उससे मिलती जुलती कोई दूसरी औरत, जिसे वो वान्या समझ बैठी है।
वान्या और ऋतु संग कॉलेज में पढ़ती थीं।वान्या जहां बहुत अमीर घर से संबंध रखती थी,ऋतु एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से थी। वान्या बहुत खूबसूरत थी,गोरी,लंबी,रेशमी घुंघराले बाल और हंसती तो जैसे फूल झरने लगें।वहीं ऋतु साधारण फीचर्स वाली लड़की थी,भले ही पढ़ने में नंबर वन थी वो लेकिन उसके मन में एक कॉम्प्लेक्स पलता था वान्या जैसी लड़कियों को देखकर जो चांदी की चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुई थीं।
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पहली बार उसे तब खुद पर गर्व हुआ था जब सेमेस्टर एग्जाम्स से जस्ट पहले,वान्या ने उससे फिजिक्स के नोट्स मांगे थे और उससे रिक्वेस्ट की थी कि वो उसे समझा भी दे,इतने अच्छे नोट्स उसने कहीं नहीं देखे थे पहले।
ऋतु ने खूब अच्छे से उसे पढ़ाया और वान्या के भी बढ़िया मार्क्स आए,फिर तो दोनो पक्की सहेलियां बन गईं थीं।कैंटीन में,पिकनिक पर दोनो साथ रहती और उनकी घनिष्ठता दिनो दिन बढ़ती ही गई।
कॉलेज खत्म होने के बाद,दोनो अलग हो गई थीं,अब तो फोन पर ही बातचीत हो पाती थी,कभी कभी मिलना होता।
ऋतु ने घर की हालत देखते हुए,जॉब करनी चाही और उसी सिलसिले में एक इंटरव्यू देने गई।
कितनी तेज बारिश थी उस दिन,कितनी बसें बदलते,बदलते वो किसी तरह वेन्यू पहुंचने ही वाली थी कि एक फास्ट स्पीड कार ने उस पर ढेरों पानी ,कीचड़ उछाल दी।
अंधे हो क्या?देख के नहीं चला सकते?वो चीखी थी।
एक हैंडसम लड़के ने शीशा नीचे कर उससे सॉरी बोला था।
ऋतु एकटक उसे देखती रह गई थी,सारा गुस्सा भूलकर उसकी खूबसूरती में खोई वो उसे पहली नजर में दिल दे बैठी और वो मुस्करा कर बोला,”प्लीज!मेरी गाड़ी छोड़े..मुझे देर हो रही है।”
“आ..हां…हां…” वो साइड होती बोली,”देर तो मुझे भी हो रही है…” निगाहें उसके ऊपर से हटने को तैयार न थीं पर हटना तो था ही,उसने उस हैंडसम बंदे को जाने दिया,मुंह से एक आह निकली…”काश!ऐसा खूबसूरत बंदा मेरी किस्मत में भी कोई लिख दे।”
किसी तरह कपड़े सुखा कर वो इंटरव्यू में पहुंची,अच्छी तकदीर थी उसकी,इंटरव्यू भी थोड़ा लेट शुरू हुआ था,शायद सभी कैंडिडेट्स बारिश की वजह से समय से नहीं पहुंचे थे।
अब बारी थी उसकी चौंकने की जब उसके इंटरव्यू लेने वाले सर,वो ही हैंडसम व्यक्ति निकला जिसे वो कुछ देर पहले बड़ी मुश्किल से अपने दिल से निकाल पाई थी।
उसकी जुबान तालू से चिपक गई थी और वो मुस्करा के उसे निहार रहा था।
टेक योर सीट मिस ऋतु!वो बोला और वो आसमान से जमीन पर आई।
“सॉरी सर!आई डिड नॉट मीन डेट…” वो हकलाई,उसे याद आया उसने कितनी बदतमीजी से उसे” अंधे हो क्या?”कहा था।
“फॉरगेट इट यंग लेडी!बी सीटेड “,वो अभी भी मुस्करा रहा था।
इसका चेहरा ही स्माइलिंग है या इसे गुस्सा आता ही नहीं?उसने सोचा था,क्या क्या प्रश्न वो पूछता रहा था और मंत्रमुग्ध सी वो जबाव देती रही।
दिल करता था कि वो पूछता रहे और वो जबाव देती जाए और कयामत आ जाए।उफ्फ!क्या गंभीर आवाज़ है इसकी!कितनी कशिश है इसकी आंखों में!अगर यहां नौकरी मिल जाए तो जिंदगी बन जायेगी!ये तो मुझे क्या ही मिलेगा पर इसके दर्शन तो हो जायेंगे रोज!
वो घर लौटी तो खोई खोई थी उस दिन।मां ने जानना चाहा था,इंटरव्यू कैसा हुआ?कोई गुंजाइश है नौकरी मिलने की?
वो शून्य में निहारती मुस्कराई।
क्या हुआ ऋतु?तबियत ठीक है,जब से आई है,अजीब व्यवहार कर रही है…उसका माथा छूकर मां बोली,तुझे तो बुखार है?आ चाय बना कर पिलाऊं तुझे।
भीग गई थी थोड़ा…वो खोई हुई सी बोली।
मां ने नमक मिर्च से बेटी की नजर उतारी,उसे चाय पिलाई,दवाई दी।
बुखार कम हुआ तो उसका हाथ सहलाते हुए मां बोली,कोई मिला था आज वहां?कुछ हुआ क्या?
वो अचानक मां से लिपट गई,कुछ भी तो नही छुपा पाई थी अपनी मां से वो उस दिन…
मां!वो बहुत सुंदर हैं,मेरे दिल में उनकी मोहक छवि बस गई।उसने लजाते हुए बताया।
मां हंसी थी,ये उम्र ही ऐसी है बेटा!इसमें कोई अच्छा लग जाता है तो ये ही हाल होता है लेकिन हर चमकती चीज सोना नहीं होती,फिर प्यार मोहब्बत,रिश्ता,शादी समान स्टेटस में ही अच्छा होता है।
“ये तो अंगूर खट्टे हैं” वाली बात कर रही हैं मां! उसने मन में सोचा और उसे रोना आया था अपनी बेबसी पर…
क्यों मै गरीब घर में पैदा हुई,इतनी सुंदर भी नहीं हूं कि कोई देखते ही दिल हार जाए मुझ पर।भगवान पर गुस्सा आया था उसे,सारे बंधन हम गरीबों के लिए ही हैं,आज यहां वान्या होती वो खरीद लेती इसे भी?
किसको कौन खरीद लेता बेटा? मां ने आश्चर्य से पूछा था।
कुछ नहीं…उसने टालना चाहा पर मां भी जिद पकड़ गई और उसने बताया…तो उसकी मां खूब हंसी थीं।
इस तरह शेख चिल्ली की तरह कब से सोचने लगी तू?तुझे क्या लगता है कि वो सिर्फ पैसे वाली लड़की देखकर शादी कर लेगा और फिर वो लड़की सुखी रह पायेगी?
खुशी का संबंध पैसों से नहीं होता ऋतु!मां ने उसे बहुत समझाया था,अगर वो तेरी किस्मत में है तो तुझे वैसे ही मिल जायेगा नहीं तो दुनिया की कोई ताकत तुम्हें एक नहीं कर सकती।शादी ब्याह सब ऊपर से लिखे खेल हैं,उसके लिए ज्यादा दुख नहीं मनाना चाहिए,मां ने कहा पर वो उसे भुला ना सकी थी।
उसे बेसब्री से इंतजार था उसके रिजल्ट का।और अगले हफ्ते,उस पर कॉल आई कि आपको यहां “पी ए टू बॉस” की नौकरी के
लिए बुलाया जाता है।
ऋतु तो मानो बाबरी हो गई थी उस दिन,खिली हुई धूप की तरह चमक आ गई थी उसके मुरझाए चेहरे पर,तो क्या सच में मेरा सपना पूरा हो गया?वो,पूरे वक्त मेरे सामने होंगे?हम कितने करीब आ जायेंगे? हाय भगवान! मै इतनी बड़ी खुशी किससे शेयर करूं?एक वान्या ही थी,उसे बताती हूं…
लेकिन वो क्या सोचेगी?पी ए ही तो बनी है किसी की, इसमें इतना उछलना क्या?वान्या की इतनी औकात थी कि वो चाहे तो उसकी पूरी कंपनी,उसके एम्प्लॉय,बॉस समेत खरीद ले।
वो रुक गई किसी को भी फोन करने से,पहले खुद तो जाकर देख लूं एक बार कैसे हैं वो लोग?
उसके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी ये,बहुत अच्छे स्वभाव के थे उसके बॉस,उनसे बहुत
कुछ सीखा भी उसने।कभी कभी चोर निगाह से उनका सुंदर मुखड़ा पीती रहती थी वो और जैसे ही वो देखते,निगाहें झुका कर काम में लग जाती।
सब उन्हें चौहान सर कहते थे लेकिन ऋतु को वो अक्सर कहते,तुम मुझे मेरे नाम अमन से बुला सकती हो।
ऋतु बौरा जाती खुशी से,इसका क्या मतलब निकालू मैं?वो अक्सर खुद से पूछती।क्या वो भी मुझमें इंटरेस्ट ले रहे हैं?
क्यों खुशफहमी पाल रही है?क्यों दिन में खुली आंखों सपने देख रही है?उसका दिमाग समझाता था उसे पर दिल था कि मानता ही
नहीं था।
एक दिन अमन सर ने सबसे कहा,आज मैं तुम सबको दोपहर लंच पर इनवाइट कर रहा हूं ,कोई खाना मत लाना अपना,और ऋतु खुशी से झूम उठी,आज किन्हीं शुभ क्षणों में अपने दिल की बात,अमन सर को कह ही दूंगी।गीत संगीत,नृत्य के समय सब मस्ती में होते हैं ,अगर सर को बुरा लगा तो कोई खूबसूरत सा बहाना बना कर टाल दूंगी।
उस दिन,लंच शुरू होने से पहले,अमन सर ने उन सबको(पूरे स्टाफ)बताया,वो शादी करने जा रहे है जल्दी।
ये खबर,ऋतु के अरमानों पर बिजली बन कर टूटी।वो लड़खड़ा गई,सीधी खड़ी न हो पाई।
तो क्या अमन सर किसी और को??
इससे ज्यादा वो सोच न सकी और एक किनारे जाकर आंसू बहाने लगी।
अभी उस पर होते वज्रपात रुकने का नाम
ही नहीं ले पा रहे थे।सबने कहा,सर!उनका फोटो तो दिखाएं जो अब आपके दिल पर राज करेंगी,आखिर जो हम पर राज करता रहा इतने साल से,आज उस पर राज करने वाली आ रही है तो उनकी झलक तो दिखलाइए।
अमन ने अपनी जेब से एक फोटो निकाली और ऋतु बेहोश होते होते बची,मिस सुखजीत कौर ने उसे संभाल लिया था।
ये तो वान्या की फोटो है इनके संग?तो क्या इनकी शादी वान्या से??ऋतु जल भुन के राख हो गई…उसे चक्कर आ गया।
किसी तरह खाना पूरी करके वो लौट आई थी घर,मां फिर उसका चेहरा पढ़ गई थीं।
फूट फूट के रोई उस दिन वो…क्यों भगवान हमें कोई खुशी नहीं देता?सारी खुशियां अमीरों के हिस्से में लिखी हैं,हम गरीब बस तरस तरस के प्राण छोड़ दें।
क्या हो गया है ऋतु तुझे?मां बहुत बिगड़ी थीं उसके ऊपर लेकिन वो लाइट बुझा के सो गई थी।मां की बातें…ये दुनिया के सारे आकर्षण माया जाल हैं,सबको अपनी तकदीर का मिलता है!खुशी किसी चीज या इंसान से नहीं मिलती,ये तो महसूस की जाती है,अपने भीतर से ही इसका स्रोत फूटता है…देर तक गूंजती रही थीं उसके दिल दिमाग में।
फिर अनुराग आए थे उसकी जिंदगी में,साधारण शक्ल सूरत के,सामान्य कद काठी के अनुराग,शुरू में उसे नहीं भाए थे पर पति थे उसके,कब हौले हौले दिलो दिमाग पर छा गए और उसकी सांसों में बस गए कि ऋतु सबको भूल गई थी उनके प्यार में।दो प्यारे गोल मटोल बच्चों की मां थी वो अब और एक खुशहाल जिंदगी गुजार रही थी।
आज अचानक वान्या दिख गई थी उसे और सारी पुरानी बातें चलचित्र की तरह घूम गई तीन उसके मस्तिष्क में।
तभी वान्या,उस शो रूम से बाहर निकली।
ऋतु ने उसके सामने पड़ते ही कहा,वान्या! कैसी हो?
उसने अचकचा के देखा और ऋतु उसके गले लिपट गई।
ये क्या हाल बना रखा है तुमने?उसने वान्या से पूछा था।तुम्हारे हसबैंड कहां है?
वो तो एक फ्रॉड था ऋतु!वो दुखी स्वर में बोली,उसे सिर्फ मेरी प्रॉपर्टी चाहिए थी,वो जितना खूबसूरत बाहर से दिखता था,उसका दिल उतना ही बदसूरत था,एक साथ चार पांच अफेयर्स करना,बेवजह तुम्हें नीचा दिखाना,खुद की श्रेष्ठता साबित करना,उसके मुख्य शौक थे।
क्या??ऋतु का मुंह खुला रह गया।हर समय मैं इसकी तकदीर से रश्क करती रही,आज भी अगर ये न मिलती तो मैं तो यही सोचती कि ये कितनी खुशहाल जिंदगी जी रही है,इसने तो दुख कभी देखे ही नहीं लेकिन वास्तविकता इस बात से हजारों कोस दूर थी।
आज ऋतु को मां की हर छोटी बड़ी बात याद आ रही थी और वो भगवान का शुकराना अदा कर रही थी हर उस चीज और व्यक्ति के लिए जो उसकी जिन्दगी में थे।
