Aate-Jaate Yaayaavar by Mannu Bhandari
Aate-Jaate Yaayaavar by Mannu Bhandari

Hindi Story: कभी सोचा भी नहीं था महज़ मज़ाक में कही हुई बात ऐसा मोड़ ले लेगी। मोड़, और इस शब्द पर मुझे खुद ही हँसी आने लगी। मेरी जिंदगी में अब न कोई उतार-चढ़ाव आएगा, न मोड़। वह ऐसे ही रहेगी; सीधी, सहज और सपाट। हाँ, कभी-कभी उस सपाट जिंदगी में एक दरार डालकर उसके पार बसी दुनिया को देखने के लिए जी ललचा उठता है, पर जब-जब ऐसा किया, मन का बोझ बढ़ा ही है। फिर भी कल जो कुछ हुआ उसमें जीना अच्छा लग रहा है। खास कर इस आश्वासन के साथ, नहीं, आश्वासन नहीं, न जाने क्यों मुझे सही शब्द नहीं सूझ रहे और मैं गलत शब्दों का ही प्रयोग करती जा रही हूँ-आमंत्रण या कहूँ कि साग्रह मनुहार के साथ कि मैं आज भी मिलूँ।ख्याल आया, रमला सुनेगी तो हँसती हुई कहेगी, लगा लिया तुझे भी क्यू में? भई, कमाल है?’ रात बारह बज गए थे, तो रमला ने पूछा नहीं था, एक तरह से आदेश-सा देते हुए ही कहा था, ‘नरेन, मिताली को छोड़ने का जिम्मा आपका। आप इसे छोड़ते हुए निकल जाइए।’
उसने कुछ ऐसे सहर्ष भाव से स्वीकृति दी मानो वह इसी बात की प्रतीक्षा कर रहा था। टैक्सी-स्टैंड पर कई टैक्सियाँ खड़ी थीं, पर वह उधर नहीं बढ़ा। इस आदमी से काफी दूरी रखनी है और इसकी हर बात को केवल ऊपर से निकाल देना है, इस बात के प्रति बेहद चौकस होने के बावजूद, आधी रात को उसके साथ पैदल चलने का ख़याल मुझे कहीं अच्छा लगा। चारों ओर निपट सन्नाटा था और सड़क के दोनों ओर दूर तक लैंप-पोस्ट बाँहें फैला-फैलाकार रोशनी उँडेल रहे थे।
‘यहाँ बारह बजे ही कैसा सन्नाटा हो जाता है! विदेशों में तो बारह के बाद से ही असली जिंदगी शुरू होती है।’ और मुझे लगा कि अब यह लगातार विदेश की बातों से बोर करेगा। इस देश की लड़कियों पर रौब डालने के लिए कितना अच्छा हथियार है यह!