Summary: किताबों का जादू: बच्चों की स्क्रीन टाइम से छुटकारा और पढ़ने की नई आदत
सुची और मानव ने अपने बच्चों को स्क्रीन से दूर कर किताबों और अख़बार से दोस्ती कराई। प्यार, खेल और इनाम के जरिए उन्होंने पढ़ने की आदत को मज़ेदार बना दिया।
Short Story in Hindi: सुची और मानव परेशान बैठे थे। उनके बेटे आरव और बेटी सिया का स्कूल के बाद का अधिकतर समय सिर्फ़ मोबाइल और टीवी में ही बीत जाता था। एक दिन सुची ने सिर पकड़कर कहा ,हे भगवान ! ये बच्चे किताबों से ऐसे भागते हैं जैसे कड़वी दवाई हो। मानव हँसकर बोला , हाँ, और टीवी देखकर तो इनकी आँखें ऐसे चमकती हैं जैसे बल्ब ! दोनों ने ठान लिया कि अब बच्चों की किताबों से दोस्ती करवानी ही होगी। अगले दिन सुची ने घर के एक कोने में रंग-बिरंगे कुशन, लाइटें और पोस्टर लगाकर किताबों का एक जादुई घर बना दिया। जब बच्चे स्कूल से लौटे, तो सिया ने हैरानी से पूछा मम्मा ये क्या है?
सुची ने कहा ये है बुक्स का जादुई घर ! जो यहाँ बैठेगा, वो एक नई और मज़ेदार दुनिया की सैर कर पाएगा। आरव ने पूछा इस जादुई घर में गेम्स भी हैं क्या ? मानव ने कहा हाँ बिलकुल गेम्स भी हैं, पर दिमाग लगाने वाले।
रात को खाना खाते-खाते मानव बोला बच्चों आज मैं तुम्हें एक मज़ेदार कहानी सुनाता हूँ। फिर उसने पंचतंत्र की कहानी शुरू की और आधी कहानी सुना कर बीच में रुक गया।
आरव ने चौंककर कहा पापा आगे क्या हुआ बताओ न , मानव ने किताब उठाकर कहा अब आगेकी कहानी तो ये किताब ही बताएगी। सिया नाराज़ होते हुए बोली ये तो चीटिंग है। लेकिन जब मानव ने कहानी नहीं सुनाई तो दोनों ने किताब उठाई और पढ़ना शुरू कर दिया।

अगले ही दिन सुची ने एक रीडिंग चार्ट बनाया। और बच्चों को उसके बारे मे बताया की जो भी कहानी या अख़बार का पूरा आर्टिकल पढ़ेगा और हमें समझायेगा , उसे मिलेगा रंग-बिरंगा स्टार। दस स्टार मिलने पर मम्मी-पापा दोनों बच्चों के साथ उनकी पसंद का खेल खेलेंगे ,आइसक्रीम, पिकनिक या मूवी नाइट का ऑप्शन भी रखा गया।
आरव खुशी से उछला और बोला तो मैं तो पूरा अख़बार पढ़ डालूँगा , सिया बोली भैया आपसे पहले मैं पढूंगी क्योंकि मुझे जल्दी से स्टार्स चाहिए। इस तरह दोनों भाई-बहन पढ़ने की होड़ में लग गए।
मानव ने बच्चों से कहा , कहानी को मज़ेदार बनाने के लिए तुम दोनों जो भी कहानी पढ़ो, साथ में उसकी एक्टिंग भी करते जाना। कहानी पढ़ते हुए आरव ने शेर बनकर दहाड़ लगाई, तो वहीं सिया ने चूहा बनकर दुखी मुँह बनाते हुए कहा महाराज, मुझे छोड़ दीजिए, मैं आपकी मदद करूँगी।

सुची और मानव बच्चों की हरकत पर खूब खिलखिलाकर हंसने लगे , बच्चों की इस प्यारी हरकत के बाद उन लोगों ने रविवार को न्यूज़पेपर डे रखा।
धीरे-धीरे ये जादू असर करने लगा। अब आरव सोने से पहले मोबाइल नहीं, बल्कि किताब लेकर कहता,
“मम्मा, बस एक और चैप्टर पढ़ने दो। और सिया हर सुबह अख़बार के बच्चों वाले पन्ने पढ़कर सबको सुनाती थी। एक दिन सुची ने मज़ाक में कहा लो, थोड़ी देर मोबाइल मे गेम खेल लो। तो सिया ने हँसकर जवाब दिया नहीं मम्मा, मोबाइल पर गेम खेलने में अब वो मज़ा नहीं रहा।
इस बात पर सुची और मानव ने चैन की साँस ली। उन्होंने समझ लिया कि बच्चों की आदत डाँट से नहीं, बल्कि प्यार और खेल से बदलती है। अब किताबें ही उनकी असली दोस्त थीं और टीवी- मोबाइल बस टाइमपास।
