Hindi Love Story: “लेडीज फर्स्ट।” मैंने रेस्टोरेंट के दरवाजे को धक्का देते हुए अतिशय सज्जनता ओढ़कर, सर थोड़ा झुकाते हुए कहा।
“सीधे से चल रहे हो, या पिटाई खानी है बे?” उसने आँखें तरेरी।
उन आँखों में दर्ज दहशतगर्दी ने मेरी सारी भलमनसाहत भुला दी और मैं सीधे आगे बढ़ते हुए कोने का एक टेबल पसंद कर, सोफ़े पर पसर गया।
छः लोगों की बड़ी टेबल होने से वह मेरे सामने ना बैठ कर, मेरे बगल में ही बैठी।
“ऑर्डर देने में भी जेन्ट्स फर्स्ट का रूल मानना है या तुम कर दोगी ऑर्डर?” मैंने वेटर को अपनी ओर आते देखकर कहा।
“तुम्हारा क्या मन है, बताओ?” उसने कहा, पर मैंने उसकी इच्छा पूछते हुए ऑर्डर कर दिया।
“ये बताओ, ये लेडिज़ फर्स्ट तुमने फिल्मों से सीखा है?”
“इसमें फिल्मों से सीखने का क्या है यार। हमारे समाज में नारी को देवी का दर्जा है और इसलिए पहले उनके लिए सीट खाली करके या रास्ता छोड़कर हम उसके लिए सम्मान दिखाते हैं।” हालाँकि मैंने मस्ती में ही वह हरकत की थी।
“सम्मान!!! माई फूट। यह तुम्हारी देवियों की बेइज़्ज़ती है डियर! तुम मेल हमको यह सब फ़ालतू काम कर के याद दिलाते हो कि हम कमज़ोर हैं, इसलिए तुमसे हमारा कोई मुक़ाबला नहीं है। तुम लोग हमारी पोजीशन सोसाइटी में लूले-लंगड़ों की बना कर रखना चाहते हो, इसलिए हमको यह सब फैसेलिटी भीख की तरह देते हो। अरे भई, हम नहीं हैं ऐसे कमज़ोर कि तुम खड़े होकर सफ़र कर सको तो हम नहीं और तुम हमें आसान सा झूठा रास्ता दिखा कर ‘लेडिज़ फर्स्ट’ कहते हुए दाँत निपोरो। मन कर रहा था तुम्हारे दाँत तोड़ दूँ।”
“अरे बाप रे! इतना बड़ा दुष्कर्म हो गया मुझसे? माफ़ कर दो मुझे देवी,प्लीज़।” मैंने हँसते और हाथ जोड़ते हुए आगे कहा- “जिसे मैंने सज्जनता समझा था, वह दुर्जनता निकली। लेकिन ऐसा मैंने जानबूझ कर नहीं किया। मैं भूल गया था जस्ट कि, आज कि शाम मैं अपने साथ आग का दरिया लिए फिर रहा हूँ।”
“वाह बेट्टा! हम बराबरी की बात करें तो तुम्हें आग का दरिया लगती हैं?” उसने फिर अपनी ख़तरनाक आँखों का रुख़ मेरी ओर किया, जिनमें इस बार मोहब्बत भी घुली हुई थी, उसने टेबल पर दाहिना हाथ टिका कर अपना चेहरा को उस पर रखा।
“एक बात कहूँ?” मैंने कहा।
“मत कहो।” उसने शरारत से कहा।
“यह कौन सी सज्जनता हुई? कोई अपनी बात कहना चाहे तो उसे कहने देना चाहिए न।”
“पहले सज्जनता का फिमेल शब्द कहो।”
“सुनो मेरी सजनी। अगर तुम सोच रही हो कि तुम्हें इक्ज़ाम लेना है मेरा, तो पहले सेलेबस प्रोवाइड कराओ।”
उसने हँसते हुए कहा- “सुपर्ब, कहाँ से ढूँढ के निकाला ये शब्द ‘साजन’?”
“क्या बताऊँ सजनी, तुम्हारी आँखों में जब अपना चेहरा देखता हूँ, तो तुम्हारे लबों को काट खाने का मन होता है। कुछ ढूँढने- ढांढ्ने के होश में कौन जाहिल रहना चाहता है?”
“ठरकी कहीं के। एक दो ढँग की शायरियाँ तो याद कर लेते।” उसने अपने निचले होठों को दाँतो से दबाते हुए ढिशुम की हल्की आवाज़ निकाली और मुक्का मेरी कमर में रसीद कर दिया।
कहीं आवाज़ गूंजती हुई सुनायी पड़ी कि, निखरने की ख़्वाहिश है, तो इस आग के दरिया में तपना ही राह है, वहीं से तर्पण पाया जा सकेगा।
ये कहानी ‘हंड्रेड डेट्स ‘ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Hundred dates (हंड्रेड डेट्स)
