Hundred Dates
Hundred Dates

Hindi Love Story: “बस, दस मिनट और।” उसे लगा होगा; मैं पूछने वाला हूँ कि, कितना वक़्त यहाँ और लगेगा। हम एक कॉस्मेटिक्स स्टोर में थे। उसके यह दस मिनट पहले भी दो बार हो चुके थे और मैं प्रोडक्ट देख-देख कर हैरान था कि, एक बेचारी शक्ल पर कितने ज़ालिमाना फ़रेब लपेटे जा सकते हैं।

“तुम बोर हो गए होगे ना।” आख़िरकार आधे घंटे बाद जब हम कार में आकर बैठे तो उसने तहज़ीब दिखाने की कोशिश की।

“अरे नहीं, मुझे तो मज़ा आ रहा था। और टाइम लगाना हो तो फिर चलें?” मेरी खुराफ़ाती शक्ल की खिलावट उससे छिप नहीं सकती थी।

“काहे में मज़ा आ रहा था?” उसने घूरते हुए शक से पूछा।

नथूनों में हवा भरते हुए मैंने कहा-“इतनी मस्त लड़कियाँ और परफ्यूम की ख़ुशबू से कैसे बोर होता? मन एकदम खिला हुआ लग रहा था और प्रोडक्ट्स देखने में तो मज़ा ही आ गया।”

“दो चमाट पड़ेंगे न, तो सारा मज़ा निकल जाएगा।” उसकी इस चिढ़ से मुझे मोहब्बत सी है।

“मार लेना यार, मना किसने किया है? पर ये बताओ कि कभी तुमने महसूस किया कि, अलग-अलग पसीने के साथ और अलग-अलग बॉडी पर परफ्यूम भी अपना अलग-अलग जादू पैदा करता है।” मेरा मन अब भी उस ख़ुशबू से सराबोर था।

“हद हो गई अब तो, तुम लेडिज़ परफ्यूम सूंघते फिरते तो भी बात थी, पर उनका पसीना?” उसने मेरी जांघ पर ज़ोरदार घूँसा रसीद कर ही दिया।

“अब इंसान नाक का ऑपरेशन कराकर बंद करा ले क्या? वैसे भी कितनी पवित्र होती है वह गंध…” मैंने अपनी जांघ सहलाते हुए मस्ती की।

“तुम्हें लगता है तुम इंसान हो? तुम दरिंदे, राक्षस हो जो लेडिज़ परफ्यूम और पसीने पर रिसर्च करता है।”

“अच्छा ये बताओ इतनी लिपा-पोती का सामान किसलिए?”

“मैं तो बहुत कम यूज़ करती हूँ यार। कल बुआ की लड़की को हमारे यहाँ ही दिखाने का प्रोग्राम है।”

“ओओ…तो वह है असली प्रोडक्ट। जिसे सँवार, लीपाई-पोताई की हुनर आज़माईश कर ग्राहक़ के सामने पेश किया जाना है?” किसके लिए सजना सँवरना, यह सवाल तो ऐतिहासिक रहा है जो जब-तब सर उठाता रहता है।

“हद दरजे की बदतमीजी नहीं है तुम्हारी?” उसने मुझे दुबारा मुक्का मारा और फूली हुई नाक के साथ आग बरसाती आँखों से देखा।

टेस्टर का आई लाइनर और मसकारा यूँ चमका, जैसे उसकी चमक के सामने मेरी सोच बौनी पड़ती है।