Hindi Love Story: “खाने का क्या करना है?” मैंने टाइम देखा, ग्यारह बज ही चुके थे। हमें कोलकाता के पार्क स्ट्रीट के एक बार से निकल कर अनजान रास्तों पर टहलते हुए काफी देर हो गई थी।
“ऐसे तो भूख नहीं, पर कुछ खाना पड़ेगा। रात में भूख लगने का डर सताता है।”
नशे से भरी अपनी आँखें मैंने उसकी ड्रेस पर डाली और ख़ुद की भी- “अरे सुनो! अचानक मुझे याद आया; यहाँ से आज एक शादी का इनविटेशन भी था।”
“यहाँ से तुम्हें किसने बुला लिया?” ताज्जुब उसके चेहरे पर बिखरा, और समझने की कोशिश करते हुए उसने पूछा।
“अरे वही, वो जो पिछली वाली सड़क के होटल में शादी थी ना, वहीं से…अंकल ने कहा था कि मैं तुम्हें लेकर ज़रूर आऊँ।” मैंने खिलखिलाहट बिखेरी।
बदमाशी के मंसूबे अब वह समझ चुकी थी- “पिटवाओगे तुम आज और कुछ नहीं।”
“अबे, अपने कपड़े और शक्ल किसी बाराती से कम तो नहीं। और अंकल ने सच में बुलाया है, तुम चलो तो सही; तुम्हें देखकर ख़ुश हो जाएंगे।”
“मुझे नहीं करना ख़ुश उन्हें, भाड़ में जाएँ तुम्हारे अंकल। शराफ़त से होटल चलो, वहीं कुछ मँगा लेंगे।”
“अरे नहीं, अंकल नाराज़ हो जाएंगे। कितने प्यार से बुलाया है उन्होंने, हमें जाना ही चाहिए।” मैंने उसका हाथ पकड़ कर ज़बरदस्ती उस ओर मुड़ने पर मजबूर किया और ले चला।
“शक्ल तो अच्छी रखो, चोरों टाईप क्यूँ बना रखी है?” मैंने गेट पर पहुँचते हुए निहायत ही मासूम मुस्कान के साथ कहा।
“चोरों के नाना।” कहते हुए उसने अपनी सारी झिझक; नाक तिरक्षी करते हुए ख़त्म कर दी और जांबाज़ी से हमने डी.जे. पर डांस भी किया, दुल्हा-दुल्हन के साथ बाक़ायदा फोटो खिंचाई और जमकर दावत उड़ाकर, पान चबाते हुए शादी से विदा हुए।
“मैंने कहा था ना, अंकल ख़ुश हो जाएंगे।” मैंने मौका देखकर उसके पिछवाड़े में एक चपत लगाई।
“हाँ, भूखों को खिलाकर तुम्हारे मारवाड़ी अंकल ख़ुश तो होते ही होंगे।” उसने दाँत भींचते हुए कहा।
“ख़ुश तो ख़ुश, हमने उन्हें पुण्य भी तो कमवाया। भूखों को खाना खिलाने से बड़ा पुण्य और क्या है? ऊपर से पान-वान के प्रबंध से तो उन्होंने स्वर्ग में अपनी सीट पक्की कर ली है।” दोनों ही सड़क पर लहलहाते चल रहे थे।
“तुम्हारे जैसे मुफ़्तखोरों की फसल थोड़ी और बढ़ गई ना, तो ये धरती तुम्हारे जैसो के वज़न से दब जाएगी। हा…हा…”
“अबे, मेरे जैसे नहीं। हमारे जैसे। तुम भी बराबर की मुफ़्तखोर, वज़नी हमगुनाह हो…हा…हा…”
“वैसे कुछ भी कहो, किसी रेस्टोरेंट में खाने का यह मज़ा तो नहीं ही आता।”
“इसलिए तो तुम्हें ले गया था।” खाली सड़क, कम रौशनी का फ़ायदा उठाते हुए पीछे से मैंने उसे पकड़ा और उसके कान के निचले हिस्से पर ज़हरीला निशान बना डाला।
ये कहानी ‘हंड्रेड डेट्स ‘ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Hundred dates (हंड्रेड डेट्स)
