Hadd Mat Todo
Hadd Mat Todo

Social Hindi Story: शिखा तीन-तीन बार गर्भपात करवाने के बाद चौथी बार फिर से गर्भवती हुई थी।
इस बार भी उसके अंदर एक डर समा गया था, कहीं इस बार भी उसका पति उसका गर्भपात ना करवा दे !!!
उसके तीनों मरी हुई बेटियां सपने में आकर चीख-चीखकर उसकी ममता और अपने न्याय के लिए दुहाई दिया करती थीं।
“हमारी क्या गलती है… जैसे बेटा जन्म लेता है वैसे ही बेटी भी फिर हमें बेमौत क्यों मारा गया!!”
 जब से फिर से डाक्टर ने खुशखबरी सुनाई थी, उसकी नींद उड़ने लगी थी। वह रह रहकर वह सोते में से उठकर बैठ जाती… उसकी छाती की धड़कन बढ़ जाती, कभी उसका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता और कभी शुगर डाउन हो जाता!!
डॉक्टर ने पूरी तरह से एहतिहात बरतने के लिए कहा था “मिस्टर माथुर आपकी पत्नी जेहिनी तौर पर कमजोर हो गई हैं ।उससे ज्यादा मानसिक तौर पर! इस समय उन्हें पूरी देखभाल और मानसिक रूप से सपोर्ट की जरूरत है। तीन तीन बार गर्भपात का दंश झेलना बहुत ही दुखदाई है…!”
“मगर…!”शिखा का पति प्रकाश कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोला ही था कि डॉक्टर मंजूषा ने अपनी आंखें झपकाते हुए कहा
“कितना आपने उन्हें प्रताड़ित किया है इतनी बार गर्भपात कराकर।
आप पैसे वाले हैं किसी को पता नहीं चला। अगर उनका मुंह खुल गया तो आप सीधे सलाखों के पीछे जाएंगे या फिर …!आप समझ रहे हैं ना ?”
“अगर मैं सलाखों के पीछे जाऊंगा तो आप कौन सा बच जाएंगी डॉक्टर साहिबा। हम दोनों ही इस खेल में शामिल हैं ।
बस मुझे लड़की नहीं चाहिए हर हाल में बेटा चाहिए। मैं बेटी एक्सेप्ट ही नहीं कर सकता …!
प्रकाश माथुर पेशे से बिजनेसमैन था। समाज में उसकी अच्छी खासी पैठ थी। अच्छे लोगों से मिलना जुलना, उठना बैठना, भेंट मुलाकात सब कुछ चलता था। लेकिन अंदर से वह एक घटिया किस्म का इंसान था। एक मानसिक रुप से विक्षिप्त…!

शिखा उससे उम्र में बहुत छोटी थी। एक कार्यक्रम में उसे गाते हुए देखकर उसने शिखा के घर शादी का प्रस्ताव भेजा था।
जब शिखा शादी कर उसके घर आई थी तभी उसने पहले  ही अपना जवाब साफ कर लिया था  मुझे बस बेटा चाहिए!

“ बेटा या बेटी यह किसी आदमी के वश का तो नहीं है…, शिखा उसे समझाते समझाते तीन बार प्रेग्नेंट हो चुकी थी और तीन बार अपनी बच्चियों को खो चुकी थी।

प्रकाश समाज का एक रुतबेदार इंसान था। और वह एक गरीब परिवार की। जिसके परिवार को प्रकाश ने शादी के नाम पर खरीद लिया था।
वह भागे भी तो कहां भागे। कई बार उसे लगता कि वह भाग कर अपनी मायके चली जाए या कहीं भी चली जाए… जहां अपने  होने वाले बच्चे को जन्म देकर बच्चे मातृत्व का एहसास तो करे लेकिन उसके हाथ पैर बंधे हुए थे।
वह एक लाचार औरत थी और प्रकाश एक रसूखदार इंसान!! कुछ भी कर सकता था।

शिखा रात भर  करवटें बदलती रही।आज न चाहते हुए भी उसके जेहन में रवींद्र का नाम आ रहा था।
वह उसके कालेज का सहपाठी था।नई नवेली दोस्ती के साथ दोनों के बीच प्यार की कोंपलें फूट रहीं थीं। रवीन्द्र और शिखा दोनों अपने आने वाले भविष्य की प्लानिंग करते। साथ-साथ पढ़ाई भी करते और कालेज के सारे एक्टिविटी में भी भाग लेते।

उस दिन कौन सा मनहूस दिन था जब वह स्टेज में अपनी आवाज में गीत गा रही थी। कई गणमान्य अतिथियों में प्रकाश भी था।
जब तक वह घर पहुंची थी, प्रकाश के घर से शादी का प्रस्ताव आ चुका था।

वह इस बात से पहले तो चौंकी फिर सिहर उठी! क्या वाकई वह इस काबिल है!!
अपने घर वालों के साथ वह भी इस इंद्रजाल में फंस गई थी।
उसके पिता को एकाएक प्रकाश ने कर्जदार से सेठ बना दिया था। उन्हें क्यों एतराज था भला। शादी में एक चौवन्नी का भी खर्च नहीं हुआ था। अपनी शादी का सारा खर्च प्रकाश ने खुद उठाया था।
फिर वह इस घर में आ गई…आते ही उसने अपने ही हाथों अपने पर काट डाले।
प्रकाश को न तो उसका बाहर निकलना पसंद था और न ही किसी पब्लिक समारोह में शामिल होना। उसने उसके किटी पर भी रोक लगा रखा था।

टूटती हुई नींद और बुरे सपने और ख्यालों से जूझने के बाद जब सुबह उसकी नींद टूटी तो प्रकाश उसके सामने खड़ा था।
बहुत प्यार से उसने उसके सिर पर हाथ फेरा
“ क्या हुआ परेशान लग रही हो?”
शिखा के मुंह से आवाज ही नहीं निकली। वह आहत होकर उसकी ओर देखती रही। पहले उसके इन्हीं भावनाओं को उसने अपना प्यार समझ लिया था और वही समझकर उसके आगे निछावर हो गई थी।

शिखा टूटी फूटी आवाज में बोली “रात में बड़े बुरे बुरे ख्याल आते रहे थे। नींद बार बार टूट रही थी।”
“ वह तो टूटेगी  ही,डॉक्टर ने तुमसे क्या कहा था ,तुम अंदर से बहुत कमजोर हो। हमारे होने वाले बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंना चाहिए। बस 15 दिन और। उसके बाद हमें जेंडर का पता लग जाएगा!  आई होप इस बार तुम मेरे वंश चलाने वाले को ही जन्म दोगी। इस खानदान को एक विरासत चाहिए।”
प्रकाश उठकर खड़ा हो गया।
“ लो जूस पियो!” पीछे एक ट्रे में जूस लेकर नौकर हाजिर था।
प्रकाश उसके हाथों में जूस का गिलास देते हुए बोला “तुम्हारी देह में आयरन की बहुत ज्यादा कमी है। इससे इंस्टेंट एनर्जी मिलती है।”
शिखा का मन किया कि उस जूस को प्रकाश के मुंह पर फेंक दे और चिल्ला चिल्ला कर कहे” आयरन की नहीं किस्मत की कमी है !वह भी तुम्हारी बदनीयती के कारण।अपने मानसिक विकृति के कारण।
जबर्दस्ती गर्भपात करवा दिया मेरा जबकि बच्ची बड़ी हो गई थी, सांस ले रही थी !उस सांस को तुमने मेरे पेट से छीन लिया था!!”
लेकिन उसके भीतर बोलने की हिम्मत नहीं थी।
एक तो वह इतनी कमजोर हो चुकी थी कि उसके अंदर की सारी ताकत खत्म ही होती जा रही थी।आने वाले भविष्य की आहट उसे डरा रही थी और दूसरी तरफ उसके खुद के घरवाले बिके हुए थे। प्रकाश के ही पैसों पर राज कर रहे थे।
जैसे जैसे समय आगे जा रहा था शिखा कमजोर होती जा रही थी और उससे भी ज्यादा मानसिक रूप से बीमार।
प्रकाश उसे जेंडर टेस्ट करने के लिए लेकर गया, उस समय उसकी हालत बहुत ही ज्यादा नाजुक थी। अंदर स्ट्रेचर में लेटी हुई वह डॉक्टर के चेहरे को देख रही थी ।
डॉक्टर के चेहरे पर उतार चढ़ाव आते जा रहे थे ।
अंत में वह निराश होकर बोली” इस बार भी बेटी है…प्रकाश मानेगा नहीं एबार्ट करवा ही देगा।”
शिखा का मन  टूट गया। उसका मन कर रहा था कि वह चीख चीखकर, चिल्ला चिल्ला कर भीड़ इकट्ठी करे और कहे देखो इस आदमी को यह अपने ही बच्चे का हत्यारा है!! न जाने से किस बात की चाहत है!
उसने अपनी याचना बड़ी दृष्टि डॉक्टर के चेहरे पर जमा दी और मिन्नतें करते हुए बोली “डॉक्टर मैं अपने बच्ची को नहीं मारना चाहती! प्लीज डॉक्टर ,मैं मां बनकर भी मां नहीं बन सकी हूं।आप ऐसा नहीं कर सकतीं!
डॉक्टर मेरे बच्चे की हत्या मत कीजिए आपको बहुत पाप लगेगा !”
“रिलैक्स शिखा…!, डॉक्टर ने उसकी पीठ थपथपाया।
बाहर निकाल कर डाक्टर ने  प्रकाश को सारी बातें बता दिया।
प्रकाश के चेहरे पर गुस्सा और तनाव साफ दिख रहा था।
उसने अपनी गुस्सैल दृष्टि शिखा पर जमा दिया और  डॉक्टर को हिदायत देकर अकेले ही निकल गया।
“शिखा बहुत कमजोर है प्रकाश अगर इस समय उसे किसी भी तरह की क्षति पहुंचाई गई तो उसके लिए जानलेवा हो सकती है!” डॉक्टर उसे समझाती रही मगर डॉक्टर की बात को इग्नोर कर वह वहां से निकल गया।
डॉक्टर मंजू ने व्यंग दृष्टि से शिखा की ओर देखकर मुस्कुराते हुए  कहा” हम शायद चांद पर पहुंच जाएं और उससे आगे भी मगर यह बेटे वाली समाज की सोच से कभी आगे नहीं बढ़ सकते! पता नहीं किसी वायरस के चपेट में हमारा समाज पड़ा हुआ है! उसे आगे निकलना ही नहीं चाहता!”

“डॉक्टर मैं अपना एबार्शन नहीं कर सकती! शिखा गिड़गिड़ाने लगी।
 डॉक्टर मंजूषा भी प्रकाश की खरीदी हुई डॉक्टर थी।
उसे मुंह मांगी रकम उससे मिल जाती थी तो फिर वह नीति और नैतिकता की बात क्यों करें भला ?
सारे चेकअप करने के बाद डॉक्टर ने शिखा को  ऑपरेशन थिएटर में ले जाने की तैयारी करने लगे कि अचानक ही डॉक्टर का फोन आ गया।
डॉ मंजू किनारे जाकर फोन पर बात करने लगी और शिखा अपनी हिम्मत बटोर कर वहां से भाग निकली।
वह कमजोर थी, चलने की ताकत भी नहीं थी। बैठे-बैठे चक्कर आ रहे थे लेकिन इस समय उस के अंदर बहुत ज्यादा ही एनर्जी आ गई थी।
कोई शक्ति थी जो उसे खींच रही थी। वह भागते-भागते पुलिस स्टेशन पहुंच गई और अंदर जाकर इंस्पेक्टर के आगे कुर्सी पर बैठकर बोलने लगी “इंस्पेक्टर साहब मुझे रिपोर्ट लिखवानी है…मेरा पति मेरे बच्चे की हत्या करना चाहता है!” यह बोलते बोलते वह बेहोश हो गई।
थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया वह अस्पताल में थी।
उसे घेर कर पुलिस के लोग खड़े थे।
“ मेरे बच्चे को तुम लोगों ने मार डाला ना! मार डाला ना !!”वह जोर से चिल्लाने लगी।

“ नहीं मैडम आपके बच्चे को किसी ने नहीं मारा !आप पूरी तरह सेफ हैं ।अब आप हमें बताइए आपके साथ क्या हुआ था!”
प्रकाश माथुर कोई अनजाना नाम नहीं था लेकिन पुलिस महकमे में मानवता की भी कमी नहीं थी।
प्रकाश अपनी पत्नी को ढूंढता हुआ पुलिस स्टेशन आया पर किसी ने नहीं बताया कि उसकी पत्नी उनके कस्टडी में है।

एक महिला पुलिस अधिकारी शिखा को अपने घर ले गई।
“शिखा, तुम यहां पूरी तरह से सुरक्षित हो यहां तक तुम्हारा पति कभी भी नहीं आएगा।”
9 महीने बीते, शिखा ने एक बहुत ही प्यारी बच्ची को जन्म दिया।अपनी फूल सी बच्ची को  शिखा ने अपने गले से लगा लिया “मैडम जी मैं अपनी बच्ची को एक दिन आपकी तरह पुलिस अधिकारी ही बनाऊंगी ताकि यह दुनिया के वहशी लोगों से सुरक्षित रहे।”
इस घटना को 25 साल बीत गए थे।
शिखा की बिटिया ने यूपीएससी पास कर अपना रिकॉर्ड बना लिया था।
अब वह एक आईपीएस अफसर बनने की तैयारी कर रही थी।
शिखा का चेहरा गर्व से भर गया था जब उसकी बिटिया आना ने आकर उसके पांव छूकर आशीर्वाद मांगा था। शिखा उसे गले से लगाकर फूट-फूट कर रो पड़ी।