Hindi Love Story
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Hindi Love Story: “एक्सक्यूज मी!” खनकती हुई सी जनाना आवाज कानों में पड़ते ही अपने डिपार्टमेंटल स्टोर में बैठे आदित्य ने अपना सिर उठाकर सामने देखा तो बस देखता ही रह गया।

सामने तीस साला बला की खूबसूरत औरत खड़ी मुस्कुरा रही थी। उसकी गोद में एक गोल-मटोल छोटा सा बच्चा किलकारियाँ मार रहा था। उस पर नजर पड़ते ही आदित्य जैसे अजीब से रोमांच से भर उठा। उसके सीने में दर्द की एक लहर सी उठी और ऐसा लगा जैसे उसकी जुबान को लकवा मार गया हो। इसी के साथ वह पाँच साल पुरानी यादों में खोता चला गया।

“आज रोज डे पर सब कुछ गुलाबी-गुलाबी हो जाने दो!” कहते हुए आदित्य ने अपनी उंगली रोहिणी के गुलाबी होठों पर फिरानी शुरू कर दी।

इस समय वे आदित्य के दोस्त पंकज के गेस्ट रूम में मौजूद थे और आज वैलेंटाइन डे का पहला दिन खास बनाना चाहते थे।

होठों पर उंगलियाँ फिराते हुए वह खुद भी धीरे-धीरे रोहिणी के और करीब आने लगा।

“यह क्या कर रहे हो आदित्य! हटो, पीछे हटो!” रोहिणी ने उसे हल्का सा धक्का देते हुए कहा तो आदित्य भी बिफर पड़ा।

“यार रोहिणी, हमारे रिलेशन के दो साल गुजर चुके हैं, पर आज तक हमारे बीच वैसा कुछ नहीं हुआ कि लगे कि हम दोनों एक दूसरे को प्यार करते हैं।”

“देखो आदित्य! प्लीज मेरी बात सुनो! शादी के पहले मुझे यह सब बिल्कुल भी पसंद नहीं है।” रोहिणी ने आदित्य को समझाने की कोशिश की लेकिन आदित्य का तो मूड ही खराब हो चुका था।

“कब करेंगे हम शादी? तुमने तो अपने परिवार वालों से बात तक नहीं की और न ही करना चाहती हो। सीधे कह दो, तुम सिर्फ टाइमपास कर रही हो, ओनली टाइमपास।” आदित्य का मूड बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था।

“नहीं आदित्य, नहीं! ऐसी बात नहीं है! तुम आज शाम तक का वक्त दो, मैं घर वालों को किसी भी कीमत पर राजी कर लूँगी और फिर हम कल ही एक हो जाएँगे, हमारा वैलेंटाइन कल मनेगा, पक्का।” रोहिणी ने जैसे ही यह बात कही, आदित्य का गुस्सा जैसे एकदम से काफूर हो गया।

“क्या सच में?” आदित्य बच्चों की तरह चहक उठा।

“हाँ, बिल्कुल, बिल्कुल करूँगी, बस आज शाम तक का वक्त दो।”

और फिर दोनों एक दूसरे के गले लगकर हसीन सपनों में खो गए।

दूसरे दिन आदित्य रोहिणी का इंतजार ही करता रह गया। ना तो उसका फोन लग रहा था और ना उसका कोई अता-पता था।

आज पाँच साल बाद रोहिणी ठीक उसके सामने खड़ी थी।

“तुम्हारे जैसी धोखेबाज, मक्कार लड़की शायद ही कोई हो, छह घंटे का समय लेकर आज तुम छह साल बाद मेरे सामने आ रही हो, अगर तुम्हें यही करना था तो तुमने मुझे झूठी दिलासा क्यों दी? बोलो तुमने ऐसा क्यों किया?” आदित्य का सारा गुबार एक साथ फट पड़ा था।

“आदित्य.. आदित्य प्लीज! मेरी बात तो सुनो! मैं कुछ ऐसी सिचुएशन में फंस गई थी कि… मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती थी, मैं तो तुमसे अभी भी उतना ही प्यार करती हूँ।”

इसी के साथ रोहिणी अपनी आप बीती बताती चली गई….

जैसे ही वह घर पहुँची, उसके पापा, जो कि पहले से ही बीमार चल रहे थे, बुरी तरह दर्द से कराह रहे थे और उनके पास उनके दोस्त का लड़का उन्हें इंजेक्शन पर इंजेक्शन दिए जा रहा था।

“क्या हुआ पापा को?” रोहिणी ने घबरा कर पूछा।

“इन्हें ट्यूमर है, हमें तुरंत इन्हें लेकर बेंगलुरु चलना होगा, क्योंकि इसका इलाज वहीं पॉसिबल है।” रवि ने कहा तो रोहिणी परेशान सी हो गई।

“लेकिन हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं, कहाँ से लाएँगे हम इतने पैसे?”

“तुम चिंता मत करो! अभी अंकल की जान बचानी जरूरी है, मैं अपनी पूरी सेविंग इन्हें बचाने में लगा दूँगा, तुम टेंशन मत लो।”

और इसी के साथ वे बेंगलुरु रवाना हो गए। लगभग महीने भर तक उनका ट्रिटमेंट चला।

डॉक्टर ने भी पूरी कोशिश की लेकिन उन्हें बचाया न जा सका। उन्होंने अंत समय में रवि का हाथ रोहिणी के हाथ में देते हुए कहा था– “रवि बेटे! यह मेरी इकलौती बेटी है, प्लीज इसका ख्याल रखना।”

“मैं कुछ न कह सकी, कहना तो दूर मैं कुछ सोच भी ना सकी। तुम ही बताओ मैं क्या करती?” कहते हुए रोहिणी की आँखों से झर-झर आँसू बहने लगे। उधर दूसरी तरफ आदित्य भी खुद पर काबू न रख सका। उसकी आँखें भी भर आईं। इससे पहले कि वह कुछ बोल पाता, रोहिणी तुरंत बिना कुछ सामान लिए वहाँ से बाहर निकलती चली गई।