Hindi Love Story: नैना की शादी को एक साल होने को आया था। लेकिन इस एक साल में उसे लगने लगा था शायद उसकी और उसके पति की जोड़ी बिल्कुल बेमेल है। उम्र का बहुत ज्यादा अंतर नहीं था दोनों के बीच ,लेकिन नवीन अपने मन की कोई भी बात नैना को कभी नहीं बताते थे। नैना का चुलबुलापन उन्हें अक्सर बचकाना ही लगता था।
नैना को ख़ास दिनों पर सरप्राइज देना,घूमने जाना, खूब सारी बातें करना पसंद था। नैना चाहती थी कभी तो नवीन उसके पास आकर कहें, चलो कहीं घूम कर आते हैं, या यूँ ही पास में बैठ कर नैना को गले लगा लें और अपने मन की ढेर सारी बातें कह डालें।
नैना के शब्दों में समझें तो नवीन बहुत ही बोरिंग इंसान थे। इस एक साल में नैना का जन्मदिन आया, वैलेंटाइन्स डे आया, होली, दिवाली सब आ कर चले गए, लेकिन कभी नवीन ने नैना के सज-संवर के आने के बाद उसकी तारीफ़ नहीं की, ना ही उसे कभी कुछ ख़ास महसूस करवाया।
शादी के एक साल पूरे होने से पहले इस बार नैना ने फिर से उम्मीदें बाँधी शायद नवीन कोई सरप्राइज दें, या उसके लिए एक गुलाब ही ले आएं तो भी उसे सुकून मिले की नवीन उसके साथ खुश हैं। इस एक साल में नवीन ने कभी भी नैना से नहीं कहा की वो उसके साथ खुश हैं। नैना बस नवीन को खुश देखना चाहती थी।

कुछ दिनों बाद वो ख़ास दिन आया जिसका इंतज़ार नैना को काफी समय से था। नैना ने नवीन के लिए एक प्यारा सा सनग्लास खरीदा। उसे लगा आज तो जरूर नवीन उसके लिए एक प्यारा सा तोहफा लाएंगे, उसने मन को समझाया एक गुलाब भी चलेगा।
शाम को तैयार हो कर नैना ने नवीन के आते ही उन्हें आगे बढ़कर गले लगाया और एक बोसा गाल पर रख कर गिफ्ट पैक में लिपटा हुआ सनग्लास पकड़ा दिया। नवीन को नैना का तोहफा बहुत पसंद आया, लेकिन ये क्या नवीन ने तो नैना को एक गुलाब तक नहीं दिया।
नैना ने एक और सरप्राइज नवीन के लिए तैयार रखा था, बैडरूम में आते ही नवीन को फूलों की प्यारी सी खुशबू आई, नवीन ने लाइट जलाई तो देखा पूरा कमरा खूबसूरत फूलों से सजा हुआ था।
नवीन पलट कर बोले नैना कितना खर्चा कर डाला इन फूलों पर, देखो अब सुबह तक तो ये बेकार हो जाएंगे। नवीन के इतना कहते ही नैना का दिल बैठ गया, उसने फीकी मुस्कान से कहा, शगुन के कुछ लिफ़ाफ़े थे बस उसी से मंगवा लिया, ऐसा कुछ ख़ास खर्चा नहीं हुआ।
अगली सुबह से नैना ने खुद को पूरी तरह से बदल लिया। अब ना वो नवीन का खाने पर इंतज़ार करती और ना ही उनसे कुछ उम्मीद लगाती। जब तक नवीन घर पर रहते तब तक वो आराम से घर का काम निपटाती, लेकिन नवीन के ऑफिस जाते ही वो बिस्तर पर जा कर लेट जाती, घंटों उसी बिस्तर से चिपकी रहती। मन में ना जाने कितनी ही बातें चलने लगती,

नैना ने दोस्तों से बात करना बंद कर दिया, बाहर जाने के नाम पर उसे खीझ होने लगती, मजबूरी में ही वो घर से बाहर निकलती थी। नैना ने खुद पर ध्यान देना बिलकुल बंद कर दिया था।
नैना समझ रही थी की वो डिप्रेशन में है, लेकिन चाह कर भी वो कुछ नहीं करना चाहती थी। धीरे धीरे नैना ने लोगों को पहचानना तक बंद कर दिया।
इतना कुछ होने के बाद नवीन को समझ आया की नैना की छोटी-छोटी खुशियों पर उसने कभी ध्यान ही नहीं दिया और आज ये हालात हैं कि नैना उसे तक नहीं पहचान रही थी।
नवीन ने सब कुछ छोड़ कर नैना का ख्याल रखने का फैसला किया। धीरे-धीरे नैना की तबियत में सुधार होने लगा, जब नैना पूरी तरह ठीक हो गयी, तब नवीन ने नैना से कहा।
नैना मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ , लेकिन मुझे प्यार दिखाना बिलकुल नहीं आता। पर अब तुमसे जरूर सीखूंगा, मैं हमेशा इस बात पर यकीन करता था जो मेरा है वो तुम्हारा है, तुम्हे जो चाहिए होगा तुम खुद अपने लिए ले आओगी। लेकिन शायद मै गलत था, कभी-कभी प्यार दिखाना भी जरुरी होता है।
आज से तुम मेरी टीचर और मै तुम्हारा स्टूडेंट। नवीन ने नैना को सीने से लगाया और उसके बालों में ताज़ा खिला हुआ गुलाब लगा कर उसके होंठों को चूम कर शरारती अंदाज़ में नैना के कान में कहा “मैं इतना भी बोरिंग नहीं”।
