चलो बर्गर खाकर आते हैं-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी: Hindi Story
Chalo Burger Khakr Aate Hain

Hindi Story: दोपहर में दोनों सहेलियाँ फिर गप्प का पिटारा लेकर बैठ गई। संजू ने कहना शुरू किया, “मैं दिल लगाकर पढ़ाई करती थी। रात रात भर जागकर परीक्षा की तैयारी करती थी। नम्बर भी बहुत अच्छे आते थे। इसलिए सोचती थी कि पढ़लिखकर अच्छे जॉब करूंगी। तब शादी करूंगी। पर पापा ने अच्छे घर वर देखकर मेरी शादी कर दी और मेरी जिन्दगी ही बदल गई। किताबों से नाता टूट ही गया। जिम्मेदारियों का पहाड़ ऐसा मुझपर पड़ा कि मेरे सारे अरमान उसमें दब गए।”

रीमा ने सिर पर हाथ रखते हुए कहा,” हाय, फिर तू शिकायतों का पुलिंदा खोलकर बैठ गई। तुम्हें अपनी जिंदगी से कितनी शिकायतें हैं ? जबकि एक योग्य पति, प्यारे बच्चे और सुख समृद्धि सब है तुम्हारे पास। जो मिला है उसका आनंद उठाओ न। जो नहीं मिला उसके बारे में सोच सोचकर क्यों दुखी होना ?”

संजू ने हाँ में सिर हिलाते हुए कहा, “मैं भी यही सोचती  हूँ कि जो नहीं मिला उसका गम न करके जो मिला है उसमें खुश रहूँ। पर खाली समय जब काटने को दौड़ता है न, तब उल्टी बातें ही मन में आती हैं।”

रीमा ने मुस्कुरा कर सहेली को एक सलाह दी। उसने कहा,”सुन मेरी बात। ये जो तुम सोचती हो न, ये अतीत की बातें हैं। अभी तुम्हारे क्या अरमान हैं ? जानती हो, छोटी छोटी खुशियों में भी संजीवनी बूटी होती है। इससे हमें नयी जिंदगी मिलती है। तुम आज अपनी एक विश पूरी करके देखो।”

संजू सोच में डूब गई। तभी रीमा ने कहा, “देखो मुझे तो मॉल के मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने जाना है। अब तुम बताओ कि तुम्हारी क्या विश है ?”

संजू के चेहरे पर चमक आ गई। उसने तुरंत कहा, “मुझे मॉल में बर्गर किंग के बर्गर खाने हैं और उसके साथ फ्रेंच फ्राय और कोल्डड्रिंक हो तो क्या कहने ।”

उसके खिले चेहरे देख रीमा ने कहा, “ओहो, तुम्हारे चेहरे पर आए इस रौनक का कोई राज है क्या ?”
थोड़ा सकुचाते हुए संजू ने कहा, “पति मुझे वहीं ले जाते हैं और हम दोनों ढ़ेर सारी प्यार भरी बातें करते हुए बर्गर खाते हैं। आजकल वो इतने व्यस्त हो गए हैं कि हम वहाँ जा ही नहीं पाते। ” कहते हुए वह फिर उदास होने लगी।

“ये हुई न बात। चलो आज हमलोग बर्गर खाकर आते हैं।” रीमा के कहते ही संजू ने पूछा, “और तुम्हारा फिल्म देखने का प्लान ?”

उसने कहा, “फिर कभी। आज तो हम दोनों मॉल घूमेंगे और बर्गर खाएंगे।”

दोनों सहेलियों ने पतियों को मैसेज कर दिया कि वे दो तीन घंटे के लिए घूमने जा रहीं हैं और तैयार होकर निकल पड़ी घूमने।

औरतें घूमने निकलें और शॉपिंग न करें ऐसा मुमकिन ही नहीं है। दोनों ने शॉपिंग भी की और बर्गर खाए। फ्रेंच फ्राय व कोल्डड्रिंक का भी लुत्फ उठाई।

फिर लौट कर घर आ गई। पर साथ में सकारात्मकता की पोटली लाई थी। शिकायतों की पोटली को दूर फेंक कर खुशियों की पोटली क्यों न बाँध ली जाए ? शिकायतों से क्या मिलता है कुछ भी नहीं। सिर्फ उदासीनता फैलती है। उदासीनता जिंदगी को बोझिल बना देती है। जीने के लिए खुश रहना जरूरी है और छोटी छोटी खुशियों में ही जिंदगी की खुशियाँ हैं।

संजू ने सिर्फ एक कदम आगे बढ़ाकर अपार खुशियों को पा लिया था। उसने सोचा कि अब वह फालतू का रोना नहीं रोएगी। ये नहीं मिला वो नहीं मिला। ऐसा कभी नहीं सोचेगी। वह हर पल खुश होकर जीएगी। सहेली ने उसकी छोटी सी विश पूरी करने को प्रेरित किया तो उसे कितनी प्रसन्नता हो रही है। अब ऐसे ही वह अपनी विश पूरी करके संतुष्ट होगी।  उसकी इन छोटी छोटी खुशियों से किसी का नुकसान भी नहीं हुआ। पतिदेव का पॉकेट थोड़ा ढीला होगा। इतना तो पत्नियों का अधिकार है।

उसने रीमा को थैंक्यू कहा तो उसने फिल्मी स्टाइल में कहा, “दोस्ती में सॉरी और थैंक्यू नहीं चलता यार।”
दोनों औरतें ठहाका लगाकर हँस पड़ीं।

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