Short Story: मुझे आज भी याद है,जब मेरे छोटे भाई का जन्म हुआ था तो उसके नामकरण के अवसर पर घर आये रिश्तेदारों ने क्यूंकि अनूपशहर (छोटी काशी) हमारे काफी करीब पड़ती है तो नामकरण के बाद कुछ रिश्तेदारो ने ननिहाल तरफ के जो थे उन्होंने गंगा जी नहाने का प्रोग्राम बनाया।घर में पापा जी से कहकर वह मुझे भी अपने साथ अनूपशहर गंगा जी ले गये। हालांकि पहले पापा जी ने मना किया था पर मैं भी जाने की जिद करने लगी तो मामा जी अपने साथ पापाजी को मना कर मुझे गंगा जी ले गये ये कहकर कि वो मेरा अच्छे से ध्यान रखेंगे और लौटते समय मुझे घर छोड़ देंगे। पापा जी ने भी मन ना होते हुए भी मुझे उनके साथ भेज दिया।
जल्दी सब गंगा जी के किनारे पहुंच गए। गंगा जी का बहाव बहुत तेज था तो मुझे मौसी जी ने सबसे पहले नहला धुलाकर एक तरफ खड़ा कर दिया और कहा अब पानी में मत आना नहीं तो रेत में तेरी फ्रॉक गंदी हो जाएगी। मैं थोड़ी देर तो शांति से खड़ी रही लेकिन जैसे ही लोग पानी में कूद कर नहाने जाते थे मेरा मन भी बार-बार पानी में जाने को करने लगा। सभी 1, 2, 3, बोलकर पानी में कूद रहे थे और नहाने का आनंद ले रहे थे।
मैं आवाज लगाकर सभी से कहने लगी मुझे भी पानी में जाना है मुझे पानी में फेंक दो, मुझे पानी में फेंक दो पर किसी ने मेरी बात नहीं सुनी और सभी मेरी नादानी पर हंसने लगे।
मैं भी थोड़ी देर में ऊंचे से पत्थर पर चढ़ी और 1,2,3, बोलकर गंगा जी में कूद गई। मेरा गंगा जी में कूदना था कि मैं तेज बहाव के साथ बहने लगी सारे रिश्तेदारों में और कोहराम मच गया। मामा जी के हाथ पैर फूल गए कि वो पापा जी से बोल कर आए थे कि मुझे सही सलामत घर छोड़ देंगे। फिर क्या था जिन रिश्तेदारों को तैरना भी नहीं आता था मौसा जी मामा जी वगैरह कई लोग मुझे बचाने गंगा जी में कूद गए।
तभी वहां किनारे खड़े गोताखोरों ने मौसा जी और मामा जी को बचा लिया, पर मैं तेज बहाव के साथ गंगा की तेज धारा में बहने लगी।
काफी देर के बाद मैं गोताखोरों के हाथ लगी और किसी तरह बच पाई। आज भी जब इस बात का जिक्र आता है तो मैं सोचने लगती हूं कि क्या मैं भी बचपन में इतनी शैतान और नादान थी, और मेरे गाल शर्म से लाल हो जाते हैं।
Also read: आम की चोरी-जब मैं छोटा बच्चा था
