Story for Kids: जब मैं कक्षा दो में पढती थी, मेरे एक रिश्तेदार मुझे एक चवन्नी ( पच्चीस पैसे का सिक्का) दे गये। मैंने वो पैसे मम्मी को बिना बताये चुपचाप स्कूल बैग में रख लिये।
डर और उत्तेजना के कारण रात भर नींद भी नहीं आई।
दूसरे दिन मैंने स्कूल में एक आना ( छह पैसे ) में कुछ सामान खरीदा। उतना सब अकेले न तो मैं खा सकती थी और डर के कारण न किसी को दे सकती थी। इसलिये मैंने बचा सामान और उन्नीस पैसे बैग में रख लिये।
चू्ॅकि मुझे यह सब करने में थोड़ी देर लग गई तब तक मेरा पड़ोसी लड़का मुन्ना जो मेरे साथ पढता था, ने घर आकर जिद मचा दी कि आज चाची ने बीनू को पैसे दिये हैं, मुझे भी चाहिये।
उस समय का अलिखित नियम था कि बच्चों को पैसे नहीं दिये जाते थे तो चाची ने तुरन्त घर आकर मम्मी से पूॅछा।
मेरे घर आते ही मम्मी ने मेरे हाथ से बैग ले लिया, बैग में सारे प्रमाण थे ही।
मैं डर के कारण उल्टा सीधा बता रही थी और मम्मी का गुस्सा बढता जा रहा था। एक थप्पड़ में ही सच्चाई बता दी। गुस्से में मम्मी ने मुझे तीन – चार छड़ी जमा दी। उनका कहना था कि बिना मुझसे पूॅछे चुपचाप पैसे रख लेना चोरी है। इसलिये तुम चोर हो ।
उस मार और दहशत ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मुझे बुखार आना शुरू हो गया जो ठीक ही नहीं हो रहा था। तभी मेरे नाना जी की मृत्यु हो गई, मम्मी मुझे और छोटी बहन को लेकर मायके आ गईं।
मेरे नानाजी संयुक्त परिवार में सबसे बड़े थे और मेरी मम्मी के सात चाचा थे । चूॅकि मुझे बुखार आ रहा था तो जब मेरी एक नानी मुझे गीले कपड़े से स्पंज देने के साथ कपड़े बदलाने लगीं।उन्हें मेरी पीठ और कमर पर छड़ी के नीले निशान दिख गये। वो और दूसरी नानियॉ बार बार मुझसे पूॅछने लगीं कि ये निशान कैसे हैं? मैं चुप थी।
मुझे लगता था कि मैंने चोरी की है इसलिये मम्मी ने मारा है और सब लोग जान जायेंगे तो मुझे चोर समझेंगे। मैंने उनसे कहा कि मैं गिर पड़ी थी लेकिन उन लोगों की अनुभवी ऑखों ने असलियत समझ ली।
मेरी नानियॉ क्रोध से आग बबूला हो रही थीं। उन लोगों ने पहले तो मेरे सभी नानाओं को बुलाया, फिर मम्मी को। मेरी पीठ दिखाते हुये कहा उन्होंने –
” यह देखो बिट्टन की करतूत। क्या ऐसे मारा जाता है बच्चों को? बिल्कुल चाण्डालिन हो गई है। इसी कारण तो लड़की का बुखार जा नहीं रहा है।”
सबके बीच में मम्मी अपराधी की तरह खड़ी थीं और सारे घर वाले उन्हें डॉट रहे थे। मेरी नानियॉ मम्मी से इतना नाराज हो गईं कि बहुत दिन तक मम्मी को मुझे छूने तक नहीं दिया।
बाद में मेरी नानी लोग अपने बच्चों को डराते हुये कहा करती थीं कि तुम लोगों को बिट्टन दीदी के घर भेज दूंगी जो चवन्नी के कारण इतना पीटती है कि महीनों बुखार आता है।
” चोरी “-जब मैं छोटा बच्चा था
