भारत कथा माला
उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़ साधुओं और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं
Lok Katha: पुराने समय की घटना है। एक दिन राजा हीराखान बिंझाझोरी नाम के जंगल में शिकार करने गए। उन्हें वाराह (जंगली शूकर) दिखाई दिया। उसका शिकार करने का मन बना, राजा उसका पीछा करने लगा।
कुछ समय बाद राजा अपने साथियों से बहुत आगे निकल गया। दूर जंगल में राजा को एक तालाब दिखा। शाम हो गयी थी। राजा को थकान महसूस हो रही थी और प्यास भी लग रही थी। वह घोड़े से उतर पड़ा, अस्त्र-शस्त्र तथा राजसी पोशाक किनारे रखकर नहाने लगा।
निकट ही एक झाड़ पर दो शिकारी जो आपस में मामा-भांजा भी थे, छिपे हुए थे ताकि तालाब में पानी पीने आए हुए पशु को मार सकें। राजा के नहाने से हुई छप-छप की आवाज से दोनों ने समझा, कोई पशु है। उन्होंने धनुष पर बाण धर, निशाना साधकर बाण छोड़ दिया। तालाब में नहाता राजा कुछ समझ सके इसके पहले ही बाण ने उसे बेध दिया। राजा के मुँह से चीख निकली और उसी समय उसके प्राण-पखेरू उड़ गए।
अनजाने में शिकार करते हुए राजा को बाणों से बींध देने के कारण मामा-भांजे और उनके वंशज बिंझवार या बिंझिया कहलाए। बिंझवार जनजाति अपने अचूक निशाने के लिए प्रसिद्ध रही है। बिंझवार अब भी तीर को अपना जातीय पहचान चिन्ह मानते हैं। वे तीर ही हस्ताक्षर के स्थान पर अंकित करते हैं। विवाह योग्य कन्या को वर न मिले तो प्रतीक रूप से तीर को स्वामी (पति) मानकर तीर के साथ उसका विवाह कर दिया जाता है।
भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’
