dhoort naee story in Hindi : बादशाह अकबर के दरबार में नौ प्रसिद्ध विद्वान थे। इनमें बीरबल सबसे अधिक विनोदी थे। वे गजब के हाजिरजवाब थे।
इसी कारण अकबर उन्हें सबसे ज्यादा चाहते थे। कुछ लोग ऐसे भी थे, जो बीरबल की प्रसिद्धि से परेशान रहते थे। वे किसी-न-किसी तरह बीरबल को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे।
एक बार उनमें से किसी ने बीरबल की जान लेने का षड्यंत्र रचा। इस काम के लिए वे बादशाह के नाई के पास गए। उन्होंने नाई से कहा, ‘हज्जाम साहब, हमें आपकी मदद की आवश्यकता है। आप हमारी थोड़ी मदद कर दें। हम आपको सोने से भरी थैली देंगे।’
दूसरे दिन सुबह-सुबह नाई अकबर बादशाह की हजामत बनाने पहुँचा। बादशाह आराम से बैठे थे।
मौका देखकर नाई ने बादशाह से कहा, ‘जहाँपनाह मैं सोचता
बादशाह ने पूछा, ‘हाँ-हाँ बोलो। क्या सोचते हो? बेहिचक बोलो।’
नाई बोला, ‘जहाँपनाह, यह कितनी बुरी बात है कि आप अपने पुरखों के लिए कुछ भी नहीं करते।’
इस पर बादशाह अकबर ने कहा, ‘पर वे तो कभी के गुजर चुके। मैं उनके लिए क्या कर सकता हूँ?’
नाई ने धूर्तता के साथ उत्तर दिया, ‘जहाँपनाह, किसी को स्वर्ग भेजकर अपने पुरखों के बारे में पता तो कीजिए कि वे किस हाल में हैं?’
बादशाह बोले, ‘तुम्हारी बात तो ठीक है। लेकिन वहाँ जाएगा कौन? और उसे भेजा कैसे जाएगा?’
नाई ने बताया कि शहर से बाहर खुली जगह पर एक विशाल चिता बनाई जाए और किसी जिम्मेदार व्यक्ति को उसमें बैठाकर आग लगा दी जाए। आग की लपटों के साथ वह आदमी सीधा स्वर्ग पहुँच जाएगा। उसने यह भी बताया कि सबसे जिम्मेदार और होशियार आदमी केवल बीरबल है।
बादशाह अकबर नाई की धूर्तता को समझ गए। किंतु उन्हें बीरबल की समझदारी पर पूरा भरोसा था। शाम को उन्होंने बीरबल को बुलाया और कहा, ‘बीरबल, तुम स्वर्ग में जाकर पता लगाओ कि हमारे पुरखों को किसी चीज की कमी तो नहीं है।’
बीरबल ने हँसते हुए कहा, ‘जहाँपनाह, यह विचार तो गजब का है, किंतु आपको सूझा कैसे?’
बादशाह बोले, ‘बीरबल यह विचार हमें नहीं सूझा। हमारे नाई ने हमें सुझाया है।’
बीरबल ने कहा, ‘जहाँपनाह, मैं स्वर्ग जाने के लिए तैयार हूँ। किंतु जाने से पहले मुझे अपने परिवार का प्रबंध करना होगा। इसलिए मुझे कुछ दिनों की छुट्टी दी जाए।’
बादशाह बोले, ‘ठीक है, तब तक चिता बनाने की तैयारी की जाए।’
निश्चित तिथि पर बीरबल को स्वर्ग जाते हुए देखने के लिए भारी संख्या में लोग चिता के पास एकत्र हो गए। चिता जलनी शुरू हुई तो बीरबल के मित्र आँसू बहाने लगे। किंतु उनके दुश्मन खुशियाँ मना रहे थे।
बीरबल ने अपने बचाव के लिए पहले से ही एक सुरंग अपने घर तक बनवा ली थी। वे आग जलते ही सुरंग के रास्ते से अपने घर पहुंच गए।
तीन महीने बाद वे दरबार में हाजिर हुए। दरबार में उन्हें किसी ने भी नहीं पहचाना। पर बादशाह अकबर उन्हें देखते ही पहचान गए। बीरबल ने सबको चकित करते हए कहा, ‘जहाँपनाह, मैं सीधा स्वर्ग से चला आ रहा हूँ। आपके पुरखे वहाँ सुख-चैन से हैं। उन्हें केवल एक चीज की कमी है। वहाँ कोई अच्छा नाई नहीं है। इसी कारण मेरे भी बाल कितने अधिक बढ़ गए हैं। कृपया तुरंत एक अच्छा नाई वहाँ भेजा जाए।’
बादशाह ने पूछा, ‘पर कौन से नाई को वहाँ भेजा जाए?’
बीरबल ने उत्तर दिया, ‘अरे वही, आपका शाही हज्जाम। आपके अब्बा हुजूर को भी वह बड़ा पसंद था।’
बादशाह ने कहा, ‘हाँ, बीरबल, तुम ठीक कहते हो। हम उसी को भेजेंगे।’
हुक्मनामा मिलते ही नाई उन दरबारियों के पास गया, जिन्होंने षड्यंत्र रचा था। किंतु उनमें से किसी ने भी उसकी मदद नहीं की। नाई समझ गया कि वह फंस गया है। वह तुरंत वहाँ से भाग गया और फिर कभी लौटकर नहीं आया।
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