akbar birbal chor ki lakdi
chor ki lakdi

Chor ki Lakdi Storyin Hindi : एक बार दिल्ली का एक धनी व्यापारी बीरबल के पास आया। वह बहुत परेशान था। उसने बीरबल से कहा, ‘हुजूर! मेरे रुपयों की थैली चोरी हो गई है। उसमें मेरी सारी पूँजी थी। कृपया चोर को पकड़ने में मेरी सहायता कीजिए।’

बीरबल ने उसकी सारी बात ध्यान से सुनी और कहा, ‘हम तुम्हारी सहायता पूरी तरह करेंगे। पहले यह बताओ, तुम्हें किसी पर शक है?’

इस पर व्यापारी ने बताया, ‘मेरे खयाल से यह काम मेरे एक नौकर का है। लेकिन मेरे पास कोई प्रमाण नहीं है। प्रमाण के बिना क्या किया जा सकता है?’

बीरबल ने थोड़ी देर विचार किया फिर बोले, ‘देखो, यदि यह काम किसी नौकर का है तो उसे पकड़ना मुश्किल नहीं है। ऐसा करो, तुम अपने सभी नौकरों को लेकर कल मेरे पास आओ। तब तुम्हारी समस्या का समाधान सोचेंगे।’

दूसरे दिन व्यापारी अपने सात नौकरों के साथ बीरबल के घर पहुँचा। बीरबल बाहर आए। उनके हाथ में लकड़ियों के कुछ टुकड़े थे। उन्होंने नौकरों से कहा, ‘देखो, चोर का पता लगाने के लिए ये लकड़ियाँ मुझे एक जादूगर ने दी हैं। इनमें से किसी लकड़ी को चोर छू ले तो वह रातों-रात एक इंच बढ़ जाएगी।’

इसके बाद बीरबल ने हर नौकर को एक-एक लकड़ी दे दी। उन्होंने कहा, ‘तुम सबको अलग-अलग कोठरियों में ठहराया जाएगा। सुबह सवेरे पता लग जाएगा कि चोर कौन है?’

नौकरों को उनकी कोठरियाँ बता दी गईं।

सारी रात वे अलग-अलग कोठरी में रहे। दिन निकलने पर उन सबको बीरबल के सामने लाया गया।

बीरबल ने उनकी ओर देखा और आदेश दिया, ‘एक-एक करके सारी लकड़ियों को नापा जाए।’ ।

तभी सिपाही ने बताया, ‘हुजूर, यह लकड़ी एक इंच छोटी है।’

बीरबल ने आदेश दिया, ‘वह आदमी चोर है। उसे गिरफ्तार कर लो।’

उस आदमी को पकड़ लिया गया। व्यापारी ने आश्चर्य के साथ बीरबल से पूछा, ‘लेकिन हुजूर! कल तो आपने फरमाया था कि लकड़ी रात-भर में एक इंच बढ़ जाएगी!’

‘हाँ, मैंने ऐसा कहा था। क्योंकि मैंने ऐसा कहा था, इसलिए असली चोर ने लकड़ी को एक इंच काट दिया। बिल्कुल वैसा ही, जैसा मैंने सोचा था।’

बीरबल की बुद्धिमानी के कारण चोर को जेल की हवा खानी पड़ी और व्यापारी को उसकी खोई हुई थैली मिल गई।

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