मैं छह सात साल का था। मेरे पापा को खाने के साथ अदरक धनिये की चटनी बहुत पसंद थी। एक दिन भी अगर मम्मी चटनी नहीं बना पाती तो पापा सारा घर सर पर उठा लेते थे और मम्मी को डांटते हुए कहते, ‘तुम्हारे पास इतना भी समय नहीं रहता कि तुम चटनी बना सको, तुम्हें मालूम है कि मैं चटनी के बिना खाना नहीं खाता। एक दिन की बात है, मम्मी पापा के लिए चटनी बना रही थी कि तभी पड़ोस से चोपड़ा आंटी आई, उन्हें शायद मम्मी से कुछ काम था। उन्होंने मुझसे पूछा, ‘अमित बेटा, तुम्हारी मम्मी क्या कर रही हैं।मुझे कुछ समझ में नहीं आया, मैं तपाक से बोल पड़ा, ‘आंटी मम्मी पापा की चटनी बना रही हैं। मेरी बात सुन कर मम्मी भीतर आईं, फिर दोनों जोर-जोर से हंस पड़ीं। मम्मी ने जब पापा को यह बात बताई तो पापा भी जोरों से हंस पड़े थे। पापा भी आज तक उस बात को नहीं भूल पाए हैं और जब भी चटनी देखते हैं तो हंसते हुए कहते हैं, ‘बेटा, तुम तो मम्मी से मेरी चटनी ही बनवाते थे, याद है न, वह दिन। 

 

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