बात मेरी शादी के कुछ समय बाद की है। उन दिनों बारिश का मौसम था। बारिश की वजह से सीढिय़ों में बहुत फिसलन हो गई थी। मैं छत पर सूखे कपड़े उठाने गई तो पीछे-पीछे मेरे पति भी आ गए। तभी उन्हें कोई काम याद आ गया तो वह बोले, ‘मैं नीचे जा रहा हूं, अभी आता हूं। काफी देर के बाद जब पतिदेव नहीं आए तो मैं कपड़े उठाकर नीचे आ गई। नीचे आकर देखा, वह आराम से मैगजीन पढ़ रहे हैं। उन्हें देखकर मैं खीझकर तपाक से बोली, ‘देखो, मैंने सारे कपड़े, उतार भी लिए, लेकिन आप नहीं आए। यह सुनकर मेरी सास व ससुर हंस पड़े। अपनी बात का अर्थ समझते ही मैं शर्म से लाल हो गई।

 

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