World Elder Abuse Awareness Day
World Elder Abuse Awareness Day

Overview:

भारत ही नहीं दुनियाभर में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार और उपेक्षा के मामले बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि बुजुर्ग लगातार डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। उन्हें लगने लगता है कि किसी को भी उनकी जरूरत नहीं है।

World Elder Abuse Awareness Day: बुजुर्ग क्यों हो रहे हैं डिप्रेशन का शिकार, कहीं कारण हम तो नहीं। करियर की दौड़, जिंदगी को बेहतर बनाने की होड़, सुख-सुविधाएं जुटाने की कोशिशों में कहीं बुजुर्गों का साथ आप पीछे तो नहीं छोड़ आए हैं। भारत ही नहीं दुनियाभर में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार और उपेक्षा के मामले बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि बुजुर्ग लगातार डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। उन्हें लगने लगता है कि किसी को भी उनकी जरूरत नहीं है। उनसे कोई बात नहीं करना चाहता है, वे परिवार पर बोझ हैं। बुजुर्गों को इसी तनाव से दूर ले जाने के उद्देश्य से हर साल 15 जून को वर्ल्ड एल्डर एब्यूज अवेयरनेस डे मनाया जाता है।

इसलिए मनाया जाता है यह खास दिन

वर्ल्ड एल्डर एब्यूज अवेयरनेस डे का उद्देश्य दुनियाभर के बुजुर्ग समुदाय को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना है।
World Elder Abuse Awareness Day aims to focus attention on issues affecting the elderly community around the world.

वर्ल्ड एल्डर एब्यूज अवेयरनेस डे का उद्देश्य दुनियाभर के बुजुर्ग समुदाय को प्रभावित करने वाले  सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना है। इस साल की थीम है,  “क्लोजिंग द सर्कल: एड्रेसिंग जेंडर-बेस्ड वायलेंस इन ओल्ड एज पॉलिसी, लॉ एंड एविडेंस-बेस्ड रिस्पॉन्स”। यानी लोगों को पास लाएं, बुजुर्गों को उनके अधिकारों की जानकारी दें, जिससे वे अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कर सकें।

भारत में बुजुर्गों की स्थिति

एक सर्वे के अनुसार भारत में करीब 34.4 प्रतिशत बुजुर्ग डिप्रेशन के शिकार हैं। कोरोना काल में यह परेशानी और भी ज्यादा बढ़ गई। विभिन्न स्टडी बताती हैं कि बुजुर्गों में डिप्रेशन के तीन प्रमुख कारण हैं। जिसमें खराब सेहत, समाज से कट जाना और अकेलापन महसूस करना है। ऐसे में जरूरी है कि समय से बुजुर्गों के इस अवसाद को पहचाना जाए और इससे उबरने में पूरा परिवार उनकी मदद करे। अध्ययन बताते हैं कि ऐसे कई संकेत हैं, जिनसे हम बुजुर्गों के डिप्रेशन को पहचान सकते हैं। जैसे उदास रहना, ऊर्जा की कमी, कम बोलना आदि। इसके अलावा भी कई और लक्षणों से आप बुजुर्गों के डिप्रेशन का पता लगा सकते हैं।

घबराहट महसूस होना

बढ़ती उम्र के साथ इंसान का सोशल सर्कल कम होता चला जाता है। रिटायरमेंट के बाद इसका असर और ज्यादा होता है, लोगों से मिलना जुलना कम होता है और बुजुर्ग अधिकांश समय घर में बिताने लगते हैं। इसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। अवसाद के शिकार अधिकांश बुजुर्ग अक्सर घबराहट महसूस करते हैं। वह हर छोटी बात को लेकर भी चिंता करते हैं। कई बार इस कारण वे अनिद्रा और थकान के शिकार हो जाते हैं। कई बुजुर्गों को रात में नींद नहीं आती है। ये सभी अवसाद के लक्षण हैं। ऐसे कोशिश करें कि बुजुर्गों का सोशल सर्कल मेंटेन रहे। जहां वे हंस बोला सकें, अपनी दिल की बातें शेयर कर सकें।

चिड़चिड़ा होना

वृद्धावस्था में कई बार लोग चिड़चिड़े रहने लगते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे शारीरिक क्षमताएं कम हो जाना, दिल की बात शेयर न कर पाना, रुटीन लाइफ में बदलाव होना आदि। लेकिन यह परिवार की जिम्मेदारी है कि वे इस बात को समझें​ कि बुढ़ापे के कारण बुजुर्गों को वो कई काम छोड़ने पड़ते हैं, जो वे सालों से कर रहे होते हैं। ऐसे में कई बार वे चिड़चिड़े हो जाते हैं। अगर यह झुंझलाहट और चिड़चिड़ाहट बहुत ज्यादा है तो परिवार को चिकित्सकों से संपर्क करना चाहिए।

भूख न लगना

भूख और तनाव का गहरा संबंध है। अगर बुजुर्गों ने खाना बहुत कम खाना शुरू कर दिया है। या फिर अचानक उनकी भूख बहुत ज्यादा बढ़ गई है। ये दोनों ही लक्षण डिप्रेशन की ओर इशारा करते हैं। ऐसे में संतुलित आहार की ओर उन्हें ले जाने की कोशिश करें। कोशिश करें कि परिवार के बड़े बुजुर्गों की पसंद के खाने का भी ध्यान रखें। कभी—कभी छोटी सी आउटिंग और ईटिंग से उनका दिन बदलने की कोशिश करें।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...