बुजुर्गों के साथ पहाड़ी इलाकों में ट्रेवल के दौरान बरतें जरूरी सावधानियां: Travel Tips
Traveling with the elderly in hilly areas

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फोटोग्राफी का इतिहास सदियों पुराना है। वर्ल्ड फोटोग्राफी डे की शुरुआत साल 1837 में फ्रांस से हुई थी। 19 अगस्त, 1837 को फ्रांस के दो शख्स लुइस डॉगेर और जोसेफ नाइसफोर ने इसकी शुरुआत की थी।

World Photography Day: कहते हैं एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है। शायद यही कारण है कि तस्वीरें हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा हैं। ये बीते हुए कल की सुनहरी यादें हैं। यादें जो हमारे दिल के कोने में कहीं दब जाती हैं, वो तस्वीरों से फिर ताजा हो जाती हैं। तस्वीरों के इसी महत्व को दुनियाभर के लोगों को समझाने और बताने के लिए हर साल 19 अगस्त को मनाया जाता है वर्ल्ड फोटोग्राफी डे यानी विश्व फोटोग्राफी दिवस। कैसे हुई इस खास दिन की शुरुआत और क्यों है फोटो हमारी जिंदगी में जरूरी, आइए जानते हैं।

World Photography Day-फोटोग्राफी का इतिहास सदियों पुराना है। वर्ल्ड फोटोग्राफी डे की शुरुआत साल 1837 में फ्रांस से हुई थी।
The history of photography is centuries old. World Photography Day started in France in the year 1837.

फोटोग्राफी का इतिहास सदियों पुराना है। वर्ल्ड फोटोग्राफी डे की शुरुआत साल 1837 में फ्रांस से हुई थी। 19 अगस्त, 1837 को फ्रांस के दो शख्स लुइस डॉगेर और जोसेफ नाइसफोर ने इसकी शुरुआत की थी। तत्कालीन सरकार ने भी इस दिन की अहमियत को समझा और 19 अगस्त को वर्ल्ड फोटोग्राफी डे के रूप में मनाने की घोषणा की। तभी से हर साल यह दिन दुनियाभर के लोग पूरे उत्साह के साथ सेलिब्रेट करते हैं। हर साल इस डे की एक खास थीम रखी जाती है। साल 2024 में वर्ल्ड फोटोग्राफी डे की थीम रखी गई है ‘एन एनटायर डे’ यानी यह पूरा दिन आप फोटोग्राफी को समर्पित करें।

जिंदगी में तस्वीरों का होना बेहद जरूरी है। यह मेंटल हेल्थ के लिए अच्छी मानी जाती हैं।
It is very important to have photographs in life. They are considered good for mental health.

जिंदगी में तस्वीरों का होना बेहद जरूरी है। यह मेंटल हेल्थ के लिए अच्छी मानी जाती हैं। खासतौर पर बुजुर्गों और बच्चों के लिए फोटोज किसी हेल्थ टॉनिक जैसा काम करती हैं। क्या हैं तस्वीरों का दिमाग से कनेक्शन आइए जानते हैं।

1. शोध बताते हैं कि जब आप घर में फैमिली फोटोज लगाते हैं तो बच्चों और बुजुर्गों दोनों का आत्मविश्वास बढ़ता है। यह मेंटल हेल्थ के लिए एक पॉजिटिव माहौल बनाता है। इससे बच्चों और बुजुर्गों को महसूस होता है कि वे अकेले नहीं हैं। उन्हें आत्मसम्मान का एहसास होता है कि वे एक सशक्त परिवार का हिस्सा हैं।  

2. तस्वीरें बदलाव की निशानी होती हैं। इससे बुजुर्गों और बच्चों को पता चलता है कि समय के साथ उनके जीवन में क्या बदलाव आए हैं। इससे उनमें सुरक्षा की भावना भी पैदा होती है। शोध बताते हैं कि जिन घरों में फैमिली फोटोग्राफ लगी रहती है, वहां के बच्चों का अपने फैमिली मेंबर्स के साथ बॉन्ड अच्छा होता है। इतना ही नहीं ऐसे बच्चे भविष्य में भी अपने रिश्ते को लेकर सजग रहते हैं।

3. घर में लगी तस्वीरें बुजुर्गों पर सकारात्मक असर करती हैं। ये थेरेपी की तरह काम करती हैं। शोध बताते हैं कि जो बुजुर्ग पुरानी तस्वीरें देखते हैं उन्हें अल्जाइमर जैसे रोग कम होते हैं। वे अपनी यादों को आसानी से रिकॉल करते हैं। साथ ही अपने अतीत और भविष्य को लेकर निश्चिंत होते हैं। ऐसे बुजुर्गों का सोशल बिहेवियर अच्छा होता है। मेमोरी इंप्रूव होती है और समन्वय बढ़ता है।

4. तस्वीरें तनाव कम करने का काम करती हैं। ये आपके दिल को खुश करती हैं। इससे आपकी यादें ताजा होती हैं और कुछ पल के लिए ही सही लेकिन आप अच्छा महसूस करते हैं।  

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...