बच्चियों की किशोरावस्था में इन चीजों को न करें नजरअंदाज: Women's Health Care
Women's Health Care

Women’s Health Care: जिंदगी के उतार-चढ़ाव में महिलाएं न जाने कितनी स्त्रीजनित (गाइनोलाॅजिकल) समस्याओं का सामना करती हैं। बच्चियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तो किशोरावस्था से ही शुरू हो जाती हैं। लेकिन शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा। जैसी धारणा के चलते अक्सर उनकी अनदेखी की जाती है। लेकिन कई बार यही छोटी-छोटी समस्याएं आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले लेती हैं। युवा अवस्था में इस तरह की किसी भी बीमारी का खामियाजा न भुगते उसके लिए माओं को बच्चियों की छोटी-छोटी गाइनोलाॅजिकल समस्या का ध्यान रखते हुए सही समय पर उसका इलाज करना चाहिए।

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Women’s Health Care:पीरियड्स के दौरान तेज दर्द

पीरियड्स के दौरान यूटरस के सिकुड़ने और रक्त बाहर आने से छोटी उम्र से ही कई महिलाओं को पेल्विक एरिया या पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द रहता है। इसे डिस्मोनेरिया कहा जाता है।

खतरा

ध्यान न देने पर युवावस्था में दर्द और बढ जाता है और कई महिलाएं तकरीबन 10-12 दिन तक लगातार असहनीय दर्द झेलती हैं। उन्हें पीरियड्स से 3-4 दिन पहले ही तेज दर्द शुरू हो जाता है और बाद में 3-4 दिन तक रहता है। पेल्विक हिस्से में सूजन, भारीपन महसूस होता है। शारीरिक संबंध बनाने के दौरान काफी दर्द रहता है। यह गंभीर एंडोेमेट्रिओसिस बीमारीे का संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसमें पीरियड्स में निकलने वाले रक्त का कुछ हिस्सा यूटरस के आसपास जमा होता रहता है और चॉकलेट सिस्ट (गांठ) का रूप ले लेते हैं। धीरे-धीरे एंडोमीट्रीमा गांठें पेल्विक एरिया और ओवरी के आसपास भी बनने लगती हैं। महिला को शारीरिक संबंध बनाने के दौरान काफी दर्द रहता है जिससे वो घबरा जाती हैं और सेक्स से बचने लगती हैं।

सावधानी

अगर दर्द डेली रूटीन के कार्यो में बाधा डाल रहा है, बर्दाश्त से बाहर होे, तो महिलाओं को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। डाॅक्टर को कंसल्ट करके मेप्टाॅल स्पास या डाॅट-इन जैसी मेडिसिन जरूर लेनी चाहिए। ये मेडिसिन यूटरस की मसल्स केा रिलेक्स कर परेशानियां कम करती हैं। पेल्विक एरिया में दर्द होने पर महिलाओं को जल्द से जल्द डाॅक्टर को कंसल्ट करना चाहिए। लेप्रोस्कोपी के जरिये चॉकलेट सिस्ट के थक्कों को इन्फ्यूजन कोट्टरी से जलाकर साफ कर दिया जाता है या सर्जरी करके हटाया जाता है।

पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याएं

कई महिलाओं को माहवारी के दौरान ब्लीडिंग बहुत ज्यादा दिनों (8 से 9 दिन) तक रहती है। पीरियड टाइम पर नहीं आते, बढ-घट कर आते हैं या फिर कभी-कभी कुछ समय के लिए बंद भी हो जाते हैं। मासिक चक्र 25-28 दिन में आने के बजाय 21 दिन या 3 सप्ताह से पहले आने लगता है। 12-13 साल की उम्र में लड़कियों को पहली महावारी में रक्तस्राव बहुत ज्यादा हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है कि शुरुआत में 1-2 साल तक ओवरी में एग-फाॅर्मेशन या एग-रिलीज नहीं होता। केवल रक्तस्राव होता है। इसलिए शुरू में ब्लीडिंग ज्यादा होती है। इसके साथ ही इनमें मासिक धर्म चक्र में अनियमितता देखने को मिलती है।

नार्मल मासिक धर्म चक्र जहां 25-28 दिन का होता है, वहीं इस उम्र में कभी पीरियड्स 3-4 महीने में या फिर 15 दिन में भी आ जाते हैं। लेकिन युवावस्था में यह फ्रायब्राॅयड रसोलियों, पाॅलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, पीसीओएस, यूटरस में सूजन जैसी समस्या होने का संकेत देते हैं। तनावग्रस्त होने पर उनके ब्रेन में हार्मोन्स का डिस्चार्ज करने वाली हाइपोथैलेमस ग्रंथि में विकार आ जाता हैैै। जिससे महिला को पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होने लगती है। जिसे डीयूबी (डिस्फंक्शनल यूटराइन ब्लीडिंग) या एयूबी (एब्नार्मल यूटराइन ब्लीडिंग) कहा जाता है। डाॅक्टर अल्ट्रासाउंड करके कारण का पता लगाते हैं और समुचित उपचार करते हैं।

खतरा

मासिक धर्म में अनियमितता की वजह से इस उम्र में थायराॅयड की समस्या भी देखने को मिलती है। जो मूलतः हार्मोनल असंतुलन की वजह से होता हैै। अगर इसका उपचार न किया जाए तो चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल आ जाते हैं। ऐसी स्थिति को हर्सुटिज्म डिजीज कहा जाता है। आगे चलकर शादी के बाद ऐसी महिलाओं में एनोव्यूलेशन के कारण इंफर्टिलिटी या बांझपन की स्थिति भी आ सकती है।

थायराॅयड ग्रंथि द्वारा कम हार्माेन्स बनाने पर हाइपोथायरॉयड और ज्यादा बनाने पर हाइपोथायरॉयड हो जाता है। जिनसे मोटापा, अनचाहे बाल आना, बाॅडी में खासतौर पर पैरों में सूजन, थकावट रहना, चिड़चिड़ापन जैसी कई समस्याएं देखने को मिलती हैं। मेटाबाॅलिक डिसऑर्डर होने और मोटापे की वजह से उनके शरीर में इंसुलिन रसिस्टेंस की स्थिति आ जाती है। उनमें खून की कमी होने लगती है, हीमोग्लोबिन के मानक स्तर को प्राप्त नहीं कर पातीं और वो एनीमिया की शिकार भी हो सकती हैं।

सावधानी

पीरियड्स में होने वाली परेशानियों की अनदेखी न कर डाॅक्टर को कंसल्ट करना चाहिए। थायरॉयड का अंदेशा होने पर डाॅक्टर को कंसल्ट करके मेडिसिन शुरू कर देनी चाहिए।

ल्यूकेरिया या वाइट डिस्चार्ज

White Discharge
White Discharge Problem

आमतौर पर नार्मल वाइट डिस्चार्ज पीरियड्स से पहले और ओव्यूलेशन के समय यानी पीरियड्स के दो-तीन दिन बाद ज्यादा होता है। कई बार पर्सनल हाइजीन का ध्यान न रखने की वजह से सर्वाइकल सर्विक्स पर जख्म हो जाते हैं। जिससे वजाइना एरिया में इंफेक्शन हो जाता है जिससेे ल्यूकेरिया की स्थिति आ जाती है।

खतरा

जब वाइट डिस्चार्ज जरूरत से ज्यादा हो या वजाइना एरिया में किसी तरह के रेशैज, इचिंग, खुजली, बदबू या सूजन हो-महिलाओं को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्हें जांच करानी चाहिए क्योंकि यह ट्राइकोमोनिएसिस इंफेक्शन, कैंडिड फंगल इंफेक्शन हो सकता है। समुचित उपचार न किए जाने पर यह सर्वाइकल इरोजन कैंसर में बदल सकता है।

सावधानी

पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखना जरूरी है जिसके लिए नियमित रूप से वजाइना वाॅश प्रोडक्ट इस्तेमाल करना चाहिए। जहां तक संभव हो रात में सोते समय अंडरगार्मेन्ट्स नहीं पहनने चाहिए ताकि यौनि क्षेत्र में समुचित हवा लग पाए और इंफेक्शन दूर रहे।

(डाॅ अंशु जिंदल, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिंदल अस्पताल, मेरठ)