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एंडोस्कोपिक बैलूनिंग

 

सच है कि 21वीं सदी में मोटापा महामारी की तरह फैलता जा रहा है और अब भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के शहरी क्षेत्रों की कुल आबादी के लगभग तीन करोड़ लोग ‘ओबीज की श्रेणी में आ गए हैं। अत: यही समय है कि लोगों में इसके बारे में जागरूकता पैदा की जाए ताकि मोटापे से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।

गौरतलब बात यह है कि बड़ों के साथ-साथ बच्चे और किशोर भी इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। मोटापे को कम करने में वेट लॉस सर्जरी कितनी कारगर सिद्ध होती है। इसकी जरूरत कब पड़ती है और सर्जरी करने की क्या प्रक्रिया है, यहां बता रहे हैं फोर्टिस अस्पताल नोएडा के बेरिएट्रिक सर्जन डॉ. नितिन झा।

क्या है बेरिएट्रिक सर्जरी

  • डॉ. झा कहते हैं कि वेट लॉस सर्जरी को ‘बेरिएट्रिक सर्जरी के नाम से भी जाना जाता है। इसके लिए जब मरीज आता है तो पहले उसकी काउंसलिंग की जाती है। क्योंकि कई बार घर वालों के दबाव में लोग आ जाते हैं पर न ही डॉक्टर को सहयोग करते हैं और न ही सर्जरी के बाद की गाइडलाइन्स को।
  • इसके साथ यह भी देखा जाता है कि डाइट एक्सरसाइज व औषधीय इलाज से उसका मोटापा कम हो सकता है या नहीं। हालांकि सभी तरीके अपनाने के बाद भी जब मोटापा नहीं घटता है तभी कोई आता है। बेरिएट्रिक सर्जरी से मरीज का वजन तो घटता ही है, साथ ही कई बीमारियों से भी राहत मिल जाती है।
  • सर्जरी के लिए बॉडी मॉस इंडेक्स देखा जाता है। भारत में बॉडी मॉस इंडेक्स 32 या 35 से अधिक हो तथा इसके साथ डायबिटीज या अन्य कोई बीमारी हो अथवा न भी हो तो भी व्यक्ति की सर्जरी जरूरी हो जाती है।
  • मोबाइल में बीएमआई की एप में अपना वजन व हाईट सेंटीमीटर में डालें, तुरंत बीएमआई पता लग जाएगा। इसके अलावा आपका वजन कितना ज्यादा है, इसको देखने का एक सरल तरीका है, अपना वजन किलो में नोट करें व हाइट सेंटीमीटर में। हाइट में से 100 घटा दीजिए तो आपको पता चल जाएगा कि आपका वजन कितना ज्यादा है।
  • उदाहरण के लिए यदि वजन 64 किलो है और हाइट 155 सेंटीमीटर तो सौ घटाने पर आपका आइडियल वजन 55 होना चाहिए।
  • शरीर में वजन बढऩे के साथ-साथ वसा का जमाव स्त्री-पुरुष में अलग-अलग जगहों पर होता है। जैसे पुरुषों में मुख्यत: छाती व पेट में और औरतों में जांघों व कमर के नीचे के भागों में। इसमें कोई शक नहीं कि मोटापा बढऩे के साथ-साथ कई बीमारियां भी हो जाती हैं जैसेडायबिटीज, हाई बीपी, हृदय रोग, जोड़ों की समस्याएं, लकवा आदि।
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लाइलाज मोटापे के ये हैं कारगर इलाज 4

 बेरिएट्रिक सर्जरी की प्रक्रिया

इस सर्जरी को करने के लिए लेप्रोस्कोपिक विधि अपनाई जाती है। पहले पूरा पेट खोल कर सर्जरी की जाती थी, जिसमें टांके आते थे, पर अब पेट पर चार या पांच कट लगा दिए जाते हैं, जिसमें तीन 1-1 सेंटीमीटर के व एक या दो कट 5-5 मिलीमीटर के। आजकल तो डाक्टर एक कट द्वारा भी सर्जरी करते हैं। यह सर्जरी मुख्यत: तीन प्रकार से की जाती है-

1. माल एब्जॉर्वटिव विधि

2. रेस्ट्रिक्टिव विधि

3. गैस्ट्रिक बाईपास विधि

माल एब्जार्वटिव
विधि में पेट के कुछ भाग को अलग कर छोटी आंत के अंतिम छोर से जोड़ दिया जाता है। इसकी वजह से पूरे भोजन का अवशोषण नहीं हो पाता। केवल दूरस्थ भाग से जितना हो सकता है पचित भोज्य पदार्थ अवशोषित हो जाता है। यह विधि काफी सुरक्षित मानी जाती है। रेस्ट्रिक्टिव विधि में पेट का साईज छोटा कर एक छोटे बच्चे के पेट जितना कर दिया जाता है, जिसकी वजह से कम खाने से ही संतुष्टि का अनुभव होने लगता है। इसमें एडजस्टेबल गैस्ट्रिक बैडिंग, स्लीव गैस्ट्रक्टमी विधि अपनाई जाती है। इस विधि से एक साल में 70त्न अधिक शारीरिक भार कम हो जाता है। ऐसे मरीज जो अपने खानपान तथा लाइफ स्टाइल में परिवर्तन लाना चाहते हैं उनके लिए बैडिंग विधि उपयुक्त है।

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गैस्ट्रिक बाईपास विधि
इस विधि में रिस्क फैक्टर ज्यादा होता है। इसमें पेट का बाईपास करते हैं व आंत के दो अलग-अलग चैनल बना दिए जाते हैं। इसमें एक से भोजन और दूसरे से पाचक रस आ कर मिलते हैं। उसके बाद आगे चल कर दोनों का मिश्रण बनता है और दोनों नलियां एक में मिल जाती हैं। ऐसा पाचन में विलम्ब करने के लिए किया जाता है। इस विधि में वेट लॉस जल्दी व ज्यादा होता है। वजन भी सदा के लिए स्थिर हो जाता है। इसके बाद मरीज को कुछ एक्सरसाइज बताई जाती हैं ताकि त्वचा में झर्रियां न पड़ें। विटामिंस सप्लीमेंट भी दिया जाता है।

 

शादी के लिए होना है पतला

डॉ. नितिन झा कहते हैं कि कई लड़कियां चाहती हैं कि विवाह के लिए थोड़ी दुबली हो जाएं, उनके लिए भी यह अच्छा समाधान है।

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यह एक टेम्परेरी समाधान होता है। गले के बैलून को पेट में डाल दिया जाता है, जिससे मरीज महिला 40 प्रतिशत पेट के माध्यम से खाना खाने के बाद पेट भरा महसूस करती हैं क्योंकि 60 प्रतिशत जगह बैलून घेर लेता है। इसमें जब चाहे बैलून को निकलवाया जा सकता है। इस बैलूनिंग एंडस्कोपी के बाद आसानी से कंसीव किया जा सकता है।

डॉ. झा कहते हैं कि सर्जरी में दो से ढाई घंटे लगते हैं और तीन चार दिन उसको अस्पताल में रहना पड़ता है। शुरू में दो सप्ताह तक लिक्विड डाइट पर ही पेशेंट रहता है, उसके बाद लगभग तीन सप्ताह तक सेमी सॉलिड फूड दिया जाता है जैसे पतली खिचड़ी, दाल, दलिया आदि। दो से तीन महीने बाद पेशेंट अपनी सामान्य डाइट दाल-चावल, सब्जी-रोटी खाने लगता है।

ऑपरेशन के बाद होने वाली जटिलताएं
कुछ लोगों में किसी प्रकार की जटिलता देखने को नहीं मिलती और कुछ में कई तरह की जटिलताएं आती हैं। जैसे आयरन, कैल्शियम, विटामिन डी, विटामिन बी कॉम्पलेक्स, प्रोटीन और फॉलिक एसिड की कमी। फॉलिक एसिड, आयरन तथा विटामिन की कमी से खून की कमी, ऑस्टियोपोरोसिस तथा हड्डी की बीमारी हो सकती है, जिसकी आपूर्ति बाहर से कर देने पर यह शिकायत दूर हो जाती है।

गैस्ट्रिक बाईपास विधि से सर्जरी कराने वाले जो लोग मीठे भोज्य पदार्थ, फ्रूट जूस, आदि का ज्यादा सेवन करते हैं, उनमें पेट दर्द, मितली, डायरिया, सिरदर्द, अत्यधिक पसीना आना जैसी समस्याएं होती हैं। उन्हें मीठे से परहेज करना व ताजे फल, हरी सब्जियों व दूध से बने पदार्थ का संतुलित सेवन करने को कहा जाता है।

वे सभी सर्जरियां जिनमें तेजी से वजन की कमी होती है, उनमें पित्त की थैली में पथरी होने की आशंका रहती है। ऐसे में पित्त को पतला करने की दवा दी जाती है। यदि किसी कारणवश पथरी हो जाती है तो उसे ऑपरेशन कर निकाल दिया जाता है। कई सर्जन पथरी होने की आशंका को देखते हुए बेरिएट्रिक सर्जरी के दौरान पित्त की थैली भी निकाल देते हैं। चाहे जो भी हो बेरिएट्रिक सर्जरी वाले मरीज को अपने चिकित्सक की निगरानी में रहने की जरूरत पड़ती है।

जीवनशैली में बदलाव जरूरी
बेरिएट्रिक सर्जरी वाले मरीज को कई बार काउंसलिंग की जरूरत पड़ती है क्योंकि मरीज इस दौरान कर्ई मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक परिवर्तनों से जूझता है। जैसे वजन दो-चार दिन में कम नहीं होता। वह ऑपरेशन से पहले जैसा दिखता था, वैसा ही दिखेगा। इच्छित वजन कम होने में एक साल लग जाता है। वजन को स्थिर बनाए रखने के लिए डाइट रेस्ट्रिक्शन के साथ-साथ नियमित रूप से एक्सरसाइज करने की भी जरूरत होती है। डाइट हाईप्रोटीन हो, लेकिन वसा, चीनी और कम कैलोरी वाली डाइट ठीक रहती है। भोजन थोड़ा-थोड़ा और अच्छी तरह चबाना जरूरी है। जब पेट भरने का एहसास हो तब खाना खाना छोड़ दें।

इस तरह की सर्जरी बेशक महंगी है यानी एक प्राइवेट अस्पताल में इसका खर्चा ढाई से साढ़े तीन लाख तक आता है। पर डॉ. नितिन झा कहते हैं कि कई जैसे डायबिटीज, हाई बीपी, हाई डिजीज, स्ट्रोक आदि पर बीमारियों में आप पूरी जिंदगी जितना खर्च करते हैं उससे तो यह खर्च बहुत कम है। क्योंकि मोटापा होगा तो बीमारियां बढ़ती ही जाएंगी। अत: यह सर्जरी उन लोगों के लिए वरदान है जिनका मोटापा किसी भी तरीके से कम नहीं होता। बेरिएट्रिक सर्जरी आपकी जिंदगी को बेहतर गुणवत्ता प्रदान करती है।

 

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