Braib eating amoeba
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सैकड़ों अमेरिकियों को नॉनस्टिक बर्तन में कुकिंग करना भारी पड़ गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नॉनस्टिक पैन से निकलने वाले जहरीले धुंए के कारण अमेरिका में कई लोग फ्लू के शिकार हो गए हैं।

Non Stick Pan Health Effects: भोजन को पौष्टिक बनाने में बर्तनों का बहुत महत्व होता है। आप किस बर्तन में भोजन पकाते हैं, उसके आधार पर ही उसकी पौष्टिकता तय होती है। ऐसे में अक्सर नॉनस्टिक बर्तन चर्चा में रहते हैं। कई लोग मानते हैं कि इन बर्तनों में पकाए गए भोजन की न सिर्फ पौष्टिकता नष्ट हो जाती है, बल्कि इससे भोजन में ऐसे कई रसायन शामिल हो जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकते हैं। लोगों की यह सोच काफी हद तक ठीक भी साबित हुई है। अब सैकड़ों अमेरिकियों को नॉनस्टिक बर्तन में कुकिंग करना भारी पड़ गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नॉनस्टिक पैन से निकलने वाले जहरीले धुंए के कारण अमेरिका में कई लोग फ्लू के शिकार हो गए हैं। जिसे नाम दिया गया है ‘टेफ्लॉन फ्लू’। इसे पॉलीमर फ्यूम फीवर भी कहा जा रहा है। क्या है टेफ्लॉन फ्लू और क्या हैं इसके कारण आइए जानते हैं।

Non Stick Pan Health Effects-टेफ्लॉन कुकवेयर को गलत तरीके से काम में लेने के कारण इस फ्लू का जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है।
The risk of this flu increases due to improper use of Teflon cookware.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस फ्लू से पीड़ित लोगों को बुखार के साथ तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द और कंपकंपी जैसे लक्षण महसूस होते हैं। ये लक्षण इतने तेज होते हैं कि कई लोगों को तो अस्पताल तक में भर्ती होना पड़ा है। माना जा रहा है कि टेफ्लॉन कुकवेयर को गलत तरीके से काम में लेने के कारण इस फ्लू का जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है। क्योंकि जब आप  नॉनस्टिक कुकवेयर को ज्यादा तेज गर्म करते हैं या इसकी टेफ्लॉन सतह की कोटिंग पर खरोंच आती है तो इसके रसायन टूट जाते हैं। ऐसे पैन में भोजन पकाने पर ऑक्सीकृत, फ्लोरिनेटेड जैसे रसायन गर्म होकर धुएं में शामिल हो जाते हैं। साथ ही भोजन में भी मिल जाते हैं, जिसके कारण यह फ्लू फैलता है।

दरअसल, अधिकांश नॉनस्टिक कुकवेयर टेफ्लॉन से कोटेड होते हैं। टेफ्लॉन  एक सिंथेटिक रसायन है, जो फ्लोरीन परमाणुओं और कार्बन से बनता है। अगर आप नॉर्मल टेंपरेचर पर टेफ्लॉन कोटेड बर्तनों में खाना पकाते हैं तो यह सुरक्षित रहता है। लेकिन अगर आप इन्हें हाई टेंपरेचर पर यूज करते हैं तो कोटिंग खराब हो जाती है और विषाक्त पदार्थ व जहरीला धुआं इसमें से निकलने लगता है। ऐसे में भोजन में माइक्रो और नैनो प्लास्टिक के साथ ही पेर और पॉलीफ्लोर एल्काइल जैसे पदार्थ मिल जाते हैं। इसमें पका भोजन खाने से ये शरीर के अंदर चले जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं।

टेफ्लॉन फ्लू के लक्षण आम फ्लू के लक्षणों से मिलते जुलते हैं। आमतौर पर  नॉनस्टिक पैन का उपयोग करने के दौरान निकले धुएं के संपर्क में आने के कुछ घंटों बाद इसके लक्षण नजर आते हैं। ठंड के साथ तेज बुखार आना और सिर दर्द व बदन दर्द होना इसका प्रमुख लक्षण है। साथ ही खांसी आना, सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी, मतली-उल्टी आना, थकान महसूस होना, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द आदि इसके सामान्य लक्षण हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि वैसे तो टेफ्लॉन कोटेड नॉनस्टिक पैन सेफ हैं, लेकिन इन्हें सावधानी के साथ काम में लेना जरूरी है। अगर आप इन्हें 500 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा गर्म करते हैं तो नुकसान की आशंका रहती है। इसलिए नॉनस्टिक पैन को कभी भी बहुत हाई हीट पर काम नहीं लें। इसी के साथ खाली नॉनस्टिक पैन को कभी गर्म न करें, क्योंकि यह बहुत जल्दी गर्म हो जाता है। इसलिए पैन में हमेशा घी, तेल, बटर या भोजन डालकर ही गैस ऑन करें। जिन नॉनस्टिक बर्तनों की कोटिंग उतरने लगी है या काली पड़ने लगी है, उनका उपयोग न करें। सबसे अच्छा है कि आप मिट्टी, लोहे और पीतल के बर्तनों में भोजन पकाएं।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...