PCOS and Diabetes Connection
PCOS and Diabetes Connection

Overview:लंबे समय तक बनी रहने वाली यह समस्या कैसे महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर डालती है

पीसीओएस और डायबिटीज़ का गहरा संबंध है, जिसकी जड़ में इंसुलिन रेज़िस्टेंस छिपा है। यह समस्या लंबे समय तक बनी रहने पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम खड़े कर सकती है। संतुलित जीवनशैली, सही खानपान और नियमित जांच से न सिर्फ पीसीओएस को नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारी से भी बचाव संभव है।

PCOS and Diabetes Connection: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में सबसे आम हार्मोन से जुड़ी बीमारियों में से एक है। ये सिर्फ़ स्त्री रोग की दिक़्क़त नहीं है बल्कि आपके मेटाबॉलिज़्म पर भी असर डालती है। पीसीओएस और डायबिटीज़ को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है इंसुलिन रेज़िस्टेंस

इंसुलिन रेज़िस्टेंस क्या है?

what is insulin resistance
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इंसुलिन एक हार्मोन है जो पैंक्रियाज़ बनाता है। इसका काम है खाने से मिली शुगर को शरीर की कोशिकाओं में ले जाना और उसे एनर्जी में बदलना। जब कोशिकाएँ इंसुलिन की बात नहीं मानतीं, तो इसे कहते हैं इंसुलिन रेज़िस्टेंस। ऐसे में पैंक्रियाज़ और ज़्यादा इंसुलिन बनाने लगता है। थोड़े समय तक तो ये ब्लड शुगर कंट्रोल रखता है, लेकिन लंबे समय में यह कई बीमारियों की वजह बनता है।

करीब 50–70% महिलाएँ जिनको PCOS होता है, उन्हें किसी न किसी हद तक इंसुलिन रेज़िस्टेंस भी होता है—even अगर वे मोटी न हों। ज़्यादा इंसुलिन ओवरीज़ को और ज़्यादा मेल हार्मोन बनाने को कहता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं, ओव्यूलेशन में दिक्कत आती है, चेहरे पर दाने निकलते हैं और चेहरे/शरीर पर बाल बढ़ जाते हैं।

PCOS वाली महिलाएँ बिना PCOS वाली महिलाओं के मुकाबले 4 गुना ज़्यादा टाइप-2 डायबिटीज़ की शिकार हो सकती हैं। अगर वजन ज़्यादा है या परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास है, तो रिस्क और बढ़ जाता है।

धीरे-धीरे प्रोग्रेशन कुछ ऐसा होता है

इंसुलिन रेज़िस्टेंस → प्रीडायबिटीज़ → टाइप-2 डायबिटीज़

अक्सर ये सब धीरे-धीरे और चुपचाप होता है, और तब पता चलता है जब शुगर बहुत बिगड़ चुकी होती है।

सिर्फ डायबिटीज़ ही नहीं, और भी खतरे हैं

  1. मेटाबॉलिक सिंड्रोम – हाई BP, हाई कोलेस्ट्रॉल, पेट के आसपास मोटापा और शुगर लेवल बढ़ना। इससे डायबिटीज़ और हार्ट डिज़ीज़ दोनों का रिस्क बढ़ जाता है।
  2. हार्ट डिज़ीज़ (दिल की बीमारी) – लंबे समय तक हाई इंसुलिन और शुगर ब्लड वेसल्स को खराब कर देते हैं।
  3. एंडोमेट्रियल कैंसर – बार-बार ओव्यूलेशन न होना, हार्मोनल असंतुलन, मोटापा और इंसुलिन रेज़िस्टेंस मिलकर गर्भाशय की परत के कैंसर का रिस्क बढ़ाते हैं।

इंसुलिन रेज़िस्टेंस को कैसे कंट्रोल करें?

ये बीमारी लौटाई जा सकती है, बस थोड़ी लाइफस्टाइल बदलने की ज़रूरत है—

  1. हेल्दी डाइट: साबुत अनाज, दालें, सब्ज़ियाँ, हल्के प्रोटीन, ड्राईफ्रूट्स और बीज ज़्यादा खाएँ। मैदा, तली-भुनी और मीठी चीज़ें कम करें। दिनभर में थोड़ा-थोड़ा खाएँ ताकि शुगर लेवल बैलेंस रहे।
  2. नियमित एक्सरसाइज़: स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से मसल्स बढ़ते हैं और इंसुलिन बेहतर काम करता है। वॉकिंग, साइकलिंग, स्विमिंग जैसी कार्डियो एक्सरसाइज़ फिटनेस और वज़न कंट्रोल में मदद करती हैं। योग और मेडिटेशन तनाव घटाते हैं, जिससे हार्मोन भी बेहतर रहते हैं।
  3. वज़न कंट्रोल: सिर्फ़ 5–10% वज़न घटाने से ही पीरियड्स रेगुलर हो सकते हैं और डायबिटीज़ का रिस्क काफी कम हो जाता है।
  4. डॉक्टरी सलाह: कुछ दवाइयाँ जैसे मेटफॉर्मिन इंसुलिन को बेहतर काम करने में मदद करती हैं। ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जाँच करवाते रहना चाहिए। PCOS वाली महिलाओं को साल में एक बार डायबिटीज़ की जांच ज़रूर करानी चाहिए—even अगर कोई लक्षण न हों।

Inputs by – डॉ. त्रिप्ती राहेजा, डायरेक्टर – अब्स्टेट्रिक्स & गयनेकोलॉजिस्ट, सीके बिरला हॉस्पिटल ®, दिल्ली

मैं मधु गोयल हूं, मेरठ से हूं और बीते 30 वर्षों से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है और हिंदी पत्रिकाओं व डिजिटल मीडिया में लंबे समय से स्वतंत्र लेखिका (Freelance Writer) के रूप में कार्य कर रही हूं। मेरा लेखन बच्चों,...