वक्त के तजुर्बो के साथ बुढापा अनेक बीमारियां साथ लाता है। उम्र बढने के साथ शरीर पर नियंत्रण कम होने लगता है। बाल भूरे, त्वचा की चमक फीकी, मांसपेशियां और आंखें कमजोर होने लगती हैं। साथ ही हड्डियों की ताकत भी कम होने लगती है। ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की ऐसी बीमारी है जिसमें हल्का सा फर्श पर गिरने भर से ही हड्डियां टूट जाती हैं। इस बीमारी में कूल्हे, कलाई और रीढ की हड्डी टूटने का डर सबसे अधिक बना रहता है।

विश्व में हाइपरटेंशन, शुगर के बाद ऑस्टियोपोरोसिस तीसरी बड़ी बीमारी है लेकिन हमारे देश में लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। भारत में ढाई करोड़ से अधिक आबादी को ऑस्टियोपोरोसिस है। ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन इंडिया की फाउंडर डाक्टर मैयत्री शंकर ने कहा कि यहां लोग इस बीमारी को लेकर जागरूक नहीं हैं। लोगों को हार्ट अटैक, शुगर जैसी बीमारी के बारे में पता है लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में नहीं। डॉक्टर मैयत्री के पास ज्यादातर पचास से अधिक उम्र के मरीज आते हैं, जिनकी पैर फिसलने की वजह से रीढ़ या कलाई की हड्डी टूट जाती है। फ्रैक्चर वाले मरीजों की सर्जरी आसान नहीं होती। तीन महीने मरीज को बिस्तर पर रहना पड़ता है और पूरे समय मदद चाहिए होती है। इसके बाद भी कई बार मरीज सामान्य जिंदगी नहीं बिता पाते।

ऑस्टियोपोरोसिस महिला और पुरुष दोनों को हो सकता है लेकिन महिलाओं में मीनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा अधिक होता है। रिसर्च के मुताबिक महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस होने की आशंका पुरुषों के मुकाबले चार गुना अधिक है। सन्त परमानंद अस्पताल के ऑर्थोपेडिक डॉक्टर शेखर श्रीवास्तव ने बताया कि हड्डियां कैल्शियम, विटामिन डी और मिनरल्स की कमी के कारण सिकुडने लगती हैं। महिला और पुरुषों में 35 साल के बाद हड्डियों का घनत्व 0.3 से 0.5 फीसदी कम हो जाता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन नाम का हारमोन हड्डियों का घनत्व बनाए रखता है लेकिन मीनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर गिरने लगता है। शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी के कारण समस्या बढऩे लगती है। भारत में युवाओं में भी ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से फ्रैक्चर के केस सामने आए हैं। डॉक्टर के मुताबिक एहतियात बरती जाए, तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। भारत में ज्यादातर अस्पतालों में सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। डॉक्टर के मुताबिक ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण सामने नहीं आते और ज्यादातर मामलों में फ्रैक्चर होने के बाद ही इसके बारे में पता चलता है…

ऑस्टियोपोरोसिस होने के कारण

धूम्रपान और शराब। पौष्टिक आहार न खाना और कैल्शियम और विटामिन डी की कमी। एस्ट्रोजन का स्तर कम होना। कीमोथेरेपी के कारण जल्दी मीनोपॉज होना। हाइपोथायरॉइड। माता-पिता में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या होना।

 रोकने के उपाय

कैल्शियम युक्त खाना अधिक खाएं। विटामिन डी के लिए सूर्य की रोशनी यानी धूप में अधिक रहें। साल के बाद हड्डियों की नियमित रूप से जांच कराएं। शराब या सिगरेट का सेवन न करें।

 मिथक और तथ्य

 ऑस्टियोपोरोसिस बुढ़ापे का ही हिस्सा है। कैल्शियम और विटामिन डी वाला आहार, वजन कम रखकर और समय पर हड्डियों की जांच कराकर इस बीमारी से बचा जा सकता है। केवल महिलाओं को ही मीनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस हो सकताहै। महिलाओं और पुरुषों को किसी भी उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। खासकर अस्थमा और ऑर्थराइटिस के मरीजों को ऑस्टियोपोरोसिस होने की आशंका अधिक होती है। सर्वे के मुताबिक बीस फीसदी पुरुष ऑस्टियोपोरोसिस से पीडि़त हैं जबकि पचास या उससे अधिक उम्र की बावन फीसदी एशियाई महिलाएं इससे ग्रसित हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस कोई गंभीर बीमारी नहीं है?

महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस उतनी ही खतरनाक बीमारी है जितना ब्रेस्ट, गर्भाशय और ओवरी का कैंसर। पचास वर्ष से अधिक उम्र की पचास फीसदी महिलाएं इससे पीडि़त हैं। ऑस्टियोपोरोसिस के परिणाम घातक और बेहद दर्दनाक हैं। करीबन बील फीसदी हिप फ्रैक्चर के मरीज सर्जरी के एक साल में ही मर जाते हैं, क्योंकि फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए की जाने वाली सर्जरी से निमोनिया या ब्लड क्लॉट होने की आशंका बढ़ जाती है। हिप फ्रैक्चर के ज्यादातर मरीज स्वयं चल नहीं पाते। कमर दर्द, सांस लेने और खाने में दिक्कत और चलने में परेशानी भी होती है। ऑस्टियोपोरोसिस का मेडिकल खर्चा ज्यादा नहीं है। सर्जरी में एक से दो लाख तक का खर्च आता है। लेकिन खर्च से विकलांगता के बिना और सामान्य जिंदगी नहीं जी सकते। ऑस्टियोपोरोसिस होने पर तुरंत पता चल जाता है।

ऑस्टियोपोरोसिस को खामोश बीमारी कहा जाता है क्योंकि ये समय के साथ बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। ऑस्टियोपोरोसिस में हल्का सा गिरने पर भी हड्डी में फ्रैक्चर आने की आशंका रहती है। 

ऑस्टियोपोरोसिस होने के बाद हम कुछ नहीं कर सकते।

अब ऑस्टियोपोरोसिस के लिए समुचित इलाज उपलब्ध है जिसमें हड्डियों के उपचार से लेकर नई हड्डी बनाना भी शामिल है। भारत में ज्यादातर अस्पताल इस बीमारी के लिए सर्जरी की सुविधाओं को लेकर अभी काफी काम कर रहे हैं।

रोकथाम के लिए क्या करें?

ऑस्टियोपोरोसिस का पता डेक्सा बोन टेस्ट के जरिए किया जा सकता है। इस बीमारी को रोका जा सकता है और इसका इलाज भी मौजूद है। महिलाओं को हारमोन थेरेपी और कैल्शियम युक्त खाना खाने की सलाह दी जाती है।19 से49 वर्ष की महिलाओं और पुरुषों को रोजाना 1,000 मिलीग्राम और 50 वर्ष से अधिक के लोगों को 1,200 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है।

कैल्शियम के स्रोत

– दूध और दूध से बने प्रोडक्ट जैसे चीज, दही, लस्सी, आइसक्रीम।
– पालक, मूली और लौकी।
– मखाने, मूंगफली, अखरोट, काजू, बादाम और फलों के बीज।
– तरबूज और खरबूजे के बीज।
– नारियल।
– सेब, केला, अमरूद, अंजीर, संतरा और चीकू।

 विटामिन डी के स्रोत

– सूरज की रोशनी।
– मछली- टूना, सालमन और मैकरिल।
– अंडे की जर्दी।
– विटामिन डी की दवाईयां।

बुजुर्गों को गिरने से बचाने के लिए घर में इन सुरक्षा उपायों का प्रयोग किया जा सकता है..

फर्श– सभी खुले तारों का हटा दीजिए। पायदान या रग्स को सीधा रखिए। फर्श पर पानी न गिरा हो। फर्नीचर सही तरीके से रखा गया हो ताकि चलते समय पैरों में न लगे।

 लाइट- हाल, सीढिय़ों और दरवाजों पर रोशनी हो। रात के समय बाथरूम में नाइट लाइट जलाकर रखें।

बाथरूम और किचन- पानी वाली जगहों पर न फिसलने वाले रबर मैट बिछाकर रखें।