मात्रा में उत्तेजना नहीं मिल रही है। ऐसे में लॉकडाउन की स्थिति लंबे समय तक चलने की आशंका के चलते, यह लोगों की हड्डी के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। हमें याद रखना होगा कि हमारी अन्य आवश्यक जरूरतों की तरह ही हमें अपनी हड्डियों के स्वास्थ्य के विषय में भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।

लंबे समय तक लॉकडाउन की अवधि बढ़ने के चलते बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा है। पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के साथ, बुजुर्गों में दैनिक गतिविधियों की समस्या बढ़ सकती है, जिसके लिए व्यायाम करना अनिवार्य है। गति विधि का अभाव न केवल हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा बल्कि मधुमेह, हृदय से जुड़ी बीमारी और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों के समग्र स्वास्थ्य के अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालेगा। ऐसे में महिलाओं में स्थितियां और भी पेचिदा बन जाती हैं। बढ़ती उम्र की ऐसी ही एक बीमारी है ऑस्टियोपोरोसिस।

डब्ल्यूएचओ के ताजा प्रसारित रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर में हार्ट डिजीज के उपरांत सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित होती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस को खोखली हड्डियों की बीमारी भी कहते हैं। इसे पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, विटामिन डी और दूसरे अन्य प्रकार के मिनरल्स न होने से हड्डियां (घनत्व) भुरभुरी हो जाती हैं। हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि छोटी-सी चोट भी फ्रैक्चर का कारण बन जाती है। ऐसे में कूल्हे, कलाई या रीढ़ की हड्डी में फेक्चर होने की संभावना अधिकतम होती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस होने के बहुत से कारणों में से मुख्य
कारण- शारीरिक व्यायाम की कमी है। ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज में मेडिकल और नॉन मेडिकल दोनों पहलुओं का ध्यान रखा जाता है। मेडिकल पहलू में दवाएं और इंजेक्शन शामिल हैं, जबकि नॉन मेडिकल में हड्डियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम, प्रोटीन तथा कैल्शियम युक्त आहार का समावेश है।
स्वस्थ हड्डियों के लिए हर उम्र में व्यायाम महत्वपूर्ण है और यह ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज और रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है। व्यायाम न केवल आपकी हड्डी के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है बल्कि आपकी मांसपेशियों की ताकत, समन्वय और शारीरिक संतुलन में भी वृद्धि कर सकती है। और यहां से आपकी संपूर्ण शारीरिक तंदुरुस्ती की शुरुआत होती है। जिससे गिरने या चोट लगने की वजह से होने वाले फ्रैक्चर को रोकने में मदद मिलती है। मांसपेशियों की तरह, जब वे ङ्क्षखचाव महसूस करती हैं, तो वे अधिक वजन सहन करने के लिए मजबूर होती हैं। यह वजन-असर (जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना, नृत्य, स्क्वॉट्स इत्यादि) और प्रतिरोध व्यायाम द्वारा प्राप्त किया जाता है। आपको सलाह दी जाती है कि अगर आप किसी पुरानी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त हैं तो शारीरिक व्यायाम शुरू करने से पूर्व आपके डॉक्टर तथा फिजियोथैरेपिस्ट की सलाह लेना आवश्यक है। अपने जोड़ों और मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए हर दिन कम से कम 20- 30 मिनट के लिए सरल व्यायाम की कोशिश करें और धीरे-धीरे बढ़ाइए। कोई भी व्यायाम के पहले वॉर्म अप और खत्म होने पर कुल डाउन जरूरी है। अन्य व्यायाम जैसे- एरोबिक्स, मजबूत मांसपेशियों को बनाने और बनाए रखने में मदद कर सकते हैं और उत्कृष्ट हृदय संबंधी लाभ हो सकते हैं, एरोबिक्स में सबसे अच्छा व्यायाम है चलना लेकिन इनडोर रहना अनिवार्य है इसलिए घर में जितना चल सकते हैं चलिए। इसके अलावा जंपिंग, स्किपिंग, स्पोट जॉगिंग, डांसिंग इत्यादि भी कर सकते हैं।

घर पर रहने के कारण हमें सूरज की किरणें कम से कम मिल पाती हैं। ऐसे में शरीर में विटामिन डी का स्तर को बनाए रखने के लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक है। हर रोज कम से कम 15-20 मिनट धूप में जरूर बैठें। यदि आपको जोड़ों का दर्द है तो यह आवश्यक है कि आप विटामिन डी की खुराक के लिए आर्थोपेडिक से भी सलाह ले सकते हैं।
हम आशा करते हैं कि आप शारीरिक व्यायाम का महत्व इस अनुसंधान के जरिये आसानी से जान सकें। जिससे लॉकडाउन के उपरांत आप बेहतर जीवन में कदम सफलता से रखने में कामयाब हों। चलिए आपदा को अवसर में बदल लेते है।
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