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Child development activities:

कोरोना और उसके चलते लगे लॉकडाउन ने सभी की जिंदगी को बदल डाला है। बच्चे भी इससे अछूते नहीं है। ऑनलाइन क्लासों, इनडोर गेम, बढ़े हुए स्क्रीन टाइम और ढेर सारे जंक फूड ने उनकी दिनचर्या पर आलस के भार को बढ़ा डाला था। घर में सिमटी दुनिया में वह शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम आदि से दूर हो गए। नतीजा, अब धीमे-धीमे पटरी पर लौटती जिंदगी पर आलस का स्टॉपेज दिनचर्या को रफ्तार नहीं लेने दे रहा है।

Child development activities बच्चों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा होता है। ऐसी स्थिति में जरूरी हो जाता है कि आप अपने लाडले या लाडली की दिनचर्या में एक बार फिर फिजिकल एक्टीविटीज को पर्याप्त जगह दिलवाएं ताकि वह सिर्फ आज ही स्वस्थ न रहे बल्कि एक सेहतमंद कल की नींव रख सके। अध्ययन भी यही कहते हैं कि बच्चा बचपन की दिनचर्या का पालन व्यस्क होने पर भी करता है।

क्या है फिजिकल एक्टिविटी और क्यों है जरूरी?

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Child development activities: लॉकडाउन ने बच्चे को बना दिया है आलसी तो ऐसे रखें उन्हें एक्टिव 5

सीधी भाषा में समझे तो शारीरिक रूप से सक्रिय होने का मतलब होता है। सांसों का तेज होना, गर्म महसूस करना और पसीना आना। यूं तो व्यायाम सभी के लिए जरूरी है पर बच्चों लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है। शारीरिक गतिविधियां स्वस्थ्य,  हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों को बनाने और बनाए रखने में मददगार साबित होती है। यह आपके छोटे के स्वस्थ बॉडी मास इंडेक्स के लिए भी मददगार साबित होती है।

यदि वह सक्रीय रहता है, तो जीवन में  मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग सरीखी तमाम समस्याओं के जोखिम को कम कर सकता है। शरीरिक सक्रीयता बच्चों को जल्दी सोने और उनकी अच्छी नींद में भी सहायक होती है। इससे बच्चों को मानसिक और व्यावहारिक स्वास्थ्य भी दुरुस्त रहता है। यह उनके उत्साह और आशावाद को बढ़ाता है और आत्म-सम्मान, स्कूल के प्रदर्शन, ध्यान और व्यवहार में भी इजाफा करता है। तो बच्चे के आलस को दूर करने के ये आसान उपाय एक बार जरूर आजमाएं।

कितने देर फिजिकल एक्टिविटी?

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 6 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों और किशोरों को हर दिन कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि की आवश्यकता होती है, इतना ही नहीं उन्हें हर हफ्ते कुछ दिन हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायामों की आवश्यकता भी पड़ती है। 6 साल से कम उम्र के बच्चों को रोजाना 3 घंटे की एक्टिविटी की जरूरत होती है। प्रत्येक दिन 1 घंटे या अधिक मध्यम से जोरदार शारीरिक गतिविधि करें तो बच्चा अभी क्या हमेशा स्वास्थ्य रहेगा।

चुनें सही गतिविधि

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दिनचर्या में शारीरिक सक्रीयता लाने के लिए उसकी शुरुआत व्यायाम के साथ करना बेहतर होगा। अपने बच्चे के लिए उसकी पसंद के व्यायाम का चुनाव करें। कोशिश करें कि उसके लिए ऐसी गतिविधि चुनें जिसका वह भरपूर मजा लें सके। इसके लिए आप ऐसी कोई भी गतिविधि चुनें जिसमें पूरा परिवार शामिल हो और सब मिलकर उसका आनन्द लें। जैसे एरोबिक, प्राणायाम आदि । पूरे परिवार के लिए आप कोई खेल भी चुन सकते हैं जैसे बैडमिंटन, बास्केट बॉल, बैट बॉल आदि।

बच्चे के लिए व्यायाम चुनते वक्त उसकी उम्र का भी ख्याल रखें। जैसे आपका बच्चा 7 या 8 साल का है तो वह भारोत्तोलन या फिर मीलों की दौड़ नहीं लगा सकता। उसकी उम्र की ध्यान में रखते हुए आप उसे साइकिल चलाने, तैराकी आदि का विकल्प सुझा सकते हैं। आप उसे एक्टिव रखने के लिए कुछ संसाधन भी जुटा सकते हैं जैसे कूदने वाली रस्सी, हूला हुप, पोगो स्टिक आदि ।

रखें संतुलन

आपको ध्यान रखना होगा कि कहीं आपके बच्चे को व्यायाम और शारीरिक गतिविधि में चोट न पहुंचे। किसी भी गतिविधि को धीमे-धीमे चालू करें और समय के साथ बढ़ाएं। और क्षमता से ज्यादा न करें। यदि व्यायाम स्कूल या अन्य गतिविधियों पर असर डालने लगे तो अपने बच्चे के डॉक्टर से बात करें।

खुद भी रहें एक्टिव

बच्चे जो देखते हैं वही सीखते हैं। उनके आलस को दूर करने के लिए आपको पहले खुद एक्टिव होकर उनके लिए रोल मॉडल बनना होगा। इससे आपको दोहरा फायदा होगा। पहला तो बच्चा आपको देखकर सक्रिय होने के लिए प्रेरित होगा और दूसरा आपका साथ मिलने से वह चीजें जल्दी सीखेगा और उसे ज्यादा मजे के साथ पूरा कर पाएगा।

इन बातों का रखें ख्याल

  • सक्रिय और स्वस्थ रहने के लिए हमें अपने लाडलों की दिनचर्या में थोड़े बदलाव करने होंगे। जैसे-
  • आपको ध्यान देना होगा कि आपका बच्चा हर दिन कम से कम 5 सर्विंग फल और सब्जियां खाए।
  • जंक फूड के लिए भी दिन निर्धारित करें। यकीनन ऐसा करना उसकी ज्यादा खाने की आदत और तनाव के स्तर दोनों में कमी लेकर आएगा।
  • माना कि तरल खुराक जरूरी है पर ध्यान रखें शर्करा से भरपूर पेश पदार्थ से बच्चों को दूर रखें। उन्हें हाइड्रेट रखने के लिए नारियल पानी, छाछ, दूध आदि का विकल्प चुनें।
  • बैठे-बैठे स्क्रीन पर आंखें खर्च करना भी फायदे का सौदा नहीं होगा। तो बेहतर होगा कि फैमिली सोशल मीडिया यूज प्लान बना लीजिए। जिसमें तय होगा कि घर का कौन सदस्य कितनी देर स्क्रीन पर टाइम बिताएगा। इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन गतिविधियों को संतुलित करने में मदद मिलेगी।

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