इसी तरह ‘जिनसेंग’ जिसके मूल का आकार शिश्न जैसा होता है, सेक्स पावर बढ़ाने का गुण रखती है। ‘लीची’ जिसका आकार अण्डकोष जैसा होता है, वह इस अंग से जुड़े रोगों को दूर करने एवं उनकी सक्रियता बढ़ाने में मुफीद पाया गया है। ‘कौड़ी’ जिसका आकार योनि से मिलता-जुलता है उससे बने कुछ योग योनि रोगों में फलप्रद हैं।

बात यहीं तक सीमित नहीं है। कई फल आदि के रंग भी इन्हीं रहस्यों को छुपाए दिखते हैं जैसे पका टमाटर जिसका रंग खून से मिलता-जुलता है, खून बढ़ाने में बेजोड़ है। लाल रंग के और फल भी खून बढ़ाने एवं उसकी गुणवत्ता को सुधारने का गुण रखते हैं, वैसे यह और भी कई गुणकारी प्रभाव रखते हैं। खाने-पीने के शौकीन अपनी खाने की मेज में देख सकते हैं लाल रंग के पोषक तत्त्वों की झलक।

टमाटर-टमाटर निरोगता के लिए अधिक लाभकारी होते हैं। टमाटर का यदि लगातार सेवन किया जाए, तो खाने वाले के गाल भी लाल कर देता है, क्योंकि इसमें लाल रंग का पोषक तत्त्व ‘लाइकोपीन’ पाया जाता है। टमाटर में अत्यधिक मात्रा में पाया जाने वाला यह तत्त्व, इससे निर्मित अन्य उत्पादों तथा टोमैटो कैचप, टोमैटो सॉस आदि में भी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। यह टमाटर के अतिरिक्त तरबूज सरीखे अन्य फलों में भी पाया जाता है। प्रोस्टेट कैंसर में अंकुश लगाने के साथ ही लाइकोपीन औरतों में छाती, फेफड़े एवं उदर कैंसर के जोखिम को भी कम करता है। 

जीवन सुरक्षा के लिए जिन-जिन तत्त्वों की जरूरत होती है वे सभी तत्त्व टमाटर के फल के रस में पाए जाते हैं। इसमें आयरन (लोहा) का तत्त्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। लोहा की मात्रा इसमें दूध की अपेक्षा दोगुनी एवं अंडे की अपेक्षा पांच गुनी मिलती है।

चूना (कैल्शियम) भी टमाटर में दूसरे फल-सब्जियों की अपेक्षा ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। चूने का यह तत्त्व काया की हड्डियों को मजबूत करने वाला होता है। साथ ही प्रोटीन, पोटास, फास्फोरस, गंधक, क्लोरीन आदि भी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इसके भीतर जो खटास होती है वह साइट्रिक अम्ल की है जो कि नींबू तथा नारंगियों में पाया जाता है।

शरीर को पोषण प्रदान करने वाले सूक्ष्म तत्त्व जिनको अंग्रेजी में विटामिन्स कहते हैं, टमाटर में भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इसमें विटामिन ए, बी, सी तीनों ही काफी मात्रा में मिलते हैं। इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स में यह खासियत है कि जहां दूसरे पदार्थों में मौजूद विटामिन्स थोड़ी सी आंच लगने से खत्म हो जाते हैं, वहीं इसमें मौजूद विटामिन्स साधारण आग में खत्म नहीं होते। इससे साबित होता है कि यह एक बहुत ही फायदेमंद सब्जी है। इसके इस्तेमाल से दस्त साफ होता है, खून की कमियां नष्ट होती है एवं बेरी-बेरी, गठिया एवं एक्जिमा की अवस्था में ज्यादा लाभकारी होता है। बच्चों के सूखा रोग में लाल टमाटर का रस देने से ज्यादा फायदा होता है। 

स्ट्रॉबेरी-मादक महक से परिपूर्ण लाल रंग से भरी स्ट्रॉबेरी का नाम लेते ही मुख में पानी आ जाता है। ये लाल सुर्ख रंग से परिपूर्ण स्ट्रॉबेरी खट्टे-मीठे स्वाद से मन को हरने वाली, मीठी महक व अपने खास गुणों के कारण जानी-पहचानी जाती है।

जानकारी के मुताबिक स्ट्रॉबेरी गुलाब के समूह का फल है। आडू , सेब तथा स्ट्रॉबेरी एक ही समुदाय से वास्ता रखते हैं। आज कल ताजे फलों के अलावा जैम, केक, आइसक्रीम, जूस, मिल्क शेक आदि मिष्ठानों में इसके रंग, महक, रस का उपयोग होने लगा है। स्ट्रॉबेरी जीवनी तत्त्व, रेशे, मैगनीज एवं पोटैशियम से परिपूर्ण होता है और इसमें पेक्टिन (फल के रेशे) पाए जाते हैं। ये ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) तथा कोलेस्ट्रॉल को संयमित करने में सहायक होते हैं।

लाल राजमा-आहार में प्रोटीन, एंटी ऑक्सीडेंट्स तथा रेशे की उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है। प्रोटीन टूटी-फूटी कोशिकाओं को दुरुस्त व दोबारा बनाने का काम करता है। इसमें विद्यमान रेशा, ओमेगा-3 तथा एंटी ऑक्सीडेंट्स अनेक प्रकार की व्याधियों से दूर रखने के साथ ही कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी कम करते हैं।

चेरी-मीठे जायके वाली चेरी में काफी मात्रा में फोटोकेमिकल तथा एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। इसमें पाया जाने वाला मेलाटॉनिन निद्रा की अनियमितता को ठीक रखने, जेट लेग को खत्म करने तथा स्मरण शक्ति को बढ़ाने में सहायक है।

शलजम-शलजम क्रूसी फेरी कुल का एक सदस्य है। इसके अन्य सदस्य मूली, गाजर है। शलजम, गाजर, मूली की भांति का कंद (गूदेदार जड़) है। ज्यादातर शलजम की जड़ ही पकाकर सब्जी के रूप में खाई जाती है। यह अचार, सलाद, मुरब्बे के तौर पर भी प्रयोग में लाया जा सकता है। 

इसमें प्रचुर मात्रा में पोषक तत्त्व पाए जाते हैं। इसमें पाए जाने वाले पोटैशियम, फास्फोरस, कैल्शियम एवं विटामिन्स की वजह से यह अनेक व्याधियों का शमन करने की ताकत रखता है। इसके प्रत्येक 100 ग्राम खाने योग्य हिस्से में करीब 69 प्रतिशत जल, 28.2 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 1.2 प्रतिशत प्रोटीन, 0.8 प्रतिशत रेशा (फाइबर) मौजूद रहता है। इसमें प्रति 100 ग्राम में 20 मिलीग्राम कैल्शियम (चूना), 50 मिलीग्राम फास्फोरस, 0.8 मिलीग्राम आयरन पाया जाता है।

शलजम की सब्जी पाचक, तीखी, पथरी को निकालने वाली, मृदुरेचक मानी जाती है। इसमें मौजूद ग्लूकोसिनोलेट्स के कारण ही शलजम में तीखापन होता है। ज्यादातर बलगम से पैदा होने वाली व्याधियों, वृक्कों से जुड़े विकारों तथा कोष्ठबद्धता में इसका प्रयोग अधिक लाभदायक होता है। यह त्वचा व्याधियों में भी मुफीद है। इसके लगातार प्रयोग से खून का शोधन होकर चेहरे के फोड़े-फुंसी, मुंहासे, दाग आदि मिटाकर चेहरा आभामय हो जाता है। वैज्ञानिक शोधों से भी इस बात का खुलासा हो चुका है कि ग्लूकोसिनोलेट्स बड़ी आंत की कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि  को धीमा करता है।

सेब-जायकेदार होने के साथ ही यह ज्यादा ऊर्जादायक और स्वास्थ्यवर्धक है। इसमें पेक्टिन नामक घुलनशील रेशा (फोक) होता है। इसलिए यह भोजन के पाचन तथा विशाक्त तत्त्वों को अवशोषित करने में आंतों की सहायता करता है। इसको खाने से हड्डियां सुदृढ़ होती हैं। सेब में एंटी ऑक्सीडेंट फ्लैवनायड्स और विटामिन सी होते हैं जो कि खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर न्यून करते हैं। एक सेब में करीब 8 मिलीग्राम विटामिन सी और प्रचुर मात्रा में विटामिन ए होता है। कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट, सोडियम, फास्फोरस और पोटैशियम भी भरपूर मात्रा में होता है अर्थात् सेब में भरपूर मात्रा में पोषक तत्त्व पाए जाते हैं।

सेब खाते वक्त ज्यादातर व्यक्ति उसका छिलका फेंक देते हैं, किंतु छिलके में तथा छिलके के ठीक नीचे के गूदे में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यथार्थ तो यह है कि छिलके से दूरी बढ़ने के साथ ही छिलके के अंदर के हिस्से में विटामिन सी की मात्रा कम होती जाती है। यही वजह है कि जो व्यक्ति छिलका समेत सेब खाते हैं, उनके मसूढ़ों में रक्त नहीं निकलता और दांतों व मसूढ़ों की सफाई भी होती हैै। सेब के गूदे की अपेक्षा छिलके में विटामिन ए भी पांच गुना ज्यादा होता है। इसलिए सेब छीलकर खाना किसी भी दशा में बेहतर नहीं है बल्कि खाने से पूर्व धोना न भूलना, चाहें तो इसका रस भी ले सकते हैं।

तरबूज-रंगीन, रसीला फल तरबूज का 80 प्रतिशत भाग पानी होता है। यह आयरन, गंधक, तांबा, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ए, थायमिन, राइबोफ्लेविन व एस्कोर्बिक एसिड का बेहतर स्रोत है। तरबूज का हल्का लाल वाला भाग (हरे छिलके के बाद वाला भाग) विटामिन का अच्छा प्रति उपचायक (एंटी ऑक्सीडेंट) है तथा बीटा कैरोटिन से दोगुना ताकतवर होता है। यह विटामिन ई की सामर्थ्य को भी दस गुना बढ़ा देता है, जिससे त्वचा को हानि पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स निष्क्रिय हो जाते हैं। इन्हीं की वजह से त्वचा को हानि पहुंचती है एवं उस पर झुर्रियां उत्पन्न होती हैं।

गर्मी का शमन करने के अतिरिक्त यह तंदुरुस्ती व ताजगी को भी कायम रखता है। इसमें शरीरगत कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के विलक्षण गुण पाए जाते हैं। तरबूज के रस से ही शर्बत बनाया जाता है जो ठंडक तो प्रदान करता ही है साथ ही भूख में भी वृद्धि करता है। पुराने बुखार ओर मलेरिया को मिटाने वाला तथा वात-कफ शामक, धातु-वर्धक, रक्तवर्धक और स्वादिष्ट होता है। गर्मी में पानी की आपूर्ति कर लू (अंशुघात) से रक्षा करता है। यह प्रकृति प्रदत्त ठंडाई है।

चुकंदर-इसमें अधिक मात्रा में खनिज-लवण पाए जाते हैं। चुकंदर के पोषक तत्त्वों में प्रोटीन, कार्बोहाइडे्रट, कैल्शियम, फास्फोरस, नमी, लोहा, वसा, विटामिन ए, बी1, बी2, सी, डी, सोडियम, क्लोरीन,   फोलिक एसिड, सल्फर, आयोडीन खास हैं। इसमें विटासियानिन या पिगमेंट भी पाया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार विटासियानिन (वह रंग, जो चुकंदर को रंगयुक्त करता है) गांठ (ट्यूमर) आदि को नष्ट करने वाला एक समृद्धिशाली घटक है।

चुकंदर में पानी तथा रेशों की अधिक मात्रा होने से यह पाचन में सहायक होता है। चुकंदर में फोलिक एसिड की भी पर्याप्त मात्रा पाई जाती है। यह तत्त्व दिमाग और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी जन्मजात खामियों को रोकने में सहायक है। हालांकि जमीन के भीतर पैदा होने वाली इस तरकारी में आयरन तत्त्व न्यून मात्रा में पाया जाता है लेकिन जो है वह उच्च कोटि का है।

ज्यादातर चिकित्सक और शोधकर्ताओं के प्रयोगों से यह साबित हुआ है कि  चुकंदर खून की मात्रा में वृद्धि करता है और चेहरे की कांति बरकरार रखता है। चुकंदर के कंद में एक तरह की शर्करा (शक्कर) पाई जाती है, जिसे ‘सुक्रोस’ कहते हैं। समस्त पोषक तत्त्वों के गाढ़े लाल रंग के रस को पाने के लिए तरोताजा चुकंदर ही प्रयोग करें, ताकि उसका छिलका सही-सलामत रह सके। न कभी चुकंदर का छिलका हटाएं और न ही उसकी मूल (जड़) को काटें, बल्कि उसी दशा में उसे पकाएं, ताकि पर्याप्त पोषक तत्त्व प्राप्त हो सकें।

खोजों से यह बात उभर कर आई है कि चुकंदर के अधिक पकाने से इसमें पाया जाने वाला लाल रंग का रस ट्यूमर पर हमला करने की सामर्थ्य खो बैठता है। इसलिए इन्हें धीमी आंच पर ही पकाएं, ताकि इसके पोषक तत्त्व कायम रह सकें।

लाल मिर्च-लाल मिर्च में विटामिन ए, सी तथा बी 6 भरपूर मात्रा में पाया जाता है। एंटी ऑक्सीडेंट को कायम रखने, मस्तिष्क को तीव्र करने के साथ ही उसकी गतिशीलता को बढ़ाने, त्वचा, नेत्रों तथा मांसपेशियों को ताकत देने का कार्य करते हैं। मिर्च रेशा, पोटैशियम, मैगनीज जैसे तत्त्वों को काया में पहुंचाने का भी अच्छा साधन है, जो वजन पर अंकुश रखने के साथ ही कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी कम करते हैं। 

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