रोजमर्रा की जिंदगी में बरतें कुछ सावधानियां तो नहीं होगी किडनी सम्बंधित समस्याएं: World Kidney Day 2024
World Kidney Day

World Kidney Day 2024: आज की बदलती जीवन शैली, गलत आदतें और अनहेल्दी फूड हैबिट्स की बदौलत कई गंभीर बीमारियां पैर पसारती जा रही हैं, जो चिंता का विषय हैं। जिनमें से किडनी डिजीज भी है जो उम्रदराज लोगों में ही नहीं, युवाओं और बच्चों में भी देखी जा सकती है। 10 में से 1 व्यक्ति किडनी की किसी न किसी बीमारी का शिकार हो रहा है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के हिसाब से दुनिया भर में करीब 85 करोड़ लोग किडनी से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे हैं। जागरुकता की कमी और समय पर समुचित उपचार न करा पाने के कारण हर वर्ष तकरीबन 30 लाख लोगों की मौत भी हो जाती है। जबकि प्रारंभिक स्तर पर ही इलाज शुरू कर दिया जाए तो काफी हद तक इसे खराब होने से बचाया जा सकता  है। किडनी बीमारी के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार को ‘वर्ल्ड किडनी डे‘ मनाया जाता है।

किडनी या गुर्दे शरीर का एक छोटा अंग होने के बावजूद हमें हेल्दी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक किडनी में करीब 10 लाख फिल्टर यूनिट होते हैं जिनमें सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं-नेफ्रान होते हैं। किडनी एक मिनट में 125 मिलीलीटर या रोजाना करीब 200 लीटर ब्लड और 2 लीटर यूरिन बनाते हैं। किडनी ब्लड से यूरिक एसिड जैसे टाॅक्सिक या विषैले पदार्थों को फिल्टर करती है और उन्हें यूरिन के जरिये फ्लश आउट करती है। बाॅडी में नमक, पोटेशियम, यूरिक एसिड जैसे रसायनों के स्तर में संतुलन बनाए रखती हैं। साथ ही किडनी से कई हार्मोन भी निकलते हैं जो लाल रक्त कोशिकाएं बनाने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

लेकिन कई कारणों से जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पातीं तो यूरिन में एलब्यूमिन-ऐथ्रोप्रोटीन नामक प्रोटीन, कैल्शियम, सोडियम, पोटेशियम और फास्फेट की मात्रा अधिक हो जाती है। क्रिएटिनिन जैसे विषैले पदार्थ बाहर न निकलकर शरीर में ही स्टोर होना शुरू हो जाते हैं। यूरिक एसिड बढ़ जाता है जो किडनी और शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है। लेकिन जागरुकता की कमी और समुचित उपचार के अभाव में किडनी खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। किडनी की अनेक बीमारियों या किडनी फैल्योर की स्थिति आ जाती है जिसकी वजह से व्यक्ति असमय मौत का भी शिकार हो जाता है।

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कितनी तरह की होती है किडनी बीमारी

World Kidney Day
World Kidney Day

मरीज की स्थिति के हिसाब से किडनी बीमारी कई तरह की होती है-

एक्यूट किडनी फैल्योर: अनावश्यक रूप से दर्दनिवारक दवाइयों का सेवन करने, एलर्जी के चलते यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है। इसमें किडनी अचानक काम करना बंद कर देती है जिसका असर मरीज की सेहत पर पड़ता है। लेकिन एक्यूट किडनी फैल्योर को समुचित उपचार और डायलिसिस से काबू पाया जा सकता है।

क्राॅनिक किडनी फैल्योर: डायबिटीज, ब्लड प्रेशर के मरीज क्राॅनिक किडनी फैल्योर का शिकार होते है। इसमें किडनी धीरे-धीरे खराब हो जाती है, लंबे समय तक खराब रहने पर सूखती जाती है और दोबारा ठीक नहीं हो पाती। किडनी ठीक से काम न कर पाने के कारण उनके ब्लड में क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड जैसे विषैले पदार्थ बाहर न निकलकर शरीर में ही स्टोर होना शुरू हो जाते हैं। जिससे किडनी फैल्योर हो जाता है।

  • किडनी स्टोन: ठीक से काम न करने की वजह से किडनी में यूरिक एसिड जमा होने लगता है जो धीरे-धीरे स्टोन का रूप ले लेता है। 
  • नेफ्रोटिक सिंड्रोम: इसमें यूरिन में प्रोटीन का रिसाव होने से शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम हो जाती है और कोलेस्ट्राॅल लेवल बढ़ जाता है। इससे शरीर के कई अंगों में सूजन आ जाती है और किडनी फैल्योर का खतरा रहता है। यह बीमारी बच्चों में भी देखी जाती है।
  • यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन: मरीज को यूरिन रुक-रुक कर कई बार आता है और यूरिन पास करने में जलन भी होती है।

क्या है कारण

Kidney Disease Problem
Kidney Disease Problem

आरामपरस्त जीवनशैली, अस्वास्थ्यप्रद खानपान, कई गलत आदतें किडनी खराब होने के लिए जिम्मेदार होती है। इनसे किडनी पर भी दबाव पड़ता है, किडनी की कार्यक्षता प्रभावित होती है और दबाव लंबे समय तक बने रहने पर खराब भी हो जाती है।

  • हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी में नसों पर दबाव पड़ता है जिससे किडनी अचानक काम करना बंद कर सकती है या खराब हो जाती है।
  • आनुवांशिक, पाॅलिसिस्टिक किडनी, किडनी डिस्प्लेसिया, यूटीआई इंफेक्शन जैसे कारणों की वजह से किडनी सूख जाती है और अपना काम ठीक से नही कर पाती।
  • जंक फूड के के अधिक सेवन से शरीर में नमक-चीनी का बढ़ता लेवल।
  • खाने में ऊपर से नमक डालकर खाना।
  • बाॅडीबिल्डिंग के लिए आहार में प्रोटीन की अधिक मात्रा लेना या प्रोटीन सप्लीमेंट्स का सेवन करना।
  • स्टेराॅयड या दर्दनिवारक दवाइयों का अधिक प्रयोग।
  • पानी या अन्य तरल पदार्थ जरूरत से कम मात्रा में लेने से डिटाॅक्सीफाई न हो पाना।
  • लंबे समय तक यूरिन रोके रहना।
  • नियमित रूप से व्यायाम न करना।
  • अल्होहल या तंबाकू का सेवन करना।

क्या हैं लक्षण

प्राइमरी स्टेज में आमतौर पर किडनी खराब होने के लक्षण पकड़ में नहीं आते। फिर भी कुछ लक्षण किडनी में गड़बड़ी होने की ओर इशारा करते हैं, जिनसे व्यक्ति को सचेत हो जाना चाहिए और यथासंभव डाॅक्टर केा कंसल्ट करना चाहिए-

  • शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन आना जैसे-चेहरे, पैर और टखनों में।
  • कमजोरी और थकान महसूस करना।
  • किसी भी काम को करने में एकाग्रता की कमी।
  • भूख कम लगना, पेट में जलन और दर्द रहना, घबराहट रहना।
  • माशपेशियों में खिंचाव और ऐंठन होना।
  • कमर के नीचे दर्द होना।
  • बार-बार यूरिन पास करने की इच्छा होना या यूरिन रुक-रुक कर आना। यूरिन पास करने में जलन होना या युरिन के साथ ब्लड आना।
  • रात में बार-बार यूरिन पास करना।

कैसा होता है डायग्नोज

डाॅक्टर मरीज का ब्लड प्रेशर और किडनी की कार्यप्रणाली की जांच करते हैं। इसके लिए मरीज के ये टेस्ट किए जाते हैं-किडनी की फिल्टर क्षमता को जांचने के लिए ग्लोमेरूलर फिल्टरेशन रेट (जीआरएफ) टेस्ट, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, बाॅयोप्सी। 

क्या है उपचार

Treatment
Treatment

मरीज और रोग की स्थिति के हिसाब से उपचार किया जाता है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को पहले नियंत्रित किया जाता है। एक्यूट किडनी फैल्योर के मरीज का उपचार अगर सही समय पर शुरू कर दिया जाता है, तो दवाइयों की मदद से मरीज जल्दी ठीक हो सकता है। लेकिन अगर किडनी 90 फीसदी से ज्यादा खराब हो चुकी है, तो मरीज को डायलिसिस पर रखा जाता है। डायलिसिस में अस्थाई तौर पर किडनी का ब्लड फिल्टर करने का काम मशीन करती है। मरीज को सप्ताह में 1-2 बार रेगुलर करवाना पड़ता है। स्थिति गंभीर होने पर किडनी ट्रांसप्लांट करना पड़ता है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए बरतें सावधानियां

  • नियमित रूप से व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें।
  • समय-समय पर मेडिकल चेकअप कराते रहें। ब्लड शूगर और ब्लड प्रेशर के स्तर को नियंत्रित रखें।
  • चिकित्सकीय परामर्श के बिना कोई दवाई न लें। खासकर जब तक बहुत जरूरी न हो, दर्दनिवारक दवाइयां  या स्टेराॅयड लेने से बचें।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें। मांस, अंडा, पालक, साग, टमाटर जैसी चीजों से परहेज रखें।
  • आहार में नमक की मात्रा कम रखें। ऊपर से नमक डालकर खाने से बचें।
  • रोजाना 3-4 लीटर या 10-12 गिलास पानी या लिक्विड डाइट जरूर लें।
  • ध्रूमपान और नशीले पदार्थों का सेवन न करें।

(डाॅ विक्रम कालरा, नेफ्रोलाॅजिस्ट, दिल्ली )