हमारे पोषण की आवश्यकता हर स्तर और उम्र पर बदलती रहती है। उम्र के हर पायदान पर खुद को स्वस्थ रखने के लिए हमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल के अलग-अलग मात्रा की आवश्यकता पड़ती है। यदि हम अपनी उम्र को ध्यान में रखकर भोजन करेंगे, तभी स्वस्थ रह पाएंगे। खासकर महिलाओं को अपने स्वास्थ्य की देखभाल अतिरिक्त तौर पर करनी चाहिए, क्योंकि वे स्वस्थ रहेंगी तभी अपने परिवार का ख्याल रख पाएंगी।

किशोरावस्था में आपका खान- पान

 

इस उम्र में शरीर का मेटाबोलिक रेट (चयापचय स्तर) काफी अधिक रहता है। हम जो भी खाते हैं, वो ऊर्जा में तब्दील हो जाता है। शरीर के विकास के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है। इसके लिए डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन जरूरी है। हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम जरूरी है, चूंकि कंकाल की बनावट में 45 प्रतिशत का इजाफा किशोरावस्था में हो जाता है। जो शाकाहारी भोजन करते हैं, उन्हें पनीर या सोया अधिक मात्रा में खाना चाहिए। कोल्ड ड्रिंक्स, चाय और कॉफी का सेवन कम से कम करना चाहिए, क्योंकि कैफीन हड्डियों से कैल्शियम को निथार लेता है। विटामिन बी की आवश्यकता विकास के लिए जरूरी है। इस समय हड्डियों का विकास भी हो रहा होता है तो विटामिन डी भी जरूरी है। विटामिन ए के लिए नारंगी और पीले फल के साथ सब्जियां, विटामिन सी के लिए खट्टे फल और विटामिन ई के लिए बादम, पिस्ता जरूरी है। प्रतिरक्षा प्रणाली न हो, इसे लिए एनीमिया और आयरन की कमी से बचना जरूरी है। आयरन की कमी न हो, इसे लिए सूखे खुबानी, मुनक्का, सलाद खाने के अलावा दाल में पालक डालकर खाना चाहिए।

बीसवें उम्र में आपका खान- पान

 

कड़ी मेहनत वालै दौर में बैलेंस्ड डाइट लेना मुश्किल हो जाता है। लेकिन यह याद रखें कि आराम से मिलने वाले भोजन में विटामिन और मिनरल की कमी रहती है। ये सब कचड़ा खाने से शरीर स्वस्थ नहीं रह पाता। टिश्यू के विकास के लिए प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट आवश्यक है। प्राकृतिक रेशे वाले स्टार्च युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। ये स्नैक की जरूरत को कम करते हैं। इनसे मस्तिष्क और मांसपेशियों को ऊर्जा भी मिलती है। पौटैशियम युक्त केला, आलू (छिलके सहित), मशरूम खाएं। इस उम्र में विटामिन सी बेहद जरूरी है क्योंकि यह तनाव को दूर भगाता है। दिल के रोग से बचाव और बच्चे का जन्म ठीक से हो जाए, इसे लिए पालक और हरी सब्जियां खूब खानी चाहिए। मजबूत हड्डियों के लिए रोजाना दो गिलास दूध जरूर पिएं। रात के खाने में कैल्शियम के लिए ब्राोकोली खा सकती हैं, जो मैग्नीशियम, विटामिन के और फॉस्फोरस का भी अच्छा रुाोत माना जाता है। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और दिल के रोग से बचाव के लिए पौष्टिक खाने पर जोर दें।

तीसवें उम्र में आपका खान- पान

 

बीसवें पायदान से तीसवें में पहुंच गई हैं तो शरीर की जरूरत भी बदल जाती है। रात में फ्रेंच फ्राइज खाना अब आपकी कमर पर दिखने लगेगा। परिधानों का साइज बढ़ने लगा है। चयापचय स्तर कम हो गया है और वजन बढ़ने लगा है। टाइप 2 डायबिटीज के खतरे हो गए हैं। आप अपनी शारीरिक घड़ी को पौष्टिक और सही भोजन के जरिए पीछे कर सकती हैं। वसा और शक्कर की मात्रा कम कर दें। नमक वाले स्नैक्स की जगह सेब, गाजर जैसे रंगीन फल-सब्जियां खाएं। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक लें। सलाद ड्रेसिंग के लिए ऑलिव ऑयल लें ताकि कोलेस्ट्रॉल का सही स्तर बना रहे। इस उम्र तक हड्डियों को जितना सघन होना होता है, हो जाती हैं। इसलिए हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम, विटामिन डी और विटामिन के वाले भोजन करने चाहिए।

चालीसवें उम्र में आपका खान- पान

 

यही वो उम्र है जब जीवनशैली से संबंधित बीमारियां हमें चोट पहुंचाने लगती हैं। इस उम्र में गिरी का सेवन अति आवश्यक है। खासकर बादाम का, क्योंकि ये कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं, दिल की बीमारी के खतरे को कम करते हैं। दरअसल इस उम्र में हमारा प्रतिरक्षा प्रणाली धीमी होने लगती है। इस उम्र में अधिकतर महिलाएं कार्बोहाइड्रेट कम लेना शुरू कर देती हैं, जो ठीक नहीं है। जबकि उन्हें यह नहीं पता होता कि कार्बोहाइड्रेट शरीर में ऊर्जा की कमी को पूरा करता है। अपनी डाइट से स्टार्च फूड बिल्कुल न कम करें। सफेद ब्रोड की बजाय व्हाइट ब्रोड, मैदे की जगह गेहूं के आटे का पूरा इस्तेमाल करें। ये भोजन रेशेदार भी होते हैं और पेट को भरे होने का अहसास भी देते हैं। मस्तिष्क और मांसपेशियों के लिए ऊर्जा के रुाोत भी होते हैं। फल और सब्जियों से मिले रेशे जीवनशैली से संबधित बीमारियां जैसे उच्च शर्करा और कोलेस्ट्रॉल का आधिक्य हो जाता है। इससे पाचन तंत्र भी बिगड़ जाता है। केला खाने से दृष्टि ठीक होती है। पोटैशियम युक्त अनाज, फल, सब्जियां इससे कैलोरी कम मिलती है और इनमें रोगों से लड़ने की शक्ति भी होती है। ताजे पानी की मछलियां खाने से आर्थराइटिस से बचाव होता है क्योंकि इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है। खूब सारे बीन्स खाएं। एक ऑस्ट्रलियाई अध्ययन बताता है कि सब्जियां और फलिया खाने से महिलाओं को कम झुर्रियां और सन टअनिंग-इरिटेशन कम होता है चूंकि बीन्स में एंटिऑक्सिडेंट होता है।

पचासवें और इससे ऊपर की उम्र में आपका खान- पान

 

पालक में लूटिन और जेक्सैनथिन होता है, जो आंखों की दृष्टि को दुरुस्त रखता है। सेब और प्याज में प्लांट पोलीफेनोल्स होता है, जो कुछ तरह के कैंसर से हमें बचाता है।  विटामिन बी, एंटिआक्सिडेंट, कैल्शियम, विटामिन डी जरूर लें। इस उम्र में एस्ट्रोजेन का स्तर कम होता है, जिससे महिलाओं में दिल के रोग, ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। विटामिन बी6 और बी12 जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स दिल को सुरक्षित रखते हैं। विटामिन बी6 के लिए केला, आलू और अनार खाएं। विटामिन बी12 के लिए अंडा, मछली और चिकन। मूंगफली, पहाड़ी बादाम, अखरोट में विटामिन ई होता है, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को दुरुस्त रखता है। गिरी में एर्जिनिन नामक एमिनो एसिड भी होता है, जो हमारे रक्त प्रवाह को बढ़ाता है। स्तन कैंसर से बचाव के लिए गहरा हरा, गहरा पीला, संतरा, ब्राोकोली सही है। कैल्शियम के लिए कम वसा युक्त दूध, चीज़, दही और कॉटेज चीज़ खाएं। इस उम्र के लोगों को खाने के प्रति पूरी जिम्मेदारी बरतने की जरूरत है चूंकि इनमें खाने को पचाने की शक्ति कम हो जाती है। प्रोटीन के लिए सलाद के साथ ग्रिल्ड चिकन, रोस्टेड चिकन खाएं। 

(डाइटीशियन गीतिका अहलूवालिया से बातचीत पर आधारित)

 

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