अब के दौर में, जहां जिंदगी भागती हुई है, दादी और नानी की कहानियां कहीं दूर छूट गए हैं। मम्मी- पापा को इतना समय नहीं मिलता कि वे बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिता सकें तो भला कहानियां सुनाने की बात ही दिमाग में कहां आएगी। आज के दिनों में युवा माता- पिता पर खास किस्म का दबाव है बच्चों के पालन- पोषण को लेकर क्योंकि ये लोग एकल परिवार में रहते हैं। इनके पास समय कम है और गैजेट्स के दौर में बच्चों को कहानियां सुनाने का समय ही कहां बचा है। जबकि सच तो यह है कि बच्चों को कहानियां सुनाने से उनके व्यक्तित्व पर खासा असर पड़ता है, उनके अंदर कई ऐसे बदलाव आते हैं, जो उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। कहानी सुनाना बहुत आसान है, चाहें तो किताब से पढ़कर कहानी सुनाएं या फिर अपने बचपन की किसी बात को सुना दें। चाहें तो मोबाइल से ही पढ़कर सुना दें। बच्चों को कहानियां सुनाने के कई फायदे हैं, जिनमें से महत्वपूर्ण बारह निम्न हैं-

मिलते हैं बुद्धिमत्ता, साहस, ईमानदारी जैसे गुण

विश्व के हर हिस्से का बच्चा कहानियां सुनना चाहता है। वे अपने पसंदीदा चरित्र के बारे में सुनना चाहते हैं और उनकी नकल भी उतारते हैं। बच्चों को संदेश से भरी कहानियां सुनाकर आप उनके अंदर बुद्धिमत्ता, साहस, ईमानदारी आदि जैसे गुण डाल सकते हैं।

विभिन्न संस्कृति और परंपराओं के बारे में जागरुक

अपने बचपन और विभिन्न आयोजनों की कहानियां सुनाकर आप अपने नन्हे को विभिन्न संस्कृति और परंपराओं के बारे में जागरुक कर सकते हैं। विभिन्न पारिवारिक सदस्यों के बारे में बताकर आप उसे अपने पूर्वजों और बुजुर्गों केबारे में बता सकते हैं। इस तरह से उन्हें अपने परिवार के बारे में बेहतरी से समझने का मौका मिलेगा। कहानी सुनाकर आप उन्हें विश्व की संस्कृति और वहां की परंपराओं के बारे में बता सकते हैं। विभिन्न देशों की कहानियां सुनाने की कोशिश करें ताकि आपके लाडले को विश्व को समझने में आसानी हो।

नए शब्द एवं मुहावरों की सीख

अपने लाडले को आप जब कहानी पढ़कर सुनाते हैं तो वह भाषा को समझता है और नए शब्द एवं मुहावरे भी सीखता है। इस तरह से भी आप अपने नन्हे को नए शब्द और उच्चारण सीखा सकते हैं।

ध्यान केंद्रित करने में मिलती है मदद

अधिकतर बच्चे देर तक नहीं सुनना चाहते हैं और लंबे समय तक किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में उन्हें दिक्कत होती है। साथ ही, वे बातें ज्यादा करते हैं और सुनते कम हैं। कहानी सुनाकर आप बच्चों में सुनने और ध्यान केंद्रित करने का भाव जगा सकते हैं। वे देर तक सुनने को बाध्य भी हो जाते हैं कि कहानी में आगे क्या हुआ। वे अधिक आटेंटिव होंगे और सीखेंगे कि वे किस तरह किसी एक विषय पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

बढ़ती है रचनात्मकता और कल्पनाशीलता

एक कहानी सुनने के दौरान बच्चा कहानी के चरित्र, स्थान आदि के बारे में कल्पना करता है, भले ही वह उसे देख न रहा हो। एह स्क्रीन पर कहानियां देखने से बिल्कुल अलग है। कहानी सुनते समय उसकी कल्पना दूर- दूर तक चली जाती है। वे कहानी को अपने हिसाब से सोचते हैं और वैसे ही देखते हैं जैसे वे देखना चाहते हैं। इस तरह से उसकी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता बढ़ती है और वह नए आइडियाज और सोच को लेकर आगे बढ़ता है।

याददाश्त तेज करने में सहायक  

आप चाहें तो कहानी सुनाने के माध्यम से बच्चे की याददाश्त को भी तेज करने में मदद कर सकते हैं। एक बार आपने कहानी पढ़ा दी तो कुछ दिनों बाद उसे फिर से वह कहानी सुनाने को कहें। इस तरह से उसकी याददाश्त तेज होगी और ध्यान केंद्रित होने में आसानी होगी।

समझने की भावना होती है विकसित

कहानी सुनाना बच्चों के लिए आगे बढ़ने का एक माध्यम हो सकता है। कई बच्चे रटकर चीजों को याद करते हैं, वे विषय को समझते नहीं हैं। नियमित तौर पर कहानी सुनाकर आप अपने बच्चे को पढ़ने के दौरान समझने की भावनाा को विकसित कर सकते हैं। इस तरह से वे अपने विषय को पहले समझेंगे और फिर उन्हें याद होगा।

आत्मविश्वास होता है उत्पन्न

कई दफा बच्चे सवाल पूछने से घबराते हैं, भले ही उनके दिमाग में कितनी उछल- कूद क्यों न मची हो। कहानी के माध्यम से बच्चे सही सवाल पूछने की कला भी सीख पाते हैं। किस तरह से बात करनी चाहिए, वे यह भी सीखते हैं और उनके अंदर आत्मविश्वास भी पैदा होता है।

मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने की हिम्मत

मुश्किल परिस्थितियों में बच्चे भ्रम में पड़ जाते हैं। विभिन्न चरित्रों के बारे में कहानियां सुनाकर आप उन्हें कॉन्सेप्ट को समझने में मददकर सकते हैं। कहानियों के माध्यम से उन्हें यह भी समझाएं कि मुश्किल परिस्थितियां भी हमारे जीवन का हिस्सा है, जिस तरह खुशहाल समय। सही कहरनियां आपके बच्चे को जीवन की हर तरह की परिस्थितियों का सामना करने में मदद करती हैं।

बातचीत करने की क्षमता में भी विकास

कहानियां पढ़ने और सुनने से बच्चों में खुद को एक्सप्रेस करने की क्षमता का विकास होता है। यह उन्हें सिखाता है कि वे कैसे अपने विचार, सोच, एहसास और आइडिया को शेयर कर सकते हैं। कहानी सुनाते समय यह सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा आपसे सवाल पूछे, अपने विचारों को आपसे शेयर करे।

पढ़ाई करने को भी बनाता है आसान

अपने लाडले को कहानी सुनाने से आप उसे आगे के लिए तैयार करती हैं। अगर वह 2 या 3 साल का है तो आपके कहानी सुनने से वह स्कूल के लिए तैयार होता है क्योंकि कहानी सुनना चीजों एक सीखने को आसान और प्राकृतिक बनाता है।

बनाता है सामाजिक

कहानी सुनने के जरिए आपका बच्चा आपको या कहानी सुनने वाले को ध्यान से सुनता है, उस पर ध्यान देता है। इस तरह से उनमें धैर्य की भवन का विकास होता है। यह उन्हें दूसरे को चुपचाप सुनने और समझने को तैयार भी करता है। वे सीखते हैं कि किस तरह से हर व्यक्ति की सोचने और समझने की शक्ति अलग- अलग होती है।

 

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